रायपुर में फर्जी लोन दिलाने के नाम पर दस्तावेज लेकर पीड़ित के नाम पर ₹27.5 लाख का कर्ज उठाकर ठगी करने वाले आरोपी गिरफ्तार

₹14 करोड़ का ज्वेलरी फ्रॉड: नकली कारोबारियों ने ‘नई डिजाइन’ का झांसा देकर सर्राफा व्यापारियों को लगाया चूना

Team The420
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पुणे। महाराष्ट्र के Pune में सर्राफा व्यापारियों को निशाना बनाकर किए गए एक बड़े आर्थिक अपराध का खुलासा हुआ है। दो आरोपियों ने खुद को कारोबारी बताकर ज्वेलर्स से सोना-चांदी और नकदी लेकर करीब ₹14 करोड़ की ठगी को अंजाम दिया। मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।

जांच के अनुसार, आरोपियों ने शहर के प्रमुख सर्राफा बाजार Ravivar Peth में कई ज्वेलर्स को अपने जाल में फंसाया। वे खुद को आभूषण निर्माण का काम करने वाला विश्वसनीय कारोबारी बताकर व्यापारियों से कच्चा माल लेते थे और बदले में कुछ दिनों के भीतर बेहतर डिजाइन के नए आभूषण लौटाने का वादा करते थे। लेकिन तय समय बीतने के बाद आरोपी न तो सामान लौटाते थे और न ही संपर्क में आते थे।

‘नई ज्वेलरी’ के नाम पर रचा गया पूरा खेल

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने बेहद सुनियोजित तरीके से विश्वास हासिल किया। शुरुआत में छोटे स्तर पर लेन-देन कर भरोसा बनाया गया, जिसके बाद बड़ी मात्रा में सोना-चांदी और नकदी इकट्ठा की गई। पीड़ित व्यापारियों को भरोसा दिलाया गया कि उनकी धातु से अधिक मूल्यवान और आधुनिक डिजाइन के आभूषण तैयार किए जाएंगे।

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एक शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपियों ने उनसे करीब 60 किलोग्राम चांदी ली और दो-तीन दिनों में तैयार आभूषण लौटाने का वादा किया। लेकिन समय बीतने के बाद आरोपी गायब हो गए। इसी तरह अन्य व्यापारियों से भी लाखों रुपये और कीमती धातु लेकर धोखाधड़ी की गई।

कई पीड़ित सामने आए, बढ़ता गया घोटाले का आंकड़ा

जैसे-जैसे शिकायतें सामने आती गईं, यह स्पष्ट हुआ कि यह कोई एक-दो मामलों तक सीमित नहीं है। कई ज्वेलर्स ने आगे आकर बताया कि उनके साथ भी इसी तरह की ठगी की गई। एक अन्य व्यापारी से लगभग ₹98 लाख और तीसरे से करीब ₹40 लाख की रकम लेने की बात भी सामने आई है।

शुरुआती जांच में जुड़े कुछ अन्य लोगों को भी पहले गिरफ्तार किया गया था, जिनके पास से बड़ी मात्रा में चांदी बरामद की गई। इसके बाद जैसे-जैसे नेटवर्क का खुलासा हुआ, मामला और गंभीर होता गया और कुल ठगी की रकम बढ़कर लगभग ₹14 करोड़ तक पहुंच गई।

आरोपी फरार, फिर दबाव में किया सरेंडर

जांच एजेंसियों के अनुसार, ठगी का मामला सामने आने के बाद आरोपी फरार हो गए थे। उनकी तलाश में कई स्थानों पर छापेमारी की गई। लगातार दबाव बढ़ने के बाद दोनों आरोपियों ने आखिरकार आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की गई।

अदालत ने दोनों आरोपियों को पुलिस रिमांड पर भेज दिया है, ताकि इस पूरे गिरोह और उनके संपर्कों की गहराई से जांच की जा सके। अधिकारियों का मानना है कि इस मामले में और भी लोग शामिल हो सकते हैं।

संगठित नेटवर्क की आशंका

प्रारंभिक जांच से संकेत मिल रहे हैं कि यह कोई साधारण धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। जिस तरीके से अलग-अलग व्यापारियों को निशाना बनाया गया और बड़ी मात्रा में कीमती धातु एकत्र की गई, उससे यह संभावना मजबूत होती है कि आरोपियों के पीछे एक बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है।

जांच एजेंसियां अब यह भी पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि ठगी की गई संपत्ति को कहां और कैसे खपाया गया। इसके लिए वित्तीय लेन-देन और डिजिटल ट्रेल की भी जांच की जा रही है।

व्यापारियों के लिए चेतावनी

यह मामला सर्राफा कारोबारियों के लिए एक बड़ी चेतावनी के रूप में सामने आया है। विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े लेन-देन में बिना पर्याप्त सत्यापन के किसी भी नए कारोबारी पर भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है।

जांच जारी, और खुलासे संभव

अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और भी खुलासे हो सकते हैं। यह भी संभावना है कि ठगी की कुल राशि और बढ़ सकती है, क्योंकि अभी कई संभावित पीड़ित सामने आना बाकी हैं।

यह पूरा मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि पारंपरिक व्यापार क्षेत्रों में भी ठगी के तरीके तेजी से बदल रहे हैं और अपराधी विश्वास और लालच का फायदा उठाकर बड़े आर्थिक अपराध को अंजाम दे रहे हैं

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