बिहार की राजधानी पटना में साइबर ठगों ने पुलिस अधिकारी बनकर एक 15 वर्षीय किशोर को कथित रूप से गिरफ्तारी की धमकी दी और उसकी मां के UPI खाते से करीब ₹16.13 लाख अपने खातों में ट्रांसफर करा लिए। शिकायत के अनुसार, ठगों ने किशोर को यह विश्वास दिलाया कि वह एक साइबर अपराध में शामिल हो चुका है और गिरफ्तारी से बचने के लिए पैसे भेजने होंगे। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
शिकायत के अनुसार, पीड़ित किशोर फुलवारीशरीफ का निवासी है और वह अक्सर अपनी मां के मोबाइल फोन पर ऑनलाइन गेम खेलता था तथा रील्स देखता था। इसी दौरान साइबर ठगों ने उससे संपर्क किया और कथित रूप से उसे अपने जाल में फंसा लिया।
आरोप है कि कॉल करने वालों ने स्वयं को पुलिस अधिकारी बताया और किशोर का नाम, उम्र तथा परिवार से जुड़ी जानकारी हासिल करने के बाद उसे बताया कि वह एक साइबर अपराध में शामिल है। ठगों ने यह भी दावा किया कि उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस उसके घर पहुंचने वाली है।
गिरफ्तारी की धमकी से घबराए किशोर को कथित तौर पर कहा गया कि यदि वह ऑनलाइन पैसे भेज देगा तो मामला समाप्त कर दिया जाएगा। साथ ही उसे सख्त हिदायत दी गई कि वह इस बारे में अपने परिवार के किसी सदस्य को कुछ न बताए।
शिकायत के अनुसार, किशोर ने शुरुआत में अपनी मां के UPI खाते से ₹2,500 ट्रांसफर किए। इसके बाद ठग लगातार अधिक रकम की मांग करते रहे। डर के कारण वह अपनी मां के खाते से अलग-अलग किस्तों में आरोपियों द्वारा बताए गए खातों में पैसे भेजता रहा।
बताया गया है कि यह कथित ठगी करीब तीन महीने तक चलती रही। इस दौरान जब भी किशोर की मां अज्ञात नंबरों से आने वाली कॉल उठाती थीं, कॉल करने वाले तुरंत फोन काट देते थे। लगातार मानसिक दबाव और बढ़ती मांगों के बीच आखिरकार किशोर ने पूरी घटना अपनी मां को बता दी।
जब उसकी मां ने बैंक जाकर खाते की जांच कराई तो पता चला कि खाते से ₹16.13 लाख निकल चुके थे। इसके बाद उन्होंने साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई।
Algoritha Security के एक शोधकर्ता ने कहा कि साइबर अपराधी अब बच्चों और किशोरों को भी सोशल इंजीनियरिंग के जरिए निशाना बना रहे हैं। पुलिस या सरकारी अधिकारी बनकर डर पैदा करना और गोपनीयता बनाए रखने का दबाव बनाना ऐसे मामलों में आम तरीका है। उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी कि वे बैंक ट्रांजैक्शन अलर्ट सक्रिय रखें, UPI खातों की सुरक्षा मजबूत करें, बच्चों को साइबर धोखाधड़ी के प्रति जागरूक बनाएं और किसी भी धमकी भरे कॉल या संदेश की जानकारी तुरंत परिवार और पुलिस को दें।
पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है। डिजिटल साक्ष्यों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य उपलब्ध तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
