फर्जी बैंक अकाउंट, 535 शिकायतें और 85 खातों के जरिए देशभर में फैला साइबर ठगी नेटवर्क, ‘ऑपरेशन म्यूल हंट’ में तेज कार्रवाई

₹2,500 करोड़ साइबर फ्रॉड: राजकोट में बड़ा खुलासा, 20 गिरफ्तार—बैंक अधिकारियों की भूमिका से जांच में हड़कंप

Roopa
By Roopa
5 Min Read

राजकोट (गुजरात)। गुजरात के राजकोट जिले में साइबर फ्रॉड का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है, जिसकी कुल संदिग्ध लेनदेन राशि अब बढ़कर ₹2,500 करोड़ से अधिक पहुंच गई है। इस मामले में पुलिस ने अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें तीन निजी बैंक अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं। यह कार्रवाई “ऑपरेशन म्यूल हंट” के तहत की जा रही है, जो देशभर में फैले साइबर अपराध नेटवर्क की जड़ों तक पहुंचने की कोशिश का हिस्सा है।

प्रारंभिक जांच में यह मामला पहले करीब ₹1,500 करोड़ का माना जा रहा था, लेकिन जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, लेनदेन और खातों का दायरा बढ़ता गया और अब यह आंकड़ा ₹2,500 करोड़ से अधिक हो चुका है।

बैंक अधिकारियों की भूमिका पर गंभीर आरोप

गिरफ्तार किए गए आरोपियों में तीन बैंक अधिकारी भी शामिल हैं, जिनकी पहचान निजी बैंकों के कर्मचारियों के रूप में हुई है। इन पर आरोप है कि इन्होंने फर्जी या संदिग्ध बैंक खातों को खोलने और उन्हें सक्रिय रखने में मदद की, जिनका उपयोग साइबर फ्रॉड नेटवर्क द्वारा किया जा रहा था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इन अधिकारियों ने संदिग्ध लेनदेन के बावजूद खातों को चालू रखने के लिए अतिरिक्त दस्तावेज तैयार किए और बैंक अलर्ट को भी टालने में मदद की। कुछ मामलों में हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन को कैश में बदलकर हवाला चैनलों के जरिए आगे भेजने के सबूत भी मिले हैं।

कैसे चलता था पूरा रैकेट

पुलिस जांच में सामने आया है कि यह नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम कर रहा था। फर्जी पहचान के जरिए बैंक खाते खोले जाते थे, जिन्हें बाद में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किया जाता था। इन खातों के जरिए डिजिटल अरेस्ट स्कैम, फर्जी लोन ऑफर और निवेश धोखाधड़ी जैसे अपराध किए जाते थे।

कई खातों को कृषि और व्यापारिक दस्तावेजों के नाम पर वैध दिखाने की कोशिश की गई थी, ताकि बैंकिंग सिस्टम में शक न हो। इस पूरे नेटवर्क में विभिन्न राज्यों के एजेंट भी शामिल पाए गए हैं।

85 बैंक खाते और 535 शिकायतें दर्ज

अब तक जांच में 85 बैंक खातों की पहचान की गई है, जो इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क से जुड़े हुए थे। इसके अलावा, राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर इस मामले से जुड़ी कुल 535 शिकायतें दर्ज की गई हैं, जो पूरे देश में फैले पीड़ितों की संख्या को दर्शाती हैं।

इन शिकायतों में लोगों से फर्जी कॉल, लिंक और निवेश योजनाओं के जरिए पैसे ठगने की घटनाएं शामिल हैं। कई मामलों में पीड़ितों को डिजिटल गिरफ्तारी का डर दिखाकर पैसे ट्रांसफर करवाए गए।

FutureCrime Summit 2026: Registrations to Open Soon for India’s Biggest Cybercrime Conference

20 गिरफ्तार, जांच जारी

राजकोट ग्रामीण पुलिस ने अब तक 20 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें बैंक अधिकारी, एजेंट और फर्जी खाता संचालक शामिल हैं। सभी आरोपी फिलहाल हिरासत में हैं या न्यायिक रिमांड पर जेल में बंद हैं।

पुलिस का कहना है कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और इस पूरे नेटवर्क के और बड़े नाम सामने आ सकते हैं। वित्तीय ट्रेल को ट्रैक करने के लिए डिजिटल फॉरेंसिक टीम और साइबर विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है।

जांच एजेंसियों की सख्त कार्रवाई

अधिकारियों का कहना है कि यह सिर्फ एक स्थानीय अपराध नहीं, बल्कि देशभर में फैला संगठित साइबर फ्रॉड नेटवर्क है, जिसमें बैंकिंग सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाया गया। जांच का फोकस अब इस बात पर है कि कितने अन्य बैंक अधिकारी या एजेंट इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।

निष्कर्ष

₹2,500 करोड़ का यह साइबर फ्रॉड मामला देश में डिजिटल बैंकिंग और साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। बैंकिंग सिस्टम के अंदर से मिली कथित मदद ने इस रैकेट को और भी खतरनाक बना दिया है। जांच एजेंसियों का अगला लक्ष्य इस पूरे नेटवर्क के मास्टरमाइंड और फाइनेंशियल चैनल्स तक पहुंचना है, ताकि इस तरह की बड़ी साइबर ठगी पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।

हमसे जुड़ें

Share This Article