नए गेमिंग रेगुलेशन के तहत छह मंत्रालयों की निगरानी में बनेगी अथॉरिटी, यूजर सुरक्षा और जवाबदेही पर होगा जोर

“ऑनलाइन गेमिंग पर बड़ा सरकारी एक्शन: 1 मई से नए नियम लागू, मनी गेम्स और विदेशी प्लेटफॉर्म्स पर कड़ी निगरानी”

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By Roopa
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नई दिल्ली। देश में तेजी से बढ़ते ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर को अब सरकार की सख्त निगरानी में लाया जा रहा है। लगातार सामने आ रही शिकायतों—जैसे फर्जी ऐप्स, पैसे फंसना, नाबालिगों में लत और विदेश से संचालित अनियमित प्लेटफॉर्म्स—के बाद सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। ऑनलाइन गेमिंग प्रमोशन से जुड़े नए नियम नोटिफाई कर दिए गए हैं, जो 1 मई से लागू होंगे।

इन नियमों के तहत एक नई रेगुलेटरी अथॉरिटी का गठन किया गया है, जिसमें छह मंत्रालयों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह संस्था पूरे गेमिंग सेक्टर पर निगरानी रखने, नियम लागू करवाने और यूजर्स की शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करने का काम करेगी। माना जा रहा है कि इसमें सूचना प्रौद्योगिकी, वित्त, गृह, खेल, उपभोक्ता मामले और विधि मंत्रालय की भूमिका अहम होगी।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि सभी गेमिंग कंपनियों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य नहीं होगा। केवल वे प्लेटफॉर्म जो सामान्य मनोरंजन गेम्स प्रदान करते हैं, उन्हें राहत दी गई है। लेकिन जहां पैसे का लेन-देन, दांव या जोखिम शामिल है, वहां सख्त रजिस्ट्रेशन और अनुपालन अनिवार्य होगा।

इस नए ढांचे का सबसे बड़ा असर उन प्लेटफॉर्म्स पर पड़ेगा जो मनी गेम्स या रियल कैश आधारित गेमिंग मॉडल पर काम करते हैं। ऐसे ऐप्स और वेबसाइट्स को अब तय नियमों का पालन करना होगा। साथ ही, जोखिम आधारित गेम्स और ई-स्पोर्ट्स प्लेटफॉर्म्स को भी रेगुलेटरी दायरे में लाया जाएगा।

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सरकार ने यह भी सुनिश्चित किया है कि विदेशों से संचालित होने वाले गेमिंग प्लेटफॉर्म्स अब नजरअंदाज नहीं किए जाएंगे। यदि कोई कंपनी भारत में यूजर्स को टारगेट कर रही है, भले ही उसका संचालन विदेश से हो रहा हो, तो उसे भारतीय नियमों का पालन करना होगा। इससे पहले ऐसे कई प्लेटफॉर्म्स पर नियंत्रण को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

नए नियमों के तहत सभी कंपनियों को एक मजबूत शिकायत निवारण प्रणाली (ग्रिवांस रिड्रेसल मैकेनिज्म) बनाना होगा। इसका उद्देश्य यह है कि यदि किसी यूजर का पैसा फंस जाता है, अकाउंट ब्लॉक हो जाता है या किसी तरह की तकनीकी या वित्तीय समस्या आती है, तो उसका समय पर समाधान सुनिश्चित किया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से गेमिंग सेक्टर में पारदर्शिता और भरोसा बढ़ेगा। बड़े और संगठित प्लेटफॉर्म्स को जहां लाभ मिलेगा, वहीं बिना नियमों के काम कर रहे छोटे और अनियमित ऑपरेटरों पर दबाव बढ़ेगा। यूजर्स के लिए भी यह व्यवस्था अधिक सुरक्षित साबित हो सकती है।

पिछले कुछ वर्षों में ऑनलाइन गेमिंग सेक्टर में तेज वृद्धि देखने को मिली है, लेकिन इसके साथ ही फर्जी निवेश योजनाएं, गेमिंग धोखाधड़ी और डेटा दुरुपयोग के मामले भी बढ़े हैं। कई मामलों में उपयोगकर्ताओं को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ा है, जिससे इस क्षेत्र के लिए नियमन की मांग तेज हो गई थी।

कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम ऑनलाइन गेमिंग उद्योग को एक संगठित और जवाबदेह ढांचे में लाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 1 मई से लागू होने वाले इन नियमों के बाद यह सेक्टर अब अधिक नियंत्रित, सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था के तहत काम करेगा।

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