‘ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0’ में फर्जी बैंक खातों के जरिए बड़े साइबर ठगी नेटवर्क का खुलासा, 1,000 से अधिक शिकायतों से जुड़े अपराध के तार उजागर

“₹622 करोड़ के साइबर मनी म्यूल नेटवर्क का भंडाफोड़: गुजरात में 40 गिरफ्तार, देशभर में फैला डिजिटल ठगी का जाल”

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By Roopa
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गांधीनगर। देश में तेजी से बढ़ते साइबर अपराधों के बीच गुजरात में एक बड़ा खुलासा सामने आया है, जिसने देश के डिजिटल वित्तीय सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। “ऑपरेशन म्यूल हंट 2.0” के तहत जांच एजेंसियों ने ऐसे संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है, जो फर्जी और किराए के बैंक खातों के जरिए करीब ₹622 करोड़ के साइबर ठगी को अंजाम दे रहा था। इस मामले में अब तक 40 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है।

जांच में सामने आया है कि पूरा नेटवर्क “मनी म्यूल खातों” पर आधारित था। ये ऐसे बैंक खाते होते हैं जिन्हें आरोपी खुद खोलते थे या फिर दूसरों के नाम पर कमीशन देकर खुलवाते थे। इन खातों का इस्तेमाल ठगी की रकम को लेन-देन करने के लिए किया जाता था। पैसा पहले इन खातों में आता, फिर उसे नकद में निकाला जाता और आगे हवाला नेटवर्क के जरिए अलग-अलग जगहों पर पहुंचाया जाता था। इस पूरे तंत्र में कई स्तरों पर कमीशन का खेल चलता था।

अधिकारियों के अनुसार इस अभियान में 1,039 साइबर ठगी शिकायतों की जांच की गई, जिससे एक बड़े संगठित अपराध नेटवर्क का खुलासा हुआ। इसके अलावा करीब ₹288 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेन-देन भी इसी नेटवर्क से जुड़े पाए गए।

सूरत, भावनगर, राजकोट और ऊंझा में की गई छापेमारी में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। जांच में पाया गया कि फर्जी कंपनियों और नकली दस्तावेजों का इस्तेमाल कर बैंक खाते खोले गए थे, जिन्हें बाद में साइबर ठगी के लिए इस्तेमाल किया गया।

भावनगर से गिरफ्तार मुकेश मेर और फारिदखान पठान के पास से मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद हुए। डिजिटल जांच में 125 फर्जी फर्मों, 65 व्यक्तियों के दस्तावेज और 868 नकली बिल मिलने से पूरे नेटवर्क की गहराई सामने आई।

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ऊंझा में सामने आया कि आरोपियों के बैंक खातों से जुड़े लेन-देन ₹114 करोड़ से अधिक के साइबर ठगी से जुड़े थे। यहां से अक्षय पटेल और देवेंद्र पटेल को गिरफ्तार किया गया। जांच में पता चला कि अक्षय कई खातों का संचालन करता था और ठगी की रकम आगे भेजता था, जबकि देवेंद्र कमीशन लेकर बैंक खाते खुलवाने का काम करता था।

राजकोट से गिरफ्तार चेतन आमलानी, जितेन कक्कड़, कपिल कोटक और महेंद्र कोक्हिया के नेटवर्क से लगभग ₹59.79 लाख की ठगी के मामले जुड़े पाए गए। इनके पास से नकदी और कई मोबाइल फोन भी बरामद किए गए।

साइबर अपराध विशेषज्ञों का कहना है कि मनी म्यूल नेटवर्क अब डिजिटल अर्थव्यवस्था के लिए सबसे बड़ा खतरा बन चुका है। “प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व भारतीय पुलिस सेवा अधिकारी प्रोफेसर त्रिवेणी सिंह” के अनुसार, “ऐसे मामलों में आम लोग लालच में आकर अपने बैंक खाते दे देते हैं, लेकिन बाद में वे गंभीर कानूनी जिम्मेदारी में फंस जाते हैं। साइबर अपराधी इसी कमजोरी का फायदा उठाकर पूरे वित्तीय सिस्टम को प्रभावित करते हैं।”

अधिकारियों ने जनता को सख्त चेतावनी दी है कि किसी भी स्थिति में अपने बैंक खाते, एटीएम कार्ड या बैंकिंग जानकारी किसी के साथ साझा न करें। केवल कमीशन के लालच में लिया गया एक छोटा सा कदम भी भविष्य में गंभीर कानूनी परिणाम दे सकता है।

यह मामला देश में बढ़ते डिजिटल ठगी के खतरे की गंभीर तस्वीर पेश करता है और यह भी दिखाता है कि कैसे तकनीक का गलत इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी को अंजाम दिया जा रहा है।

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