₹657 करोड़ के कथित बैंक घोटाले में गिरफ्तार हरियाणा के IAS अधिकारी राम कुमार सिंह को अदालत ने तीन दिन की CBI हिरासत में भेजा

₹657 करोड़ बैंक घोटाले में हरियाणा के आईएएस अधिकारी सीबीआई रिमांड पर, जांच के दायरे में बढ़ा वित्तीय नेटवर्क

Team The420
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चंडीगढ़। हरियाणा के बहुचर्चित ₹657 करोड़ बैंक घोटाले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच ने नया मोड़ ले लिया है। मामले में गिरफ्तार आईएएस अधिकारी राम कुमार सिंह को पंचकूला की एक अदालत ने तीन दिन की सीबीआई हिरासत में भेज दिया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि नगर निगम पंचकूला के बैंक खाते से ₹79 करोड़ से अधिक की राशि कथित रूप से अवैध तरीके से निकालकर अन्य संस्थाओं तक पहुंचाई गई। इस मामले को हरियाणा और चंडीगढ़ प्रशासन से जुड़े सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक माना जा रहा है।

सीबीआई के अनुसार राम कुमार सिंह को हाल ही में गिरफ्तार किया गया था। जांच में आरोप है कि नगर निगम पंचकूला के एक बैंक खाते से बड़ी रकम को कथित तौर पर फर्जी वित्तीय लेनदेन और संदिग्ध निवेश प्रक्रियाओं के माध्यम से निकालकर अन्य खातों और संस्थाओं में स्थानांतरित किया गया। एजेंसी अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस धन के प्रवाह में किन-किन व्यक्तियों और संस्थाओं की भूमिका रही।

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मामले की जांच के दौरान यह आरोप सामने आया है कि नगर निगम का बैंक खाता वित्त विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप नहीं खोला गया था। जांचकर्ताओं का दावा है कि खाते से संबंधित कुछ प्रक्रियाएं और दस्तावेज इस प्रकार तैयार किए गए थे जिससे बाद में किए जाने वाले कथित अनियमित वित्तीय लेनदेन को छिपाया जा सके। एजेंसी का आरोप है कि सावधि जमा (एफडी) बनाने के नाम पर हस्ताक्षरित चेक बैंक अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए, लेकिन संबंधित एफडी कभी अस्तित्व में नहीं आईं और धन अन्य खातों में स्थानांतरित कर दिया गया।

जांच एजेंसी का कहना है कि नगर निगम पंचकूला का मामला एक बड़े वित्तीय नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है। आरोप है कि हरियाणा सरकार के विभिन्न विभागों और चंडीगढ़ प्रशासन से जुड़े खातों से भी बड़ी रकम कथित रूप से फर्जी या अस्तित्वहीन सावधि जमाओं तथा अन्य वित्तीय माध्यमों के जरिए निकाली गई। प्रारंभिक जांच में शेल कंपनियों और संदिग्ध कारोबारी संरचनाओं के उपयोग के संकेत भी सामने आए हैं।

सीबीआई के अनुसार अब तक इस मामले में कई व्यक्तियों और कुछ शेल संस्थाओं के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किए जा चुके हैं। जांच का फोकस केवल धन की निकासी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि धन अंततः किन लाभार्थियों तक पहुंचा और क्या इसके पीछे कोई संगठित वित्तीय नेटवर्क सक्रिय था। एजेंसी वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की विस्तृत जांच कर रही है।

जांच के दौरान संबंधित अधिकारी के आवासों और अन्य परिसरों पर तलाशी अभियान भी चलाया गया, जहां से कथित तौर पर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए गए। अधिकारियों का मानना है कि इन दस्तावेजों के विश्लेषण से वित्तीय लेनदेन की पूरी श्रृंखला को समझने में मदद मिल सकती है। मामले में पहले भी कई अन्य व्यक्तियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और जांच लगातार आगे बढ़ रही है।

वित्तीय अपराधों के जानकारों का कहना है कि सरकारी विभागों से जुड़े बैंक खातों में होने वाली अनियमितताओं का प्रभाव केवल सरकारी राजस्व तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इससे सार्वजनिक परियोजनाओं और विकास कार्यों पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे मामलों में धन के स्रोत, उसके उपयोग और अंतिम लाभार्थियों की पहचान करना जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा होता है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि बड़े वित्तीय घोटालों में अक्सर कई स्तरों पर लेनदेन, फर्जी दस्तावेजों और शेल संस्थाओं का उपयोग कर धन के वास्तविक प्रवाह को छिपाने की कोशिश की जाती है। उनके अनुसार बैंकिंग रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य, ईमेल संचार और वित्तीय फॉरेंसिक विश्लेषण ऐसे मामलों की जांच में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि सरकारी धन से जुड़े मामलों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करना अत्यंत आवश्यक है।

फिलहाल सीबीआई हिरासत के दौरान अधिकारियों से पूछताछ कर रही है और विभिन्न विभागों, बैंक खातों तथा संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के बीच संभावित संबंधों की जांच की जा रही है। जांच एजेंसी का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं। ₹657 करोड़ के इस कथित घोटाले की जांच अब उस चरण में पहुंच चुकी है जहां वित्तीय नेटवर्क की पूरी संरचना और जिम्मेदार व्यक्तियों की भूमिका को लेकर अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।

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