अशोक खरात मामले में 130 से अधिक फर्जी बैंक खातों और ₹63 करोड़ के संदिग्ध लेनदेन की जांच करते अधिकारी।

नोएडा भूमि मुआवजा घोटाला: सैकड़ों करोड़ दांव पर, सुप्रीम कोर्ट की कड़ी निगरानी में जांच

Team The420
5 Min Read

नोएडा: नोएडा में भूमि मुआवजा घोटाला एक बार फिर सुर्खियों में है, जहां ताजा खुलासों से संकेत मिल रहा है कि अनियमितताओं का दायरा सैकड़ों करोड़ रुपये तक फैला हुआ है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि Supreme Court of India लगातार इस जांच की निगरानी कर रहा है और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त रुख अपना चुका है।

अदालत के निर्देश पर गठित विशेष जांच दल (SIT) द्वारा की जा रही जांच में प्रारंभिक स्तर पर कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अदालत में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने जमीन अधिग्रहण के नाम पर बढ़ा-चढ़ाकर मुआवजा दिलाने के बदले 10 प्रतिशत तक कमीशन वसूला।

प्रारंभिक जांच में कमीशन नेटवर्क का खुलासा

सुनवाई के दौरान SIT ने अदालत को बताया कि इस घोटाले में निर्धारित दरों से कहीं अधिक मुआवजा राशि तय करने के लिए हेरफेर किया गया। कई मामलों में लाभार्थियों को अतिरिक्त भुगतान का लालच दिया गया और बदले में उस अतिरिक्त रकम का एक निश्चित हिस्सा नकद के रूप में अधिकारियों को देने की बात सामने आई।

यह प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष पेश की गई, जिसमें अन्य वरिष्ठ न्यायाधीश भी शामिल थे। पीठ ने वित्तीय अनियमितताओं और प्रक्रियागत खामियों की विस्तार से समीक्षा की।

FCRF Launches Premier CISO Certification Amid Rising Demand for Cybersecurity Leadership

वकीलों ने अदालत को बताया कि कई किसानों ने अपने बयान में स्वीकार किया है कि उनसे बढ़े हुए मुआवजे के बदले 10 प्रतिशत राशि ली गई। हालांकि SIT ने यह भी माना कि एक दशक से अधिक पुराने इस मामले में वित्तीय लेन-देन का पता लगाना जटिल और समय लेने वाला है।

जांच की धीमी गति पर नाराजगी, छह हफ्ते की समयसीमा

जांच की रफ्तार पर असंतोष जताते हुए अदालत ने अतिरिक्त समय देने से इनकार कर दिया। इसके बजाय SIT को निर्देश दिया गया कि वह छह सप्ताह के भीतर जांच पूरी कर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे।

मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को तय की गई है। इससे पहले दिसंबर 2025 में अदालत ने SIT को पिछले 10 से 15 वर्षों के दौरान निर्णय लेने वाले पदों पर रहे अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच करने का निर्देश दिया था।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि जिन किसानों को अतिरिक्त मुआवजा मिला है, उनके खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी और उन्हें जांच के दौरान परेशान नहीं किया जाएगा। जांच का फोकस उन लोगों की पहचान पर है जिन्होंने कथित रूप से इस अवैध लेन-देन को अंजाम दिया।

कैसे हुआ मुआवजे में हेरफेर का खेल

इस घोटाले की जड़ें कई दशक पुराने भूमि अधिग्रहण मामलों से जुड़ी हैं। शुरुआती दौर में किसानों को बेहद कम दरों पर मुआवजा दिया गया था। समय के साथ विवाद बढ़े और अदालतों के हस्तक्षेप के बाद मुआवजा दरों में बदलाव होता रहा।

एक उदाहरण में, एक जमीन मालिक को पहले कम दर पर मुआवजा मिला, जिसे बाद में जिला अदालत के आदेश पर बढ़ाया गया। इसके वर्षों बाद, उच्च अदालत द्वारा याचिका खारिज किए जाने के बावजूद, अधिकारियों ने मामले को लंबित दिखाकर अत्यधिक मुआवजा जारी कर दिया।

इस प्रक्रिया के तहत एक ही मामले में करीब ₹7.28 करोड़ का भुगतान किया गया। जांच एजेंसियों का मानना है कि इसी तरह की प्रक्रिया कई मामलों में अपनाई गई, जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय नुकसान हुआ और सिस्टम की कमजोरियां उजागर हुईं।

व्यापक असर और आगे की जांच

इस घोटाले ने शहरी विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली, पारदर्शिता और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला किसी एक अधिकारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संस्थागत कमजोरियों की ओर इशारा करता है।

SIT अब तक उन 160 लाभार्थियों में से अधिकांश के बयान दर्ज कर चुकी है, जिन्हें अतिरिक्त मुआवजा मिला था। साथ ही, दोषियों के खिलाफ अभियोजन शुरू करने के लिए आवश्यक अनुमति लेने की प्रक्रिया भी जारी है।

जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, और खुलासों की संभावना बनी हुई है, जिससे अन्य शामिल लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है। यह मामला सार्वजनिक धन के दुरुपयोग को रोकने के लिए मजबूत ऑडिट सिस्टम, पारदर्शी प्रक्रियाओं और सख्त प्रवर्तन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

यह उच्च-प्रोफाइल जांच आने वाले समय में तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा प्रक्रियाओं से जुड़े मामलों के लिए एक महत्वपूर्ण मिसाल साबित हो सकती है।

हमसे जुड़ें

Share This Article