रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में लोन दिलाने के नाम पर बड़े फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है, जहां आरोपियों ने एक व्यक्ति के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर लाखों रुपये का लोन उठा लिया। पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि उसका एक साथी अभी फरार बताया जा रहा है। शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी पहले भी इसी तरह की वारदातों को अंजाम दे चुका है।
मामले के मुताबिक, पीड़ित कृष्णा राव, जो फूड डिलीवरी का काम करता है, उसकी मुलाकात आरोपी होरीलाल पंकज से हुई थी। आरोपी ने खुद को लोन दिलाने वाला एजेंट बताते हुए आसान प्रक्रिया में बैंक से लोन दिलाने का भरोसा दिलाया। भरोसे में आकर पीड़ित ने उससे संपर्क किया और उसके कहने पर अपने सभी जरूरी दस्तावेज सौंप दिए।
लोन दिलाने के नाम पर रची गई साजिश
जानकारी के अनुसार, आरोपी ने पीड़ित को अपने ऑफिस बुलाया, जहां उसकी मुलाकात एक अन्य साथी जितेश चंद्राकर से करवाई गई। दोनों ने मिलकर लोन प्रोसेस के नाम पर पीड़ित से ₹5,000 भी ले लिए। इसके बाद आधार कार्ड, पैन कार्ड, बैंक पासबुक और चेकबुक जैसे महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए।
आरोप है कि इन दस्तावेजों का इस्तेमाल कर अलग-अलग बैंकों से पीड़ित के नाम पर करीब ₹27.5 लाख का लोन लिया गया। इतना ही नहीं, आरोपियों ने इसी पैसे से मोबाइल फोन, एसी और कार तक फाइनेंस करवा लिए, जबकि पीड़ित को इस पूरी प्रक्रिया की भनक तक नहीं लगी।
बैंक नोटिस से हुआ खुलासा
इस पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब पीड़ित के पास बैंकों की ओर से ईएमआई और किस्त जमा करने के नोटिस आने लगे। शुरुआत में पीड़ित को इस बात पर विश्वास नहीं हुआ, लेकिन जब उसने जांच की तो सामने आया कि उसके नाम पर कई लोन चल रहे हैं।
इसके बाद पीड़ित ने स्थानीय थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए मुख्य आरोपी होरीलाल पंकज को गिरफ्तार कर लिया है।
शातिर तरीके से करता था ठगी
जांच में सामने आया है कि आरोपी काफी शातिर तरीके से लोगों को अपने जाल में फंसाता था। वह पहले जरूरतमंद लोगों को आसान लोन का लालच देता था, फिर उनके दस्तावेज हासिल कर उनका दुरुपयोग करता था।
बताया जा रहा है कि आरोपी ने सिर्फ एक ही व्यक्ति के साथ नहीं, बल्कि कई लोगों के साथ इसी तरह की ठगी की है। उसके खिलाफ पहले भी अन्य जिलों में मामले दर्ज हो चुके हैं और वह पहले गिरफ्तार भी हो चुका था। जमानत पर बाहर आने के बाद उसने फिर से इसी तरह की ठगी शुरू कर दी।
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फरार आरोपी की तलाश जारी
मामले में शामिल दूसरा आरोपी जितेश चंद्राकर फिलहाल फरार है। उसकी तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार दबिश दे रही हैं। जांच एजेंसियां यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि इस गिरोह से और कौन-कौन जुड़े हुए हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह एक संगठित नेटवर्क हो सकता है, जिसमें अलग-अलग लोग अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं—कोई दस्तावेज जुटाता है, कोई बैंक प्रक्रिया संभालता है, तो कोई फाइनेंस कराई गई वस्तुओं को बेचने या इस्तेमाल करने का काम करता है।
विशेषज्ञों की चेतावनी: दस्तावेज साझा करना जोखिम भरा
साइबर और वित्तीय अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। किसी भी अनजान व्यक्ति या एजेंट को अपने पहचान संबंधी दस्तावेज देना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि लोन या किसी भी वित्तीय सेवा के लिए केवल अधिकृत बैंक या मान्यता प्राप्त संस्थानों से ही संपर्क करें। साथ ही, दस्तावेज साझा करने से पहले उसकी प्रामाणिकता और उपयोग का उद्देश्य स्पष्ट रूप से समझ लें।
निवेश और लोन के नाम पर बढ़ते खतरे
यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि आज के समय में लोन और निवेश के नाम पर ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आसान प्रक्रिया और जल्दी पैसे मिलने का लालच लोगों को जाल में फंसा देता है।
जागरूकता ही बचाव का सबसे बड़ा तरीका
फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी है और अन्य संभावित पीड़ितों की भी पहचान की जा रही है। साथ ही, फाइनेंस कंपनियों और बैंकों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
रायपुर का यह मामला साफ संकेत देता है कि थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े आर्थिक नुकसान में बदल सकती है। ऐसे में जागरूकता, सतर्कता और सही जानकारी ही इस तरह के फर्जीवाड़ों से बचने का सबसे प्रभावी तरीका है।
