“PepsiCo केस में बिक्री आंकड़े न देने पर कोर्ट की कड़ी टिप्पणी—‘न्यायिक आदेशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं’”

“‘For The Bold’ विवाद में Parle Agro पर ₹10 लाख का जुर्माना: Delhi High Court सख्त”

Roopa
By Roopa
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नई दिल्ली। ट्रेडमार्क विवाद से जुड़े एक अहम मामले में Delhi High Court ने Parle Agro पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया है। अदालत ने यह कार्रवाई कंपनी द्वारा अदालत के पूर्व आदेशों का पालन न करने, खासकर बिक्री से जुड़े आंकड़े नियमित रूप से प्रस्तुत न करने को लेकर की है। यह मामला PepsiCo और Parle Agro के बीच ‘For The Bold’ टैगलाइन को लेकर चल रहे विवाद से जुड़ा है।

मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति Tushar Rao Gedela की पीठ ने स्पष्ट कहा कि अदालत के आदेशों की पवित्रता और अनुपालन सुनिश्चित करना हर पक्ष की जिम्मेदारी है। कोर्ट ने माना कि भले ही बिक्री आंकड़े प्रस्तुत न करना जानबूझकर किया गया कृत्य नहीं था, लेकिन यह अदालत के निर्देशों का “स्पष्ट, गंभीर और असंदिग्ध उल्लंघन” है।

दरअसल, PepsiCo ने वर्ष 2021 में अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए आरोप लगाया था कि Parle Agro अपने ‘B Fizz’ पेय उत्पाद के लिए ‘For The Bold’ टैगलाइन का इस्तेमाल कर रही है, जो उसके अधिकारों का उल्लंघन है। इस पर सुनवाई के दौरान अदालत ने Parle Agro को टैगलाइन इस्तेमाल करने से पूरी तरह नहीं रोका, लेकिन कुछ शर्तें जरूर लगाई थीं।

इन शर्तों में यह स्पष्ट किया गया था कि कंपनी इस टैगलाइन को अपने विज्ञापन अभियानों में प्रमुख रूप से इस्तेमाल नहीं करेगी, कुछ सोशल मीडिया पोस्ट हटाएगी और सबसे महत्वपूर्ण—हर दो महीने में ‘B Fizz’ की प्रमाणित बिक्री रिपोर्ट अदालत में दाखिल करेगी।

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बाद में PepsiCo ने एक आवेदन दायर कर आरोप लगाया कि Parle Agro न केवल सोशल मीडिया पर टैगलाइन का उपयोग जारी रखे हुए है, बल्कि बिक्री आंकड़े भी नियमित रूप से प्रस्तुत नहीं कर रही है। इस पर अदालत ने दोनों पहलुओं की अलग-अलग समीक्षा की।

सोशल मीडिया पोस्ट के मामले में अदालत ने पाया कि दो पोस्ट पुराने थे और अनजाने में हटाए नहीं गए। इस पर कंपनी की दलील को स्वीकार करते हुए अदालत ने इसे जानबूझकर की गई अवमानना नहीं माना और इस पहलू पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की।

हालांकि, बिक्री आंकड़े न देने के मुद्दे पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट ने पाया कि Parle Agro ने लगभग ढाई साल तक हर दो महीने में बिक्री का प्रमाणित विवरण देने के आदेश का पालन नहीं किया। कंपनी ने यह तर्क दिया कि ऐसे आंकड़े ट्रायल के दौरान ही जरूरी होंगे, लेकिन अदालत ने इस दलील को सिरे से खारिज कर दिया।

पीठ ने स्पष्ट कहा कि किसी भी पक्ष को यह तय करने का अधिकार नहीं है कि अदालत का कौन सा आदेश महत्वपूर्ण है और कौन सा नहीं। आदेश का पालन समय पर और पूरी तरह से किया जाना अनिवार्य है। अदालत ने यह भी कहा कि कंपनी यह नहीं कह सकती कि उसे आदेश की जानकारी नहीं थी।

इसी आधार पर अदालत ने Parle Agro पर ₹10 लाख का जुर्माना लगाया और निर्देश दिया कि यह राशि ‘भारत के वीर’ फंड में तीन सप्ताह के भीतर जमा कराई जाए। साथ ही, कंपनी के शपथपत्र दाखिल करने वाले अधिकारी को चार सप्ताह के भीतर बिना शर्त माफी मांगने का निर्देश भी दिया गया है।

इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को निर्धारित की गई है, जहां आगे की कार्रवाई पर फैसला होगा। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह आदेश कॉर्पोरेट जगत के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि न्यायिक निर्देशों की अनदेखी किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।

ट्रेडमार्क विवाद के इस मामले ने यह भी दिखाया है कि अदालतें अब केवल बौद्धिक संपदा अधिकारों की रक्षा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि आदेशों के पालन को लेकर भी सख्त रुख अपना रही हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि इस मामले में अंतिम फैसला क्या आता है और इसका कॉर्पोरेट आचरण पर क्या व्यापक प्रभाव पड़ता है।

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