भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शहरी और ग्रामीण सहकारी बैंकों में डिजिटल लेनदेन से जुड़े धोखाधड़ी मामलों में ग्राहकों की सुरक्षा मजबूत करने के लिए नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव दिया है। इसके लिए RBI ने ड्राफ्ट संशोधन दिशानिर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य डिजिटल बैंकिंग के बढ़ते उपयोग के बीच ग्राहकों को बेहतर सुरक्षा प्रदान करना है।
प्रस्तावित बदलावों में अनधिकृत इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन में ग्राहक की जिम्मेदारी सीमित करने के नियमों को और स्पष्ट किया गया है, साथ ही “फर्जी इलेक्ट्रॉनिक बैंकिंग लेनदेन” की विस्तृत परिभाषा भी दी गई है।
क्या माना जाएगा डिजिटल फ्रॉड
ड्राफ्ट के अनुसार, ऐसे मामले डिजिटल फ्रॉड माने जाएंगे जिनमें—
- धोखाधड़ी से प्राप्त क्रेडेंशियल्स का उपयोग कर भुगतान किया गया हो
- दबाव या मजबूरी में ग्राहक से ट्रांजेक्शन की मंजूरी ली गई हो
- फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग या अन्य धोखाधड़ी तरीकों से ग्राहक को पैसे ट्रांसफर करने के लिए गुमराह किया गया हो
RBI का कहना है कि UPI, मोबाइल बैंकिंग और डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल के कारण ग्राहकों की सुरक्षा के लिए मजबूत निगरानी और अलर्ट सिस्टम जरूरी है।
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₹500 से अधिक ट्रांजेक्शन पर तुरंत अलर्ट
प्रस्तावित नियमों के अनुसार, सहकारी बैंकों को अब ₹500 से अधिक के हर इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन पर तुरंत SMS अलर्ट भेजना होगा।
यदि ग्राहक ने ई-मेल आईडी बैंक में दर्ज कराई है, तो ई-मेल अलर्ट भेजना भी अनिवार्य होगा। RBI का मानना है कि समय पर सूचना मिलने से ग्राहक संदिग्ध लेनदेन की जल्दी पहचान कर सकेंगे।
24×7 शिकायत प्रणाली अनिवार्य
ड्राफ्ट में सहकारी बैंकों को 24 घंटे शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था बनाने का भी निर्देश दिया गया है। इसके तहत बैंक को कई चैनल उपलब्ध कराने होंगे, जैसे—
- फोन बैंकिंग सेवा
- SMS रिपोर्टिंग सुविधा
- समर्पित ई-मेल आईडी
- IVR सिस्टम
- टोल-फ्री हेल्पलाइन
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहक किसी भी समय फ्रॉड की सूचना तुरंत दे सकें।
ग्राहक की सीमित जिम्मेदारी
RBI ने ड्राफ्ट में यह भी दोहराया है कि यदि धोखाधड़ी बैंक की लापरवाही या सिस्टम की कमी के कारण होती है, तो ग्राहक की शून्य जिम्मेदारी होगी।
साथ ही, यदि किसी तीसरे पक्ष की वजह से फ्रॉड होता है और ग्राहक पांच दिन के भीतर इसकी सूचना दे देता है, तो भी ग्राहक पर कोई वित्तीय जिम्मेदारी नहीं डाली जाएगी।
छोटे फ्रॉड मामलों में मुआवजा
ड्राफ्ट दिशानिर्देशों में छोटे डिजिटल फ्रॉड के पीड़ितों को राहत देने के लिए मुआवजा व्यवस्था का प्रस्ताव भी रखा गया है।
- ₹50,000 तक के नुकसान के मामलों में
- ग्राहक को कुल नुकसान का 85% या अधिकतम ₹25,000, जो भी कम हो, मुआवजा मिल सकता है
यह व्यवस्था नए नियम लागू होने के एक वर्ष के भीतर होने वाले नुकसान पर लागू होगी।
1 जुलाई 2026 से लागू हो सकते हैं नियम
प्रस्तावित संशोधन 1 जुलाई 2026 से लागू किए जाने की योजना है।
RBI ने सहकारी बैंकों, उद्योग संगठनों और आम जनता समेत सभी हितधारकों से 6 अप्रैल 2026 तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। इसके बाद अंतिम नियम जारी किए जाएंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि नए नियम लागू होने से सहकारी बैंकिंग क्षेत्र में डिजिटल फ्रॉड से सुरक्षा और ग्राहक भरोसा दोनों मजबूत होंगे।
