पनवेल/नवी मुंबई: नवी मुंबई साइबर पुलिस ने देशभर में साइबर ठगी से जुड़े कथित म्यूल बैंक अकाउंट नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई शुरू की है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) और महाराष्ट्र साइबर से प्राप्त मनी ट्रेल विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने ऐसे कई संदिग्ध बैंक खातों की पहचान की है, जिनका कथित तौर पर साइबर ठगी से प्राप्त धनराशि को स्वीकार करने, आगे विभिन्न खातों में स्थानांतरित करने और नकद निकालने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। मामले में अज्ञात खाताधारकों और संबंधित उपयोगकर्ताओं के खिलाफ दो अलग-अलग आपराधिक मामले दर्ज किए गए हैं।
पुलिस के अनुसार यह कार्रवाई राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) पर उपलब्ध वित्तीय लेनदेन और शिकायतों के विस्तृत विश्लेषण के बाद की गई। जांच में सामने आया कि फिनो पेमेंट्स बैंक और इंडियन ओवरसीज बैंक में संचालित कई खाते कथित तौर पर म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे। इन खातों के माध्यम से देश के विभिन्न राज्यों में हुई साइबर ठगी की रकम को पहले प्राप्त किया जाता था और बाद में उसे अन्य खातों में स्थानांतरित कर दिया जाता था या नकद निकाल लिया जाता था। जांच एजेंसियां अब इन खातों का संचालन करने वाले व्यक्तियों और इनके पीछे सक्रिय बड़े साइबर नेटवर्क की पहचान करने में जुटी हैं।
पहले मामले में साइबर पुलिस के एक सरकारी परिवाद के आधार पर फिनो पेमेंट्स बैंक के तीन संदिग्ध खातों की जांच की गई। जांच में पाया गया कि इन खातों का संबंध क्रमशः 154, 187 और 1,809 साइबर ठगी शिकायतों से है। इस प्रकार केवल इन तीन खातों से जुड़ी शिकायतों की कुल संख्या 2,150 तक पहुंच गई। पुलिस के अनुसार मनी ट्रेल विश्लेषण से पता चला कि साइबर ठगी की रकम इन खातों में जमा होने के बाद अन्य खातों में ट्रांसफर की गई या नकद निकाल ली गई। जांच के अनुसार ये संदिग्ध लेनदेन 12 फरवरी 2024 से 17 मार्च 2026 के बीच किए गए।
दूसरे मामले में एक सहायक पुलिस निरीक्षक की शिकायत के आधार पर वाशी स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक के चार संदिग्ध खातों की जांच शुरू की गई। इन खातों का संबंध देशभर में दर्ज 303 साइबर ठगी शिकायतों से पाया गया। पुलिस का कहना है कि इन खातों का भी कथित रूप से साइबर ठगी की रकम प्राप्त करने, आगे स्थानांतरित करने अथवा नकद निकासी के लिए उपयोग किया गया। इन खातों से जुड़े संदिग्ध लेनदेन नवंबर 2025 से मई 2026 के बीच हुए बताए गए हैं।
जांच एजेंसियों का मानना है कि ये म्यूल बैंक खाते संगठित साइबर अपराध नेटवर्क की वित्तीय श्रृंखला का महत्वपूर्ण हिस्सा थे। पुलिस के अनुसार साइबर अपराधी निवेश पर अधिक लाभ, शेयर बाजार, पार्ट-टाइम नौकरी, डिजिटल अरेस्ट और अन्य फर्जी योजनाओं का झांसा देकर लोगों से धन ठगते हैं। इसके बाद ठगी की राशि को कई म्यूल खातों के माध्यम से अलग-अलग स्थानों पर भेजकर वास्तविक लाभार्थियों की पहचान छिपाने का प्रयास किया जाता है। बाद में यह राशि अन्य खातों में ट्रांसफर कर दी जाती है या एटीएम और चेक के जरिए निकाल ली जाती है।
अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध खातों की पहचान I4C के NCRP पोर्टल पर उपलब्ध शिकायतों और मनी ट्रेल के विश्लेषण के आधार पर की गई। अब वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड, डिजिटल साक्ष्य और ट्रांजैक्शन हिस्ट्री का विस्तृत परीक्षण किया जा रहा है ताकि धन के पूरे प्रवाह, अंतिम लाभार्थियों और इस नेटवर्क के मुख्य संचालकों की पहचान की जा सके।
पुलिस ने अज्ञात खाताधारकों और संबंधित उपयोगकर्ताओं के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और साझा आपराधिक मंशा से जुड़े प्रावधानों में मामले दर्ज किए हैं। साथ ही अन्य संभावित जुड़े बैंक खातों और सहयोगियों की भी पहचान की जा रही है।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने कहा कि म्यूल बैंक खाते आज संगठित साइबर अपराध का सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय माध्यम बन चुके हैं। उन्होंने कहा कि लोग लालच में आकर अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं, क्योंकि ऐसे खातों का उपयोग साइबर अपराध की रकम को छिपाने और स्थानांतरित करने में किया जाता है। उन्होंने कहा कि बैंक खाताधारकों को यह समझना चाहिए कि यदि उनका खाता साइबर अपराध में इस्तेमाल होता है तो उन्हें भी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच जारी है और डिजिटल एवं वित्तीय साक्ष्यों के आधार पर आगे और कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
