प्रयागराज: राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में करीब ₹2.66 करोड़ के सरकारी धन के कथित गबन के मामले में आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन (EOW) ने तत्कालीन प्रभारी प्रधानाचार्य जीतलाल पटेल को गिरफ्तार किया है। EOW लखनऊ की टीम ने लंबे समय से फरार चल रहे पटेल को प्रयागराज के शंकरगढ़ क्षेत्र से पकड़ा। जांच एजेंसी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2021-22 के बीच विद्यालयों में खरीद प्रक्रिया से जुड़ी गंभीर अनियमितताएं सामने आई थीं। आरोप है कि निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना अनावश्यक सामग्री की खरीद दिखाई गई और सरकारी धन का कथित रूप से दुरुपयोग किया गया।
₹2,66,03,807 के गबन का मामला
मामला राजकीय आश्रम पद्धति विद्यालयों में सरकारी धन के इस्तेमाल और खरीद प्रक्रिया में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। शुरुआती जांच में खर्च और खरीद से संबंधित रिकॉर्ड में कई विसंगतियां सामने आने के बाद मामला दर्ज किया गया था। इसके बाद इसकी विवेचना EOW को सौंपी गई।
जांच के दौरान अधिकारियों ने खरीद बिल, भुगतान रिकॉर्ड, कोटेशन, टेंडर दस्तावेज और अन्य सरकारी अभिलेखों की पड़ताल की। रिकॉर्ड की जांच के आधार पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और गबन की राशि ₹2,66,03,807 निर्धारित की गई।
खरीद प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी का आरोप
EOW की जांच के अनुसार, विद्यालयों में सामग्री खरीदने के लिए निर्धारित कोटेशन और टेंडर प्रक्रिया का कथित तौर पर पालन नहीं किया गया। जांच एजेंसी का आरोप है कि ऐसी सामग्री की खरीद भी रिकॉर्ड में दिखाई गई, जिसकी वास्तविक आवश्यकता नहीं थी। इसके आधार पर दस्तावेज तैयार किए गए और सरकारी खाते से भुगतान कराया गया।
अब एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि खरीद के समर्थन में कौन-कौन से दस्तावेज तैयार किए गए थे, सामग्री की वास्तव में आपूर्ति हुई थी या नहीं और भुगतान की रकम आखिर किन लोगों तक पहुंची। संबंधित फर्मों और खरीद प्रक्रिया में शामिल लोगों के बीच संभावित आर्थिक संबंधों की भी जांच की जा रही है।
पांच लोक सेवकों समेत 17 लोगों की भूमिका
जांच में तत्कालीन प्रभारी प्रधानाचार्य जीतलाल पटेल समेत कुल 17 लोगों की कथित भूमिका सामने आई है। इनमें पांच लोक सेवक और 12 बाहरी व्यक्ति शामिल हैं। EOW के अनुसार, इन सभी की भूमिका सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और खरीद प्रक्रिया में हुई अनियमितताओं से जुड़ी पाई गई है।
जांचकर्ता यह भी देख रहे हैं कि खरीद को अलग-अलग स्तरों पर किसने मंजूरी दी, भुगतान प्रक्रिया किस तरह आगे बढ़ी और संबंधित बिल व अन्य दस्तावेज किसके स्तर से तैयार या स्वीकृत किए गए। एजेंसी कथित गबन की रकम के अंतिम लाभार्थियों का पता लगाने का भी प्रयास कर रही है।
लंबे समय से फरार चल रहा था आरोपी
मामले में नाम सामने आने के बाद जीतलाल पटेल लंबे समय से जांच एजेंसी की पकड़ से बाहर था। EOW लखनऊ की टीम उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। शंकरगढ़ क्षेत्र में उसके मौजूद होने की सूचना मिलने के बाद टीम ने कार्रवाई की और उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तारी के बाद आरोपी से खरीद प्रक्रिया, भुगतान, कथित गबन की रकम और अन्य आरोपियों की भूमिका के संबंध में पूछताछ की जाएगी। एजेंसी उन दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी जुटाएगी, जिनके आधार पर सरकारी धन से भुगतान किए जाने का आरोप है।
बैंक खातों और वित्तीय रिकॉर्ड की जांच
EOW मामले से जुड़े वित्तीय दस्तावेजों और बैंकिंग लेनदेन की भी जांच कर रही है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कथित रूप से गबन की गई रकम का इस्तेमाल कहां किया गया और क्या उसका कोई हिस्सा अन्य आरोपियों या खरीद से जुड़ी फर्मों तक पहुंचा था।
12 बाहरी लोगों की कथित भूमिका सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ गया है। एजेंसी यह भी देख रही है कि इन लोगों ने खरीद की व्यवस्था, बिल तैयार करने, सामग्री की आपूर्ति और भुगतान प्रक्रिया में क्या भूमिका निभाई।
जीतलाल पटेल की गिरफ्तारी को मामले में महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है। EOW अब खरीद रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और अन्य आरोपियों की भूमिका की विस्तृत जांच कर रही है। आगे की जांच में कथित अनियमितताओं की पूरी प्रक्रिया, सरकारी धन के अंतिम इस्तेमाल और इस मामले में शामिल अन्य व्यक्तियों या संस्थाओं की भूमिका स्पष्ट होने की उम्मीद है।
