पटना। बिहार की राजधानी पटना से सामने आए एक चौंकाने वाले धोखाधड़ी मामले ने पारिवारिक विश्वास और बैंकिंग सुरक्षा दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक 87 वर्षीय बुजुर्ग ने आरोप लगाया है कि उनकी ही तीन पोतियों ने सुनियोजित तरीके से उनके बैंक खाते से करीब ₹35 लाख की रकम निकाल ली। यह मामला केवल वित्तीय धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें परिवार के भीतर साजिश और संभावित मिलीभगत के संकेत भी सामने आए हैं।
पीड़ित बुजुर्ग बिक्रमा लाल, जो पत्रकार नगर थाना क्षेत्र के हनुमान नगर इलाके में रहते हैं, ने इस पूरे मामले को लेकर शिकायत दर्ज कराई है। उनके अनुसार, उनकी पोतियों—स्तुति लाल, आस्था लाल और ईशानी लाल—ने उनके बैंक खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर बिना जानकारी के बदलवा दिया। इस बदलाव के बाद उन्हें बैंकिंग लेन-देन से जुड़ी कोई सूचना या अलर्ट प्राप्त नहीं हुआ।
शिकायत के मुताबिक, मोबाइल नंबर बदलने के बाद आरोपियों ने चेक के माध्यम से चरणबद्ध तरीके से पैसे निकालने शुरू किए। यह निकासी 28 मार्च से शुरू हुई और जब तक बुजुर्ग को इसकी जानकारी मिलती, तब तक ₹35 लाख की पूरी राशि खाते से निकल चुकी थी। इस पूरी प्रक्रिया से यह संकेत मिलता है कि धोखाधड़ी को अंजाम देने के लिए पहले से योजना बनाई गई थी।
बिक्रमा लाल ने यह भी आरोप लगाया है कि इस पूरे मामले में उनकी बहू की भी भूमिका हो सकती है। उनका कहना है कि पोतियों ने अकेले यह काम नहीं किया और परिवार के भीतर से सहयोग मिलने की संभावना है। उन्होंने यह भी दावा किया है कि उन पर दबाव बनाकर उनकी संपत्ति भी अपने नाम कराई गई, जिससे मामला और गंभीर हो गया है।
मामले का एक अहम पहलू तब सामने आया जब बुजुर्ग ने कुछ बैंक कर्मचारियों की संभावित संलिप्तता की आशंका जताई। उनके अनुसार, मोबाइल नंबर बदलने जैसी संवेदनशील प्रक्रिया बिना उचित सत्यापन के पूरी कर ली गई, जो बैंकिंग नियमों पर गंभीर सवाल खड़े करती है। हालांकि इस संबंध में अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन जांच में इस पहलू को भी गंभीरता से परखा जा रहा है।
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शिकायत दर्ज कराने के बाद पीड़ित ने साइबर थाने का रुख किया, जिसके बाद उनका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया। हालांकि तब तक काफी देर हो चुकी थी और बड़ी रकम निकाली जा चुकी थी। यह स्थिति बताती है कि कई मामलों में धोखाधड़ी का पता लगने तक नुकसान काफी बड़ा हो जाता है।
प्रारंभिक जांच में यह मामला केवल पारिवारिक विवाद नहीं, बल्कि वित्तीय धोखाधड़ी और संभावित आपराधिक साजिश के रूप में सामने आ रहा है। जांच एजेंसियां बैंक रिकॉर्ड, मोबाइल नंबर परिवर्तन से जुड़े दस्तावेज और चेक ट्रांजैक्शन की गहन जांच कर रही हैं, ताकि पूरे घटनाक्रम की सटीक तस्वीर सामने आ सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना डिजिटल और पारंपरिक बैंकिंग सुरक्षा दोनों में मौजूद कमजोरियों को उजागर करती है। एक ओर जहां मोबाइल नंबर अपडेट जैसी प्रक्रियाओं का दुरुपयोग हुआ, वहीं दूसरी ओर परिवार के भीतर विश्वास का गलत फायदा उठाया गया। बुजुर्ग विशेष रूप से ऐसे मामलों में संवेदनशील होते हैं, क्योंकि वे अक्सर बैंकिंग कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं।
साइबर और बैंकिंग विशेषज्ञों का कहना है कि खाताधारकों को अपने बैंक खाते से जुड़े मोबाइल नंबर, ईमेल और अन्य विवरणों की नियमित निगरानी करनी चाहिए। किसी भी अनधिकृत बदलाव की तुरंत जांच करानी जरूरी है। साथ ही, बैंकिंग प्रक्रियाओं में मल्टी-लेयर वेरिफिकेशन को सख्ती से लागू करना समय की मांग है।
यह मामला एक गंभीर चेतावनी के रूप में सामने आया है कि धोखाधड़ी अब केवल बाहरी अपराधियों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई बार यह भरोसे के सबसे करीब दायरे में भी पनप सकती है। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, यह स्पष्ट होगा कि इस पूरे मामले में कितने लोग शामिल थे और साजिश का दायरा कितना व्यापक था।
