रतलाम (मध्य प्रदेश): रतलाम पुलिस की साइबर सेल टीम ने एक बड़े अंतरराज्यीय साइबर अपराध नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जो कथित तौर पर म्यूल बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये की साइबर ठगी की रकम को इधर-उधर घुमाने में शामिल थे।
राज्य साइबर पुलिस मुख्यालय, भोपाल के निर्देश पर शुरू किए गए ऑपरेशन MATRIX के तहत यह कार्रवाई की गई। पुलिस ने एक संदिग्ध बैंक खाते पर निगरानी रखी थी, जिसमें लगातार असामान्य और बड़े वित्तीय लेनदेन दर्ज किए जा रहे थे।
जांच में सामने आया कि यह बैंक खाता रतलाम निवासी 23 वर्षीय प्रथम् मित्तल के नाम पर था, जिसमें 25 मार्च 2026 को 47.75 लाख रुपये जमा हुए थे। इस भारी लेनदेन ने जांच एजेंसियों का ध्यान आकर्षित किया और आगे की पड़ताल में इसे म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किए जाने की पुष्टि हुई।
यह मामला तमिलनाडु के कोयंबटूर निवासी केसी श्रीधर की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें इंटरनेट बैंकिंग और डिजिटल अरेस्ट स्कैम के जरिए 67.75 लाख रुपये की ठगी का आरोप लगाया गया था। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि ठगी की रकम का एक हिस्सा इसी रतलाम स्थित खाते से होकर गुजरा था।
पूछताछ के दौरान आरोपी प्रथम् मित्तल ने कथित रूप से स्वीकार किया कि उसने यह खाता अपने सहयोगियों हेमंत रायक और शुभम रेडा के निर्देश पर कमीशन के बदले खोला था और आगे नेटवर्क को उपलब्ध कराया था।
पुलिस के अनुसार, यह पूरा गिरोह कई म्यूल खातों, फर्जी पहचान और डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर देशभर में अवैध धन का लेनदेन कर रहा था। इसका उद्देश्य पैसों के असली स्रोत को छिपाना और जांच एजेंसियों को भ्रमित करना था।
जांच के दौरान मोबाइल फोन, बैंक दस्तावेज और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं, जिनमें कई संदिग्ध चैट्स और लेनदेन से जुड़े निर्देश पाए गए हैं। इनसे यह संकेत मिला है कि पूरा नेटवर्क सुनियोजित तरीके से काम कर रहा था।
सूत्रों के मुताबिक, यह गिरोह डिजिटल अरेस्ट स्कैम, निवेश धोखाधड़ी, फर्जी लोन ऑफर, यूपीआई फ्रॉड और ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड जैसे कई तरीकों से देशभर के लोगों को निशाना बना रहा था।
राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन (1930) के आंकड़ों के अनुसार, इन म्यूल खातों से जुड़ी 375 से अधिक शिकायतें दर्ज हुई हैं, जबकि कुल ठगी की राशि लगभग ₹77.72 करोड़ आंकी गई है।
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जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क लेयरिंग तकनीक का इस्तेमाल कर छोटे-छोटे ट्रांजैक्शन के जरिए पैसे को कई खातों में घुमाता था, ताकि बैंकिंग अलर्ट सिस्टम और निगरानी तंत्र से बचा जा सके।
इसके अलावा, फर्जी कंपनियों और शेल फर्मों का इस्तेमाल करके बैंक खातों को वैध व्यवसाय की तरह दिखाया जाता था, जबकि असल में ये केवल अवैध धन शोधन के लिए बनाए गए माध्यम थे।
अधिकारियों ने बताया कि गोपनीय संचार के लिए एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग ऐप्स का भी इस्तेमाल किया जा रहा था, जिससे नेटवर्क के सदस्यों की पहचान और लोकेशन छिपाई जा सके।
साइबर सेल ने इस पूरे मामले को गंभीर चेतावनी बताते हुए कहा है कि म्यूल अकाउंट आज के समय में साइबर अपराध की सबसे बड़ी कड़ी बन चुके हैं।
इस बीच, प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने इस तरह के नेटवर्क पर चिंता जताते हुए कहा कि ऐसे गिरोह बैंकिंग सिस्टम की कमजोर कड़ियों का फायदा उठाकर आम लोगों के खातों को अपराध का जरिया बना देते हैं।
उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट और निवेश फ्रॉड जैसे मामलों में म्यूल अकाउंट सबसे अहम भूमिका निभाते हैं, जिन्हें तोड़े बिना पूरे साइबर नेटवर्क को खत्म करना मुश्किल है।
अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के साथ बैंक डिटेल्स, OTP, सिम कार्ड या व्यक्तिगत दस्तावेज साझा न करें और किसी भी संदिग्ध लेनदेन की तुरंत सूचना 1930 साइबर हेल्पलाइन पर दें।
फिलहाल फॉरेंसिक टीमें जब्त किए गए मोबाइल फोन, लैपटॉप और बैंक रिकॉर्ड की गहन जांच कर रही हैं, ताकि पूरे अंतरराज्यीय नेटवर्क की फाइनेंशियल ट्रेल, लाभार्थियों और संभावित अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन का पूरी तरह खुलासा किया जा सके।
