बिहार की राजधानी पटना में पुलिस ने एक कथित साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए किराये के फ्लैट से संचालित एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने इस मामले में एक कॉलेज छात्र, उसकी प्रेमिका और उसके एक सहयोगी को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि गिरोह प्रधानमंत्री मुद्रा लोन और अन्य सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को झांसा देकर विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी कर रहा था। पुलिस ने मौके से ₹6,08,650 नकद, 14 मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, एक टैबलेट, 15 एटीएम कार्ड, पांच चेकबुक, चार पासबुक, सात सिम कार्ड और अन्य डिजिटल सामग्री बरामद की है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
पुलिस के अनुसार, पत्रकार नगर थाना क्षेत्र के जोगीपुर स्थित एक किराये के फ्लैट में फर्जी कॉल सेंटर संचालित होने की सूचना पर संयुक्त टीम ने छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान नवादा निवासी 22 वर्षीय अक्षय कुमार, गया निवासी 22 वर्षीय शिवम कुमार और पटना निवासी 20 वर्षीय रिमझिम कुमारी को गिरफ्तार किया गया।
प्रारंभिक जांच में आरोप है कि अक्षय कुमार इस गिरोह का कथित मास्टरमाइंड था। पुलिस के अनुसार, वह पहले से साइबर ठगी में सक्रिय था और अपने अवैध नेटवर्क का विस्तार करने के लिए उसने अपनी कॉलेज की सहपाठी एवं प्रेमिका रिमझिम कुमारी को कॉलिंग एजेंट के रूप में तैयार किया। बाद में अपने मित्र शिवम कुमार को भी कथित तौर पर इस नेटवर्क से जोड़ लिया गया।
जांच के अनुसार, आरोपी फेसबुक, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रधानमंत्री मुद्रा लोन तथा कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराने के फर्जी विज्ञापन पोस्ट करते थे। इन विज्ञापनों के माध्यम से इच्छुक लोगों का संपर्क विवरण एकत्र किया जाता था।
पुलिस का आरोप है कि इसके बाद रिमझिम कुमारी फोन कर स्वयं को लोन प्रक्रिया से जुड़ा प्रतिनिधि बताती थी और पीड़ितों को विश्वास में लेती थी। जब कोई व्यक्ति ऋण लेने के लिए तैयार हो जाता, तो उसे कथित तौर पर फर्जी लोन स्वीकृति पत्र भेजा जाता। इसके बाद जीएसटी, प्रोसेसिंग फीस, अप्रूवल चार्ज और अन्य शुल्क के नाम पर ₹500 से ₹2,000 तक की राशि क्यूआर कोड या यूपीआई के माध्यम से जमा कराई जाती थी। भुगतान मिलते ही पीड़ित का संपर्क बंद कर दिया जाता था।
पुलिस का कहना है कि प्रारंभिक जांच में इस नेटवर्क के बिहार के अलावा झारखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में सक्रिय होने के संकेत मिले हैं। विभिन्न राज्यों में दर्ज मामलों का भी मिलान किया जा रहा है ताकि ठगी के पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि ठगी में इस्तेमाल किए जाने वाले सिम कार्ड कथित रूप से बिना वैध दस्तावेजों के एक स्थानीय दुकान से खरीदे जाते थे। पुलिस ने संबंधित दुकान संचालक की भूमिका की भी जांच शुरू कर दी है और उसकी तलाश में छापेमारी की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, गिरोह से जुड़े दो अन्य संदिग्ध फिलहाल फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।
Algoritha Security के एक शोधकर्ता ने कहा कि साइबर अपराधी सरकारी योजनाओं और आसान ऋण के नाम पर सोशल इंजीनियरिंग का सहारा लेकर लोगों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने सलाह दी कि किसी भी सरकारी योजना या ऋण संबंधी प्रस्ताव की आधिकारिक पोर्टल से पुष्टि किए बिना कोई शुल्क जमा न करें। किसी भी लोन के नाम पर अग्रिम प्रोसेसिंग फीस, जीएसटी या अप्रूवल चार्ज मांगे जाने पर विशेष सतर्कता बरतनी चाहिए और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत साइबर पुलिस को देनी चाहिए।
पुलिस ने बताया कि जब्त डिजिटल उपकरणों, बैंक खातों, मोबाइल डेटा, सोशल मीडिया गतिविधियों और वित्तीय लेनदेन का फॉरेंसिक विश्लेषण किया जा रहा है। जांच के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी और फरार आरोपियों की तलाश जारी है।
