प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PACL घोटाले में एक बड़ी कानूनी और वित्तीय सफलता दर्ज की है, जिसमें विशेष PMLA अदालत ने 282 अचल संपत्तियों को न्यायमूर्ति आर.एम. लोढ़ा समिति को हस्तांतरित करने का आदेश दिया है। इन संपत्तियों का वर्तमान बाजार मूल्य लगभग ₹9,420.57 करोड़ आंका गया है। इस निर्णय को देश के सबसे बड़े कथित निवेश घोटालों में से एक में फंसे लाखों निवेशकों के लिए राहत की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
ED के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में 1595.85 करोड़ रुपये मूल्य की अतिरिक्त संपत्तियों की कुर्की की गई है, जिससे PACL मामले में कुल कुर्की बढ़कर ₹28,626 करोड़ तक पहुंच गई है। यह संपत्तियां भारत के साथ-साथ ऑस्ट्रेलिया सहित कई विदेशी स्थानों में भी स्थित हैं। जांच में सामने आया है कि ये संपत्तियां M/s PACL Ltd., उसकी सहयोगी कंपनियों और दिवंगत प्रमोटर नर्मल सिंह भंगू के परिवार व सहयोगियों के नाम पर दर्ज थीं, जिनमें बरिंदर कौर, हरसतिंदर पाल सिंह हायर, सुखविंदर कौर, गुरप्रीत सिंह और प्रेम कौर शामिल हैं।
मामला मूल रूप से केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज FIR से शुरू हुआ था, जिसमें PACL Ltd. और इसके प्रमोटरों पर देशभर के लाखों निवेशकों से धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए गए थे। आरोप पत्र के अनुसार, कंपनी ने एक अवैध सामूहिक निवेश योजना के जरिए लगभग ₹68,000 करोड़ से अधिक की राशि जुटाई। निवेशकों को किस्त आधारित योजनाओं और भूमि स्वामित्व के नाम पर भ्रामक दस्तावेज देकर निवेश के लिए प्रेरित किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने 02.02.2016 को Subrata Bhattacharya बनाम SEBI मामले में सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति आर.एम. लोढ़ा की अध्यक्षता में एक समिति गठित करने का निर्देश दिया था। इस समिति को PACL की संपत्तियों की बिक्री और उससे प्राप्त राशि को निवेशकों को लौटाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। इसके बाद ED ने 26.07.2016 को ECIR दर्ज कर मनी लॉन्ड्रिंग जांच शुरू की और अपराध से अर्जित संपत्तियों की पहचान व कुर्की की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
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जांच में यह भी सामने आया कि अपराध की आय को विभिन्न कंपनियों और सहयोगियों के नेटवर्क के माध्यम से घुमाकर कई परतों में निवेश किया गया। इस धन का उपयोग भारत और विदेशों में अचल संपत्तियों की खरीद में किया गया, जिन्हें परिवार के सदस्यों और नामीदारों के नाम पर रखा गया था। ED ने 10.09.2018 को विशेष अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया, जिस पर अदालत ने संज्ञान लिया। इसके अलावा कुछ आरोपियों के खिलाफ Fugitive Economic Offender Act के तहत कार्यवाही भी शुरू की गई है।
ED का कहना है कि 282 संपत्तियों का लोढ़ा समिति को हस्तांतरण निवेशकों को धन वापसी की प्रक्रिया को तेज करेगा। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि अब तक हजारों करोड़ रुपये की संपत्तियों की पहचान और कुर्की की जा चुकी है तथा आगे भी जांच जारी है। इस कार्रवाई से उन लाखों निवेशकों में उम्मीद जगी है जिनकी पूंजी लंबे समय से फंसी हुई है।
यह मामला भारत के सबसे बड़े सामूहिक निवेश घोटालों में से एक माना जाता है, जिसमें छोटे निवेशकों की बचत को योजनाबद्ध तरीके से आकर्षित किया गया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, वर्षों तक चली इस योजना में वास्तविक भूमि स्वामित्व के बजाय कागजी दस्तावेजों के आधार पर निवेश कराया गया और बाद में धन को विभिन्न माध्यमों से अचल संपत्तियों और विदेशी संरचनाओं में बदल दिया गया।
न्यायमूर्ति आर.एम. लोढ़ा समिति इस पूरी प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका निभा रही है, जो संपत्तियों की बिक्री और धन वापसी की निगरानी करती है। ED की लगातार कार्रवाई ने इस प्रक्रिया को गति दी है और जैसे-जैसे संपत्तियों की नीलामी आगे बढ़ेगी, निवेशकों को धन वापसी की संभावना और मजबूत होने की उम्मीद है।
हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में कानूनी और वित्तीय जटिलताएं बनी हुई हैं क्योंकि संपत्तियां कई देशों और नामों में फैली हुई हैं। इसके बावजूद जांच एजेंसियां यह सुनिश्चित करने में जुटी हैं कि अपराध से अर्जित धन का पता लगाकर उसे वास्तविक निवेशकों तक पहुंचाया जा सके।
