रोगी कल्याण समिति के खाते से 15 चेक के जरिए रकम निकालने का आरोप; कोर्ट ने डीन की भूमिका और पुलिस जांच पर उठाए सवाल, गृह विभाग भी तीन पुलिस अधिकारियों से मांगेगा जवाब

₹1.36 करोड़ के जामनगर डेंटल कॉलेज घोटाले पर गुजरात सरकार सख्त, स्वास्थ्य विभाग ने शुरू की जांच

Roopa
By Roopa
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जामनगर: गुजरात के सरकारी जामनगर डेंटल कॉलेज में कथित ₹1.36 करोड़ के वित्तीय घोटाले को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई जामनगर सेशन कोर्ट की उन टिप्पणियों के बाद की गई है, जिनमें मामले की सुनवाई के दौरान कॉलेज की डीन डॉ. नयनाबेन पटेल की भूमिका और पुलिस द्वारा की गई जांच पर गंभीर सवाल उठाए गए थे। कोर्ट के निर्देश के बाद गृह विभाग भी जांच से जुड़े तीन पुलिस अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा करेगा।

आरोप है कि जामनगर डेंटल कॉलेज की रोगी कल्याण समिति के बैंक खाते से करीब ₹1.36 करोड़ की राशि 15 चेक के माध्यम से निकाली गई। इन चेक पर कथित तौर पर डीन के हस्ताक्षर थे। जांच एजेंसी के अनुसार, कॉलेज के एक क्लर्क ने कथित रूप से इन चेक के जरिए रकम निकाली और पहले अपने बैंक खाते में ट्रांसफर की। इसके बाद रकम को अन्य खातों में भेजे जाने का भी आरोप है।

मामले में आरोपी क्लर्क की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान जामनगर सेशन कोर्ट ने डीन की भूमिका को लेकर कई सवाल उठाए। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पुलिस की जांच जिस तरीके से की गई, उससे ऐसा प्रतीत होता है कि इससे डीन को संभावित रूप से लाभ पहुंच सकता था।

अदालत ने अलग-अलग आदेशों में डीन से संबंधित अपनी टिप्पणियों की प्रति स्वास्थ्य विभाग के सचिव को भेजने का निर्देश दिया। वहीं जांच से जुड़े तीन पुलिस अधिकारियों—PSI एस.जी. केशवाला, PSI आर.के. खलीफा और PSI आर.बी. ठाकोर—के संबंध में की गई टिप्पणियों को गृह विभाग के संयुक्त सचिव को भेजने का आदेश दिया गया।

कोर्ट के निर्देश के बाद गुजरात पुलिस महानिदेशक कार्यालय ने संबंधित आदेशों की प्रतियां दोनों विभागों को भेज दीं। जिला सरकारी वकील जमान के. भंडेरी ने भी स्वास्थ्य और गृह विभाग के अधिकारियों को आदेशों की प्रतियां उपलब्ध कराईं।

अब स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित जांच समिति डेंटल कॉलेज की डीन से कथित वित्तीय अनियमितताओं और उनके हस्ताक्षर वाले चेक से जुड़े मामलों पर स्पष्टीकरण मांग सकती है। समिति यह भी देखेगी कि रोगी कल्याण समिति के खाते से इतनी बड़ी राशि किस प्रक्रिया के तहत निकाली गई और कॉलेज स्तर पर वित्तीय निगरानी की क्या व्यवस्था थी।

दूसरी ओर, गृह विभाग जांच में पुलिस अधिकारियों की भूमिका को लेकर जवाब मांग सकता है। अदालत की टिप्पणियों के आधार पर यह देखा जाएगा कि मामले की जांच के दौरान सभी आरोपों और संभावित संदिग्धों की भूमिका की निष्पक्षता से पड़ताल की गई थी या नहीं।

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने आरोपी क्लर्क के कथित कबूलनामे की वीडियो रिकॉर्डिंग समेत कई साक्ष्य पेश किए। पुलिस ने मामले में सूरत से एक अन्य आरोपी की गिरफ्तारी से संबंधित जानकारी भी अदालत के समक्ष रखी।

हालांकि, पुलिस और अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि फिलहाल डीन को कथित ₹1.36 करोड़ के घोटाले से सीधे जोड़ने वाला कोई ठोस साक्ष्य सामने नहीं आया है। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले की जांच अभी जारी है।

यही वजह है कि स्वास्थ्य विभाग की जांच समिति की रिपोर्ट इस मामले में आगे की कार्रवाई के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। समिति वित्तीय लेनदेन, चेक पर किए गए हस्ताक्षर, कॉलेज के प्रशासनिक रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारियों की भूमिका की समीक्षा कर सकती है।

मामले ने सरकारी संस्थानों में वित्तीय नियंत्रण और जवाबदेही को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। रोगी कल्याण समिति जैसे सार्वजनिक संस्थान से जुड़े खाते से कथित तौर पर करोड़ों रुपये की निकासी की घटना यह सवाल उठाती है कि भुगतान और बैंकिंग लेनदेन की निगरानी किस स्तर पर की जा रही थी।

फिलहाल पुलिस जांच और विभागीय जांच दोनों जारी हैं। स्वास्थ्य विभाग की समिति की रिपोर्ट और गृह विभाग की समीक्षा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित वित्तीय अनियमितता में किन लोगों की भूमिका सामने आती है और डीन या संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई की आवश्यकता है या नहीं। अदालत की टिप्पणियां अंतिम दोष-निर्धारण नहीं हैं और मामले में सभी आरोप जांच के निष्कर्षों के अधीन हैं।

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