पंचकूला: विदेश भेजने के नाम पर ठगी के मामलों में तेजी के बीच हरियाणा के पंचकूला से एक बड़ा खुलासा हुआ है, जहां ‘वर्क वीजा’ का झांसा देकर ₹35 लाख की ठगी करने वाले संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। इस मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों की तलाश जारी है। जांच में सामने आया है कि पीड़ित के बेटे को वैध वीजा के बजाय अवैध “डंकी रूट” के जरिए विदेश भेजा गया, जहां उसे हिरासत में लिया गया और बाद में डिपोर्ट कर दिया गया।
शिकायत के अनुसार, गढ़ी कोटाहा गांव निवासी कृष्ण लाल को आरोपियों ने भरोसा दिलाया था कि उनके बेटे को अमेरिका में वैध तरीके से वर्क वीजा पर भेजा जाएगा। खुद को विश्वसनीय साबित करने के लिए आरोपियों ने व्यक्तिगत संपर्कों और फर्जी आश्वासनों का सहारा लिया। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित, कानूनी और तेज बताते हुए पीड़ित को विश्वास में लिया।
जांच में खुलासा हुआ है कि आरोपियों ने बैंकिंग ट्रांजैक्शन से बचने के लिए पूरी रकम नकद में लेने पर जोर दिया। पीड़ित पर यह कहकर दबाव बनाया गया कि यदि समय पर भुगतान नहीं किया गया तो अवसर हाथ से निकल जाएगा। बेटे के बेहतर भविष्य की उम्मीद में कृष्ण लाल ने अपनी जमीन तक बेच दी और किश्तों में कुल ₹35 लाख आरोपियों को सौंप दिए।
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मामले ने तब गंभीर मोड़ लिया जब दिसंबर 2023 में आरोपियों ने दावा किया कि युवक को वर्क वीजा मिल गया है और उसे दिल्ली एयरपोर्ट से अमेरिका भेज दिया गया है। हालांकि बाद में सच्चाई सामने आई कि युवक को वैध वीजा के बजाय अवैध “डंकी रूट” से विदेश भेजा गया था। वहां पहुंचते ही उसे स्थानीय अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया और बाद में उसे भारत वापस भेज दिया गया।
जांच एजेंसियों ने जब मामले की तह तक जाना शुरू किया, तो तीसरे आरोपी की भूमिका भी उजागर हुई, जिसके बाद उसे भी गिरफ्तार कर लिया गया। शुरुआती पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं, जो इस ओर इशारा करते हैं कि यह गिरोह बड़े स्तर पर सक्रिय था और लंबे समय से लोगों को विदेश भेजने के नाम पर ठगी कर रहा था।
आरोपियों के कब्जे से मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल साक्ष्य बरामद किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक जांच की जा रही है। इन डिवाइस से और भी पीड़ितों और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद है। अब तक इस मामले में करीब ₹14 लाख की रकम बरामद की जा चुकी है, जबकि बाकी रकम की तलाश जारी है।
सूत्रों के अनुसार, यह गिरोह खासतौर पर उन परिवारों को निशाना बनाता था जो अपने बच्चों को विदेश भेजकर बेहतर भविष्य की तलाश में थे। उन्हें जल्दी वीजा और पक्की नौकरी का लालच देकर फंसाया जाता था और फिर भारी रकम वसूल की जाती थी। कई मामलों में पीड़ितों को अवैध रास्तों से भेजा जाता था, जिससे उन्हें विदेश में कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।
प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने ऐसे मामलों को लेकर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा, “इस तरह के फ्रॉड में आरोपी सोशल इंजीनियरिंग का इस्तेमाल करते हैं। पहले भरोसा जीतते हैं, फिर वैध प्रक्रिया का भ्रम पैदा कर पीड़ितों को जल्दबाजी में फैसला लेने के लिए मजबूर करते हैं। नकद लेनदेन और दस्तावेजों की कमी के कारण ऐसे मामलों को ट्रैक करना बेहद कठिन हो जाता है।”
विशेषज्ञों का कहना है कि इमिग्रेशन फ्रॉड के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, खासकर “डंकी रूट” जैसे अवैध तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। ऐसे मामलों में लोग अपनी जीवनभर की बचत गंवा देते हैं और कई बार अंतरराष्ट्रीय कानूनी जटिलताओं में फंस जाते हैं।
फिलहाल, गिरफ्तार आरोपियों को अदालत में पेश कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी हैं और संभावना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं
