ग्रेटर नोएडा की साइबर क्राइम पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का भंडाफोड़ किया है जो खुद को इंड्रप्रस्थ गैस लिमिटेड (IGL) का कर्मचारी बताकर लोगों से ठगी करता था। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिन्होंने कथित तौर पर गैस बिल बकाया होने का डर दिखाकर एक बुजुर्ग व्यक्ति से 21.27 लाख रुपये की ठगी की।
पुलिस के अनुसार, 9 मार्च को बिसरख निवासी 61 वर्षीय ग्यानिब कालरा ने शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि 1 मार्च को उन्हें एक कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को IGL कर्मचारी बताया और कहा कि गैस बिल बकाया होने के कारण उनका कनेक्शन काट दिया जाएगा। इसके बाद उन्हें तुरंत भुगतान करने का दबाव बनाया गया।
इसके बाद पीड़ित को एक लिंक भेजा गया और जैसे ही उन्होंने उसमें बैंक संबंधी जानकारी डाली, आरोपियों ने उनके खाते तक अनधिकृत पहुंच बना ली। पुलिस का कहना है कि ठगों ने अलग-अलग 11 ट्रांजैक्शन के जरिए कुल 21,26,835 रुपये निकाल लिए और इस रकम को विभिन्न क्रेडिट कार्ड खातों में ट्रांसफर कर दिया।
जांच के बाद पुलिस ने गौतम बुद्ध नगर और आसपास के इलाकों से चार आरोपियों सचिन कुमार, शहनवाज शेख, शिवम पांडेय और शुभम कुमार सिंह को गिरफ्तार किया है।
पुलिस जांच में सामने आया कि शिवम पांडेय और शुभम कुमार सिंह कथित रूप से नेटवर्क को इस्तेमाल के लिए क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराते थे। इसके बदले उन्हें 10 से 20 प्रतिशत तक कमीशन मिलता था। ठगी की गई रकम को विभिन्न क्रेडिट कार्ड्स के जरिए घुमाया गया, जिसमें सचिन कुमार के खाते में 1.49 लाख रुपये और शहनवाज शेख के खाते में 4.78 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए।
आरोपियों की शैक्षिक और पेशेवर पृष्ठभूमि की बात करें तो सचिन कुमार 12वीं पास है और एक निजी बैंक में रिलेशनशिप मैनेजर के पद पर कार्यरत है, जबकि शहनवाज शेख एक निजी कंपनी में डिजिटल मार्केटिंग का काम करता है। शिवम पांडेय वेटर के रूप में काम करता है, जबकि शुभम कुमार सिंह फिलहाल बेरोजगार है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि गैस, बिजली या किसी भी सेवा से जुड़े नाम पर आने वाले अनजान कॉल या मैसेज में भेजे गए लिंक पर क्लिक न करें। किसी भी भुगतान से पहले संबंधित कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप से जानकारी की पुष्टि जरूर करें।
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क के अन्य सदस्यों और वित्तीय लेनदेन की आगे जांच कर रही है।
