रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID के सामने पूछताछ के दौरान कई अहम दावे सामने आए हैं। उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता और JPSC-14वीं की प्रारंभिक परीक्षा (PT) पास करने वाले अभ्यर्थी सुमन सौरभ के बयानों में परीक्षा प्रक्रिया, OMR शीट में कथित हेराफेरी, रिजल्ट तैयार करने के दबाव और पैसे के बदले परीक्षा पास कराने के आरोपों से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। श्वेता गुप्ता ने कथित तौर पर जांच एजेंसी को बताया कि OMR और लिखित परीक्षा से जुड़ी गड़बड़ियों में आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष ख्यांगते की भी भूमिका थी।
पूछताछ में श्वेता गुप्ता ने परीक्षा प्रक्रिया को लेकर अपनी जिम्मेदारियों के बारे में भी जानकारी दी। उनके अनुसार, उन्हें JPSC की 11वीं से 13वीं परीक्षाओं के इंटरव्यू की जिम्मेदारी दी गई थी, जबकि PT और मुख्य परीक्षा (Mains) से जुड़े कार्य असीम किसपोट्टा के जिम्मे थे। बाद में उन्हें परीक्षा नियंत्रक की जिम्मेदारी दी गई। रिजल्ट जारी होने से पहले दस्तावेज सत्यापन के लिए उपसचिव सरोजिनी तिर्की की अगुवाई में टीम गठित की गई थी।
रिजल्ट जारी करने को लेकर दबाव का दावा
श्वेता गुप्ता ने CID को दिए कथित बयान में कहा कि वह PT और Mains की प्रक्रिया में शामिल नहीं थीं, इसलिए रिजल्ट प्रकाशित करने को लेकर वह इच्छुक नहीं थीं। हालांकि, तत्कालीन अध्यक्ष के निर्देश पर परिणाम तैयार किया गया। इसके बाद स्क्रूटनी के लिए रिजल्ट आयोग के तीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, अनिमा हंसदा और डॉ. जमाल अहमद के पास भेजे जाने की बात सामने आई है।
जांच के दौरान OMR शीट और लिखित परीक्षा की प्रक्रिया में निजी कंपनी TDPL से जुड़े कर्मचारियों की भूमिका का भी उल्लेख हुआ। श्वेता के कथित बयान के अनुसार, OMR शीट में बदलाव और लिखित परीक्षा से जुड़े कार्य TDPL के कर्मचारियों मो. उस्मान, मो. इबाद, संजय कुमार और हेमंत कुमार के माध्यम से कराए जाते थे। कंपनी के निदेशक रामवीर और सतपाल के नाम का भी पूछताछ में उल्लेख हुआ है।
प्रश्नपत्र लीक की सूचना अध्यक्ष तक पहुंचाने का दावा
पूछताछ में श्वेता गुप्ता ने कथित तौर पर बताया कि जब उन्हें रामवीर सिंह की ओर से प्रश्नपत्र लीक करने के दबाव की जानकारी मिली, तो उन्होंने तत्काल इसकी सूचना तत्कालीन अध्यक्ष को दी थी। TDPL के इम्पैनलमेंट को लेकर भी उन्होंने कहा कि यह फैसला अध्यक्ष के आदेश पर किया गया था। CCTV निगरानी को लेकर दावा किया गया कि इसकी मॉनिटरिंग अध्यक्ष स्वयं करते थे।
CID की पूछताछ में यह भी सामने आया कि पैसे देकर परीक्षा पास करने वाले 11 छात्रों के अलावा 13 अन्य अभ्यर्थियों ने JPSC-14वीं की PT पास कराने के उद्देश्य से बुद्धेश्वर भगत के पास अपने शैक्षणिक प्रमाणपत्र जमा कराए थे। इनमें अंजनी कुमार, शिवम कुमार, आबिद और शंभू पंडित समेत अन्य नामों का उल्लेख किया गया है। जांच एजेंसी इन दावों और संबंधित लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही है।
16 लाख रुपये देने का अभ्यर्थी का दावा
JPSC-14वीं की PT पास करने वाले सुमन सौरभ ने CID पूछताछ में परीक्षा पास कराने के लिए रकम मांगे जाने का दावा किया है। उनके अनुसार, तैयारी के दौरान दोस्त दिवाकर कुमार के मामा प्रकाश कुमार ने उनकी मुलाकात पवन कुमार से कराई थी। पवन ने कथित तौर पर परीक्षा में सफलता की गारंटी देते हुए कुल 80 लाख रुपये मांगे थे।
दावे के मुताबिक, PT पास कराने के लिए 20 लाख और Mains पास कराने के लिए 40 लाख रुपये देने की बात कही गई थी। सुमन सौरभ ने कथित तौर पर 16 लाख रुपये देने की बात स्वीकार की है। CID अब इस लेनदेन और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
23वें दिन भी जारी रहा छात्रों का आंदोलन
JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का आंदोलन रविवार को 23वें दिन भी जारी रहा। रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ नारेबाजी की और मुख्यमंत्री का पुतला फूंका।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा। छात्रों की मांगों और CID जांच के बीच अब परीक्षा प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों से जुड़े बयानों और दस्तावेजों की जांच महत्वपूर्ण हो गई है। हालांकि, पूछताछ में सामने आए आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
