जयपुर में RGHS के तहत कथित फर्जी दस्तावेज और बिलिंग गड़बड़ी मामले में निजी अस्पताल संचालक की गिरफ्तारी के बाद जांच तेज हो गई है।

₹95 लाख जमीन सौदे में बड़ा विवाद: ओडिशा गृह विभाग की IAS अधिकारी मुश्किल में, पुलिस ने मांगी कार्रवाई की अनुमति

Team The420
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कटक: ओडिशा गृह विभाग में अतिरिक्त सचिव पद पर तैनात एक वरिष्ठ IAS अधिकारी एक कथित ₹95 लाख के जमीन सौदे से जुड़े धोखाधड़ी मामले में गंभीर कानूनी विवाद में घिर गई हैं। पुलिस ने मामले में अधिकारी के खिलाफ मजबूत सबूत मिलने का दावा करते हुए आगे की कार्रवाई के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, यह मामला IAS अधिकारी अराधना दास से जुड़ा है। उनके खिलाफ 5 फरवरी को सीडीए सेक्टर-6 निवासी कमल भौसिंका द्वारा शिकायत दर्ज कराई गई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि नवंबर 2022 में सीडीए सेक्टर-10 में एक प्लॉट खरीदने को लेकर ₹95 लाख में सौदा तय हुआ था।

शिकायतकर्ता के मुताबिक, तय समझौते के तहत उन्होंने ₹85 लाख RTGS के जरिए अधिकारी के बैंक खाते में ट्रांसफर किए, जबकि बाकी ₹10 लाख नकद में दिए गए। हालांकि पूरा भुगतान होने के बाद भी न तो जमीन का रजिस्ट्री दस्तावेज तैयार किया गया और न ही संपत्ति का हस्तांतरण किया गया।

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आरोप यह भी है कि पैसे लेने के बाद अधिकारी ने यह कहा कि रकम पहले ही खर्च हो चुकी है और बाद में शिकायतकर्ता को कथित तौर पर अपशब्द कहे गए और झूठे मामले में फंसाने की धमकी भी दी गई। इसके आधार पर सीडीए फेज-2 थाना में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया, जिसमें धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और धमकी से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि जांच के दौरान बैंक लेनदेन और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर यह पाया गया है कि ₹95 लाख का ट्रांजेक्शन हुआ था। जांच रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि आरोपी अधिकारी ने जांच प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया।

21 मार्च को तैयार विस्तृत रिपोर्ट में सीडीए फेज-2 थाना प्रभारी ने उल्लेख किया कि अधिकारी को कई बार नोटिस भेजे गए, लेकिन उन्होंने उन्हें स्वीकार नहीं किया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि असहयोग के कारण जांच की प्रक्रिया प्रभावित हुई।

इसके बाद 1 अप्रैल को कटक डीसीपी ने राज्य गृह विभाग और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को पत्र भेजकर एफआईआर और जांच की प्रगति की जानकारी दी। साथ ही सामान्य प्रशासन विभाग को भी आगे की कानूनी और प्रशासनिक कार्रवाई के लिए रिपोर्ट भेजी गई।

जांच अधिकारियों के अनुसार, मामले से जुड़े बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल ट्रांजेक्शन और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है। यह भी देखा जा रहा है कि यह केवल एक असफल जमीन सौदा है या फिर किसी बड़े वित्तीय अनियमितता पैटर्न का हिस्सा है।

पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि दोनों पक्षों के बीच और कौन-कौन से दस्तावेज या संवाद हुए थे, जिससे लेनदेन की वास्तविक प्रकृति स्पष्ट हो सके। डिजिटल रिकॉर्ड और बैंकिंग ट्रेल को भी जांच के दायरे में लिया गया है।

फिलहाल आरोपी अधिकारी की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। उनसे संपर्क करने के प्रयास असफल रहे हैं।

कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में जहां उच्च मूल्य की संपत्ति का लेनदेन होता है, वहां दस्तावेजी साक्ष्य और अनुबंध की शर्तें बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। विशेषकर तब, जब भुगतान के बाद भी संपत्ति का रजिस्ट्रेशन न हुआ हो।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, आगे की कार्रवाई राज्य सरकार की अनुमति पर निर्भर करेगी। अनुमति मिलने के बाद आरोपों की पुष्टि होने पर धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात और धमकी जैसी धाराओं में औपचारिक कार्रवाई की जा सकती है।

यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें एक वरिष्ठ IAS अधिकारी का नाम जुड़ा है और कथित लेनदेन की राशि भी काफी बड़ी है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जांच पूरी तरह साक्ष्यों के आधार पर की जा रही है और सभी प्रक्रियाओं का पालन किया जा रहा है।

यह घटना एक बार फिर इस बात को उजागर करती है कि बड़े पैमाने पर होने वाले जमीन सौदों में पारदर्शिता, कानूनी दस्तावेज और उचित जांच बेहद जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे विवादों से बचा जा सके।

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