कोटा/झालावाड़: राजस्थान के झालावाड़ जिले में साइबर ठगी के एक संगठित नेटवर्क का खुलासा करते हुए भवानीमंडी इलाके में बड़ी कार्रवाई की गई है। म्यूल बैंक खातों के जरिए करोड़ों रुपये के अवैध लेनदेन को अंजाम देने वाले रैकेट का भंडाफोड़ करते हुए तीन आरोपियों—ललित राणा (22), अजय विश्वकर्मा (25) और राजेश राठौड़ (43)—को गिरफ्तार किया गया है। आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में बैंकिंग उपकरण, डिजिटल डिवाइस और नकदी बरामद हुई है, जिससे इस नेटवर्क के बड़े स्तर पर सक्रिय होने के संकेत मिले हैं।
जांच के मुताबिक, अधिकारियों को गुप्त सूचना मिली थी कि स्थानीय निवासी ललित राणा अपने बैंक खाते का इस्तेमाल ‘म्यूल अकाउंट’ के रूप में कर रहा है। इस इनपुट के आधार पर शुरू की गई जांच में सामने आया कि वह अपने सहयोगियों के साथ मिलकर साइबर ठगी से जुड़े पैसों के ट्रांजेक्शन में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। इसके बाद टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
तफ्तीश में यह खुलासा हुआ कि यह गिरोह बैंक खातों की खरीद-फरोख्त करता था और उन्हें किराये पर देकर अवैध लेनदेन को अंजाम देता था। इन खातों का इस्तेमाल साइबर ठगी से हासिल रकम को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करने और उसके स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता था। आरोपी कमीशन के रूप में मोटी रकम कमाते थे और इस पूरे अवैध कारोबार को एक संगठित नेटवर्क की तरह संचालित कर रहे थे।
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छापेमारी के दौरान आरोपियों के पास से 53 एटीएम कार्ड, 35 चेकबुक, 6 पासबुक, 9 सिम कार्ड, एक लैपटॉप और ₹1.54 लाख नकद बरामद किए गए। बरामद सामग्री यह संकेत देती है कि यह कोई छोटा गिरोह नहीं, बल्कि एक बड़ा साइबर फ्रॉड सिंडिकेट था, जिसमें बड़ी संख्या में बैंक खातों और डिजिटल संसाधनों का इस्तेमाल किया जा रहा था।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी न केवल खुद इन खातों का इस्तेमाल करते थे, बल्कि उन्हें अन्य साइबर अपराधियों को भी उपलब्ध कराते थे। ये अपराधी ऑनलाइन फ्रॉड, फिशिंग और अन्य डिजिटल ठगी के जरिए पैसा कमाते थे और फिर इस रकम को म्यूल खातों के माध्यम से कई चरणों में ट्रांसफर कर देते थे, जिससे असली मास्टरमाइंड तक पहुंचना बेहद मुश्किल हो जाता था।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, म्यूल अकाउंट्स आज के समय में साइबर अपराध की सबसे अहम कड़ी बन चुके हैं। ये खाते अपराधियों को अपनी पहचान छिपाने और पैसों के ट्रेल को जटिल बनाने में मदद करते हैं। कई बार ऐसे खाते जरूरतमंद लोगों से किराये पर लिए जाते हैं या उन्हें लालच देकर उनके बैंकिंग विवरण का दुरुपयोग किया जाता है।
प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “म्यूल अकाउंट नेटवर्क आज के साइबर अपराध का बैकबोन बन चुका है। संगठित गिरोह अब सिर्फ ठगी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे पूरे वित्तीय इकोसिस्टम को प्रभावित करने लगे हैं। जब तक इन खातों की सप्लाई चेन पर सख्ती से रोक नहीं लगेगी, तब तक बड़े साइबर अपराधों पर पूरी तरह अंकुश लगाना मुश्किल रहेगा। इसके अलावा, आम लोगों को भी सतर्क रहना होगा और किसी भी लालच या अनजान ऑफर के तहत अपने बैंक खाते साझा करने से बचना चाहिए।”
मामले में आरोपियों के खिलाफ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम और अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि इस नेटवर्क के तार किन-किन राज्यों या शहरों तक फैले हुए हैं और इसमें और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
अधिकारियों के अनुसार, बरामद बैंक खातों और डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है, ताकि पूरे लेनदेन नेटवर्क का खुलासा किया जा सके। इसके अलावा, उन लोगों की भी पहचान की जा रही है जिन्होंने अपने खाते इस गिरोह को उपलब्ध कराए थे या इनके जरिए लेनदेन किया।
फिलहाल जांच जारी है और उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। यह कार्रवाई न केवल एक बड़े साइबर ठगी नेटवर्क को उजागर करती है, बल्कि ऐसे संगठित अपराधों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का संकेत भी देती है, जिससे भविष्य में इस तरह के रैकेट्स पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके।
