गुरुग्राम। हरियाणा के गुरुग्राम में अवैध रूप से रह रहे 13 बांग्लादेशी नागरिकों की गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को ऐसे संगठित नेटवर्क के संकेत मिले हैं, जो कथित तौर पर सीमापार घुसपैठ, आवास, रोजगार और दस्तावेजों की व्यवस्था तक का पूरा तंत्र संचालित कर रहा था। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया है कि भारत में अवैध प्रवेश कराने के लिए प्रति व्यक्ति लगभग ₹15,000 तक की रकम एजेंटों को दी जाती थी। मामले के सामने आने के बाद पुलिस ने व्यापक सत्यापन अभियान शुरू कर दिया है और कई संदिग्ध ठिकानों को चिन्हित किया गया है।
पुलिस के अनुसार हाल ही में विशेष सत्यापन अभियान के दौरान गुरुग्राम के विभिन्न इलाकों से 13 ऐसे लोगों को हिरासत में लिया गया, जो दैनिक मजदूर के रूप में काम कर रहे थे लेकिन उनके पास भारत में रहने या यात्रा करने से संबंधित वैध दस्तावेज नहीं पाए गए। सभी को फिलहाल डिटेंशन सेंटर में रखा गया है और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
पूछताछ के दौरान हिरासत में लिए गए लोगों ने दावा किया कि गुरुग्राम, दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों में 100 से अधिक अन्य अवैध प्रवासी रह सकते हैं। इस जानकारी ने जांच एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इससे एक बड़े और संगठित नेटवर्क की संभावना सामने आई है। इन सूचनाओं के आधार पर अपराध शाखा की टीमों ने कई स्थानों पर तलाशी और सत्यापन अभियान तेज कर दिया है।
जांच में सामने आया है कि सीमापार प्रवेश कराने वाले एजेंट कथित तौर पर प्रति व्यक्ति करीब ₹15,000 लेते हैं। इसके बाद स्थानीय स्तर पर सक्रिय नेटवर्क के सदस्य रहने की जगह, रोजगार और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराते हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस नेटवर्क में कितने लोग शामिल हैं और यह गतिविधियां कितने समय से संचालित हो रही थीं।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक गुरुग्राम में 100 से अधिक ऐसे संभावित स्थानों की पहचान की गई है, जहां अवैध प्रवासियों के रहने की आशंका है। इनमें अनधिकृत कॉलोनियां, शहर की बाहरी सीमाओं पर खाली भूखंड, बड़े निर्माण स्थल, श्रमिक बस्तियां और प्रमुख एक्सप्रेसवे के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। अधिकारियों का मानना है कि तेजी से विकसित हो रहे निर्माण और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में बड़ी संख्या में श्रमिकों की मौजूदगी के कारण ऐसे क्षेत्रों का इस्तेमाल पहचान छिपाने के लिए किया जा सकता है।
मामले की जांच केवल भौतिक सत्यापन तक सीमित नहीं है। जांचकर्ताओं ने हिरासत में लिए गए लोगों के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की भी जांच शुरू कर दी है। साइबर विशेषज्ञ कॉल डिटेल रिकॉर्ड, सोशल मीडिया गतिविधियों और लोकेशन डेटा का विश्लेषण कर रहे हैं ताकि नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और उनकी गतिविधियों का पता लगाया जा सके।
प्रारंभिक डिजिटल जांच में यह संकेत भी मिले हैं कि कई व्हाट्सऐप समूहों और ऑनलाइन चैट नेटवर्क का इस्तेमाल कथित तौर पर अवैध प्रवेश, एक स्थान से दूसरे स्थान तक आवाजाही और विभिन्न राज्यों में बसने की व्यवस्था के लिए किया जाता था। जांच एजेंसियां अब इन डिजिटल चैनलों के माध्यम से जुड़े संभावित संपर्कों की पहचान करने का प्रयास कर रही हैं।
साइबर अपराध और संगठित अवैध नेटवर्क के बढ़ते उपयोग पर टिप्पणी करते हुए प्रसिद्ध साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि अपराधी नेटवर्क अब पारंपरिक तरीकों के साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म का भी व्यापक उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग एप, अस्थायी समूह और डिजिटल पहचान छिपाने की तकनीकें जांच को जटिल बनाती हैं, इसलिए डिजिटल फोरेंसिक और डेटा विश्लेषण की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
पुलिस ने आवासीय सोसायटियों, रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशनों, मकान मालिकों और ठेकेदारों को किरायेदारों तथा कर्मचारियों का अनिवार्य सत्यापन कराने की सलाह दी है। अधिकारियों का कहना है कि दिन-रात चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत दस्तावेजों की जांच, नागरिकता सत्यापन और संभावित सहयोगी नेटवर्क की पहचान की जा रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह कार्रवाई गुरुग्राम में हाल के वर्षों के सबसे बड़े सत्यापन अभियानों में से एक साबित हो सकती है। आने वाले दिनों में डिजिटल साक्ष्यों और पूछताछ से नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और उसके संचालन के तरीके को लेकर और महत्वपूर्ण खुलासे होने की संभावना है।
