फर्जी निवेश, डिजिटल अरेस्ट, शेयर मार्केट और एपीके लिंक घोटालों की रकम ट्रांसफर करने के लिए इस्तेमाल हुए बैंक खाते; जांच में संगठित साइबर नेटवर्क और कमीशन आधारित म्यूल अकाउंट सिस्टम का खुलासा

₹35 करोड़ की साइबर ठगी से जुड़े म्यूल बैंक खातों पर शिकंजा, 23 खाताधारकों के खिलाफ केस दर्ज

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By Roopa
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नवी मुंबई: महाराष्ट्र में साइबर अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत पुलिस ने ₹35 करोड़ से अधिक की ऑनलाइन ठगी से जुड़े म्यूल बैंक खातों पर बड़ा शिकंजा कसा है। पुलिस ने ऐसे 23 बैंक खाताधारकों के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं, जिन पर आरोप है कि उन्होंने कमीशन के बदले अपने बैंक खातों का उपयोग साइबर अपराधियों को अवैध धन के लेनदेन के लिए करने दिया। जांच एजेंसियों का कहना है कि इन खातों का इस्तेमाल फर्जी निवेश योजनाओं, डिजिटल अरेस्ट, शेयर बाजार में निवेश के नाम पर ठगी, ओटीपी धोखाधड़ी और एपीके फाइल आधारित साइबर अपराधों से प्राप्त रकम को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए किया गया।

पुलिस के अनुसार, देशभर में सक्रिय साइबर ठग अब संगठित नेटवर्क के रूप में काम कर रहे हैं। गिरोह के विभिन्न सदस्य अलग-अलग भूमिकाएं निभाते हैं। एक समूह संभावित पीड़ितों से संपर्क कर उन्हें निवेश, नौकरी या अन्य आकर्षक प्रस्तावों के जरिए झांसे में लेता है, जबकि दूसरा समूह आर्थिक रूप से कमजोर या लालच में आने वाले लोगों को बैंक खाते खुलवाने या अपने मौजूदा खातों का उपयोग करने के लिए तैयार करता है। इसके बदले खाताधारकों को कमीशन दिया जाता है।

जांच में सामने आया कि म्यूल खाताधारक कथित तौर पर अपने पासबुक, एटीएम कार्ड, चेकबुक, पिन और अन्य बैंकिंग विवरण साइबर अपराधियों को सौंप देते थे। इसके बाद ठगी से प्राप्त रकम इन खातों में जमा की जाती और तेजी से अन्य खातों में स्थानांतरित कर दी जाती थी, जिससे धन के वास्तविक स्रोत का पता लगाना कठिन हो जाता था।

पुलिस ने बताया कि राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) और भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) के पोर्टल पर दर्ज शिकायतों और वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों का विश्लेषण करने के बाद यह नेटवर्क सामने आया। जांच के दौरान संदिग्ध बैंक खातों, चेक लेनदेन और एटीएम निकासी के रिकॉर्ड का परीक्षण किया गया, जिसमें कई खातों में हाल के महीनों में लाखों रुपये के संदिग्ध लेनदेन पाए गए।

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एनसीआरपी पोर्टल पर सत्यापन के दौरान यह भी पाया गया कि प्रत्येक संदिग्ध खाते के खिलाफ कई साइबर अपराध शिकायतें दर्ज थीं। पुलिस का मानना है कि खाताधारकों ने आर्थिक लाभ के उद्देश्य से जानबूझकर अपने बैंक खाते दूसरों को उपयोग करने के लिए उपलब्ध कराए। 27 जुलाई तक पुलिस ने ऐसे 23 खाताधारकों के खिलाफ अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। जांच में जिन खातों की पहचान हुई है, उनका संबंध कुल ₹35 करोड़ की साइबर ठगी से जोड़ा गया है।

जांच एजेंसियां अब आरोपियों के बैंक स्टेटमेंट, वित्तीय लेनदेन और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इनका संबंध रायगढ़ जिले या महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में दर्ज समान मामलों से भी है। पुलिस ने हाल ही में रायगढ़ साइबर थाने में दर्ज एक मामले में कथित सरगना को भी गिरफ्तार किया है, जिसे अदालत ने पुलिस हिरासत में भेज दिया है।

पुलिस ने नागरिकों को आगाह किया है कि वे किसी भी प्रकार के लालच या कमीशन के बदले अपने बैंक खाते, पहचान पत्र, सिम कार्ड, फोटो या बैंकिंग दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति को उपलब्ध न कराएं। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर अपने खाते या पहचान संबंधी दस्तावेजों का उपयोग साइबर अपराध के लिए होने देता है, तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूल बैंक खाते साइबर अपराधियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण कड़ी बन चुके हैं, क्योंकि इनके माध्यम से अवैध धन को छिपाना और ट्रांसफर करना आसान हो जाता है। ऐसे में वित्तीय जागरूकता, सतर्कता और संदिग्ध लेनदेन की समय पर सूचना देना ही साइबर अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण का सबसे महत्वपूर्ण उपाय माना जा रहा है।

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