हाउसकीपिंग कर्मचारी, ब्रांच मैनेजर और दो सहयोगियों ने मिलकर फर्जी आईडी व मोबाइल नंबर लिंक कर YONO ऐप से उड़ाए करोड़ों रुपये; ₹2.42 करोड़ नकद बरामद

SBI ब्रांच में अंदरूनी साजिश से ₹2.65 करोड़ की हेराफेरी: ‘निष्क्रिय खातों’ को निशाना बनाकर बैंक सिस्टम में सेंध

Roopa
By Roopa
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तेलंगाना के नलगोंडा जिले में बैंकिंग सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला बड़ा घोटाला सामने आया है, जहां स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) की एक कृषि व वाणिज्यिक शाखा में काम करने वाले एक आउटसोर्स कर्मचारी, एक बैंक मैनेजर और उनके दो सहयोगियों ने मिलकर लगभग ₹2.65 करोड़ की हेराफेरी कर डाली। पुलिस ने इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार कर उनके पास से करीब ₹2.42 करोड़ नकद बरामद किए हैं।

जांच में सामने आया है कि इस पूरे घोटाले की योजना बेहद सुनियोजित तरीके से बनाई गई थी, जिसमें बैंक के ही अंदर की जानकारी और सिस्टम एक्सेस का दुरुपयोग किया गया।

सूत्रों के अनुसार, आरोपी लेंडाला चक्रपाणि, जो पांच वर्षों से बैंक में हाउसकीपिंग और तकनीकी सहायता का काम कर रहा था, ने बैंक की कार्यप्रणाली को गहराई से समझ लिया था। इसी दौरान उसने बैंक के एक वरिष्ठ अधिकारी के साथ मिलकर निष्क्रिय खातों (inactive accounts) की पहचान की और उन्हें निशाना बनाया।

इन खातों से जुड़ी जानकारी निकालने के बाद आरोपियों ने फर्जी पहचान पत्र तैयार किए और खाताधारकों के नाम पर मोबाइल नंबर बदल दिए। इसके बाद उन्होंने बैंकिंग एप्लिकेशन के जरिए खातों तक पहुंच बनाकर धीरे-धीरे रकम अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी।

जांच में यह भी सामने आया कि इस पूरे नेटवर्क में दो अन्य लोग भी शामिल थे, जिन्होंने अपने परिचितों के बैंक खाते उपलब्ध कराए ताकि पैसे को आगे ट्रांसफर कर उसकी पहचान छिपाई जा सके। इसके बदले उन्हें कमीशन दिया जाता था।

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जानकारी के मुताबिक, इस घोटाले की शुरुआत तब सामने आई जब एक खाताधारक को KYC अपडेट से जुड़ा अलर्ट मिला। उसने बैंक से संपर्क किया, जिसके बाद आंतरिक जांच शुरू हुई और बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया कि लगभग ₹2,65,55,268 की राशि कई खातों से अवैध रूप से निकाली गई थी।

तकनीकी विश्लेषण और डिजिटल ट्रांजैक्शन ट्रैकिंग के आधार पर जांच टीम ने आरोपियों तक पहुंच बनाई और उन्हें गिरफ्तार किया गया। बरामद नकदी को एक बड़े हिस्से में घरों और ठिकानों पर छिपाकर रखा गया था।

साइबर और बैंकिंग फ्रॉड के विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामले अब केवल बाहरी हैकिंग तक सीमित नहीं रहे, बल्कि “इंसाइडर थ्रेट” यानी अंदरूनी कर्मचारियों की मिलीभगत सबसे बड़ा जोखिम बनती जा रही है।

इस मामले पर साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि ऐसे अपराधों में सबसे खतरनाक पहलू यह होता है कि अपराधी सिस्टम की कमजोरियों के साथ-साथ बैंक के अंदरूनी एक्सेस का भी उपयोग करते हैं। उनके अनुसार, “जब बैंकिंग सिस्टम के अंदर से ही लॉगिन क्रेडेंशियल और ग्राहक डेटा लीक होने लगे, तो डिजिटल सुरक्षा ढांचा पूरी तरह कमजोर पड़ जाता है।”

फिलहाल सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है और आगे की जांच में यह पता लगाया जा रहा है कि क्या इस नेटवर्क में और लोग भी शामिल थे या यह केवल कुछ व्यक्तियों तक सीमित था।

इस घटना ने एक बार फिर बैंकिंग सेक्टर में डेटा सुरक्षा, एक्सेस कंट्रोल और कर्मचारी निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर बहस छेड़ दी है।

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