नागपुर पुलिस ने ‘फ्री कॉइन’ और ‘मर्चेंट कॉइन’ नामक कथित निवेश योजनाओं से जुड़े ₹15 करोड़ के डिजिटल कॉइन घोटाले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया और ₹2.10 करोड़ फ्रीज किए

₹15 करोड़ के डिजिटल कॉइन घोटाले का पर्दाफाश, 10 लाख यूजर्स तक फैले नेटवर्क की जांच तेज

Team The420
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नागपुर। महाराष्ट्र के नागपुर में पुलिस ने एक बड़े डिजिटल निवेश घोटाले का भंडाफोड़ करते हुए ऐसे कथित नेटवर्क का खुलासा किया है, जिसने ‘फ्री कॉइन’ और ‘मर्चेंट कॉइन’ नामक योजनाओं के जरिए देशभर के हजारों निवेशकों को करोड़ों रुपये का चूना लगाया। आर्थिक अपराध शाखा और साइबर सेल की संयुक्त जांच में अब तक ₹15 करोड़ से अधिक की धोखाधड़ी के संकेत मिले हैं। मामले में दो प्रमुख आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि जांच एजेंसियों ने विभिन्न बैंक खातों और सावधि जमा में रखी लगभग ₹2.10 करोड़ की राशि फ्रीज कर दी है।

पुलिस के अनुसार, मामला एक बहुस्तरीय डिजिटल निवेश मॉडल से जुड़ा है, जिसमें लोगों को कम समय में असाधारण रिटर्न का वादा किया जाता था। जांच में सामने आया है कि एक डिजिटल प्लेटफॉर्म और मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से निवेशकों को ऐसे कॉइन खरीदने के लिए प्रेरित किया गया, जिनकी भविष्य में कीमत कई गुना बढ़ने का दावा किया जाता था। इसी लालच में बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी बचत इस योजना में निवेश कर दी।

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जांच अधिकारियों के मुताबिक, कथित घोटाले का संचालन एक डिजिटल कंपनी के माध्यम से किया जा रहा था, जिसे वर्ष 2022 में पंजीकृत किया गया था। कंपनी ने “फ्यूचर डिजिटल एसेट्स” नामक ऐप के जरिए निवेशकों को आकर्षित किया। योजना के तहत दावा किया जाता था कि निश्चित अवधि के बाद निवेशकों के डिजिटल वॉलेट में बड़ी राशि जमा हो जाएगी। हालांकि धन निकालने के लिए नए सदस्यों को जोड़ना अनिवार्य बताया जाता था, जिससे पूरा मॉडल एक बहुस्तरीय रेफरल नेटवर्क में बदल जाता था।

पुलिस का कहना है कि ‘फ्री कॉइन’ योजना के तहत निवेशकों को आश्वासन दिया जाता था कि निर्धारित समय के बाद उनके वॉलेट में लाभ दिखाई देगा। लेकिन वास्तविक निकासी कई शर्तों से जोड़ दी जाती थी। निवेशकों को लगातार नए लोगों को जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाता था और उन्हें मासिक आय के बड़े-बड़े दावे दिखाए जाते थे। इसी तरह ‘मर्चेंट कॉइन’ को लेकर यह प्रचार किया गया कि उसकी कीमत भविष्य में कई लाख रुपये तक पहुंच जाएगी।

जांच में सामने आया है कि एक महिला निवेशक ने इस योजना में लगभग ₹2.25 लाख का निवेश किया था। उसके डिजिटल वॉलेट में निवेश का मूल्य बढ़ता हुआ दिखाई देता रहा, लेकिन जब उसने धन निकालने की कोशिश की तो विभिन्न नियमों और सीमाओं का हवाला देकर भुगतान रोक दिया गया। बाद में यह स्पष्ट हुआ कि डिजिटल वॉलेट में दिखाई जा रही राशि वास्तविक निकासी योग्य नहीं थी।

पुलिस अधिकारियों का अनुमान है कि इस नेटवर्क से देशभर में 10 लाख से अधिक उपयोगकर्ता जुड़े हो सकते हैं। प्राथमिकी दर्ज होने के बाद जांच एजेंसियों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए सैकड़ों नए लोगों को इस योजना में शामिल होने से रोकने का दावा किया है। इसके अलावा कई बैंक खातों की निगरानी शुरू कर वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है।

फोरेंसिक जांच में यह भी सामने आने का दावा किया गया है कि ‘मर्चेंट कॉइन’ का किसी मान्यता प्राप्त बैंकिंग तंत्र या ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से वास्तविक संबंध नहीं था। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी भी डिजिटल संपत्ति की वास्तविक उपयोगिता, बाजार स्वीकृति और नियामकीय स्थिति की जांच किए बिना निवेश करना गंभीर वित्तीय जोखिम पैदा कर सकता है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि ऐसे मामलों में अपराधी तकनीक, डिजिटल मार्केटिंग और सामाजिक विश्वास का मिश्रण इस्तेमाल करते हैं। उनके अनुसार, जब किसी निवेश योजना में निश्चित और असाधारण रिटर्न का दावा किया जाए तथा लाभ पाने के लिए लगातार नए सदस्य जोड़ने की शर्त हो, तो निवेशकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल कॉइन, क्रिप्टो एसेट या निवेश प्लेटफॉर्म में धन लगाने से पहले उसकी वैधता और नियामकीय स्थिति की जांच आवश्यक है।

पुलिस ने मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और लैपटॉप, मोबाइल फोन सहित कई डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं। जांच एजेंसियां अब धन के पूरे प्रवाह, संभावित लाभार्थियों, तकनीकी सहयोगियों और नेटवर्क से जुड़े अन्य व्यक्तियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि वित्तीय रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्यों की जांच आगे बढ़ने के साथ इस कथित डिजिटल कॉइन घोटाले से जुड़े और भी महत्वपूर्ण खुलासे सामने आ सकते हैं।

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