नासिक: महाराष्ट्र के 2027-28 नासिक-त्र्यंबकेश्वर कुंभ मेले की तैयारियों के बीच फर्जी टेंडर के नाम पर कथित तौर पर ₹2.17 करोड़ की ठगी का मामला सामने आया है। नासिक शहर पुलिस ने इस मामले में महाराष्ट्र के मंत्री गिरिश महाजन के रिश्तेदार तनय अनंत महाजन (32), नरेंद्र तोताराम महाजन (51) और शकील अहमद सलीमुद्दीन शेख के खिलाफ चार अलग-अलग एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने कुंभ मेले से जुड़े सरकारी ठेके दिलाने का झांसा देकर ठेकेदारों से रकम हासिल की।
जांच के अनुसार, आरोपियों ने खुद को नासिक संभागीय आयुक्त कार्यालय के अधिकारियों से संपर्क रखने वाला व्यक्ति बताया। इसके बाद कथित तौर पर सरकारी दस्तावेजों की नकल तैयार की गई और संभागीय आयुक्त के डिजिटल हस्ताक्षर का इस्तेमाल करते हुए फर्जी वर्क ऑर्डर बनाए गए। इन दस्तावेजों के जरिए ठेकेदारों को भरोसा दिलाया गया कि उन्हें कुंभ मेले से जुड़े विभिन्न काम मिल सकते हैं।
पुलिस के मुताबिक, जिन कामों के फर्जी ठेके का प्रस्ताव दिया गया, उनमें सफाई और हाउसकीपिंग सेवाएं, पुलिसकर्मियों के लिए बाल्टी, गद्दे और बिस्तर की आपूर्ति, अधिकारियों और पुलिस के लिए भोजन व पानी की व्यवस्था तथा सोलर पावर सिस्टम, बैटरी और इनवर्टर लगाने जैसे काम शामिल थे। आरोप है कि खाद्य और पानी की आपूर्ति का ठेका दिलाने के नाम पर एक ठेकेदार से अकेले ₹2.17 करोड़ वसूले गए।
पूछताछ के दौरान तनय महाजन और नरेंद्र महाजन ने कथित तौर पर ठगी में अपनी भूमिका स्वीकार की। पुलिस ने मामले में चार एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की है। दोनों आरोपी जलगांव जिले के जामनेर के रहने वाले हैं, जो गिरिश महाजन का विधानसभा क्षेत्र भी है।
मामले के सामने आने के बाद गिरिश महाजन ने आरोपी से अपने रिश्ते के बावजूद किसी तरह की रियायत नहीं देने की बात कही। उन्होंने कहा कि गलत काम करने वाले किसी व्यक्ति को बचाने का सवाल ही नहीं है और रिश्तेदारी जांच के रास्ते में बाधा नहीं बनेगी। मंत्री ने बताया कि उन्होंने खुद नासिक पुलिस आयुक्त को मामले की जानकारी दी थी। उन्होंने तनय महाजन के खिलाफ कार्रवाई को लेकर भी सख्त रुख जताया।
कुंभ मेले की तैयारियों की निगरानी में गिरिश महाजन की महत्वपूर्ण भूमिका है। वह आयोजन से जुड़े कैबिनेट मंत्री होने के साथ नासिक के प्रभारी मंत्री भी हैं। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और महाजन हाल में कुंभ की तैयारियों की समीक्षा कर चुके हैं। मेले से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर करीब ₹34,000 करोड़ खर्च होने का अनुमान है।
इस बीच, भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह घटनाक्रम पार्टी के लिए निश्चित रूप से असहज करने वाला है, लेकिन सरकार या प्रशासन की ओर से आरोपियों को कोई वास्तविक ठेका नहीं दिया गया था। उन्होंने कहा कि मामला ऐसे लोगों से जुड़ा है, जिनमें से एक मंत्री का रिश्तेदार है, लेकिन फिलहाल मंत्री की संलिप्तता का कोई संकेत सामने नहीं आया है।
पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि फर्जी दस्तावेज तैयार करने, डिजिटल हस्ताक्षर के कथित इस्तेमाल और ठेकेदारों से रकम वसूलने की पूरी प्रक्रिया में कितने लोग शामिल थे। साथ ही, ठेके के नाम पर जारी किए गए अन्य दस्तावेजों और संभावित पीड़ितों की भी जांच की जा रही है। कुंभ मेले जैसे बड़े आयोजन से जुड़े सरकारी कार्यों के नाम पर फर्जीवाड़े ने प्रशासन के सामने दस्तावेजों और ठेका प्रक्रिया की सत्यता जांचने की चुनौती भी बढ़ा दी है।
