मुंबई: साइबर ठगी के बढ़ते मामलों के बीच मुंबई से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां 63 वर्षीय रिटायर्ड रेलवे कर्मचारी महिला को ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ₹1.49 करोड़ की ठगी का शिकार बना लिया गया। आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से पहले भरोसा जीता, फिर फर्जी मुनाफा दिखाकर लगातार निवेश करवाया और अंत में “चार्ज” व “टैक्स” के नाम पर अतिरिक्त रकम भी ऐंठ ली।
जांच के अनुसार, महिला को 26 दिसंबर को सोशल मीडिया पर एक आकर्षक विज्ञापन दिखा, जिसमें शेयर बाजार में भारी मुनाफे का दावा किया गया था। जैसे ही उन्होंने इस विज्ञापन पर क्लिक किया, उन्हें “VIP Share Trading Platform” नाम के एक WhatsApp ग्रुप में जोड़ दिया गया, जिसमें करीब 90 सदस्य मौजूद थे। इस ग्रुप में एडमिन नियमित रूप से निवेश टिप्स साझा करते थे, जबकि कई सदस्य भारी मुनाफा कमाने के स्क्रीनशॉट और दावे पोस्ट करते थे, जिससे महिला का भरोसा बढ़ता गया।
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कुछ ही समय में महिला ने निवेश में रुचि दिखाई, जिसके बाद आरोपियों ने उन्हें एक फर्जी ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा और KYC प्रक्रिया पूरी करने को कहा। इसके बाद उन्हें एक दूसरे WhatsApp ग्रुप में जोड़ा गया, जहां उन्हें विशेष निवेश निर्देश दिए जाने लगे। शुरुआत में महिला ने एक छोटी राशि निवेश की, और कुछ ही मिनटों में उनके खाते में ₹90,000 का मुनाफा दिखाया गया। यही वह मोड़ था जहां से ठगों ने उनका विश्वास पूरी तरह जीत लिया।
इसके बाद महिला को बार-बार बड़े निवेश के लिए प्रेरित किया गया। फर्जी ऐप में उनके निवेश पर लगातार भारी रिटर्न दिखाया जाता रहा, जिससे उन्हें यह भरोसा हो गया कि उनका पैसा तेजी से बढ़ रहा है। 2 मार्च तक महिला कुल 31 ट्रांजेक्शन के जरिए ₹1.05 करोड़ अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर कर चुकी थीं।
जब ऐप में उनकी बैलेंस राशि ₹7 करोड़ दिखाई गई, तब उन्होंने पैसे निकालने की कोशिश की, लेकिन निकासी संभव नहीं हो सकी। इसी दौरान ठगों ने उनसे “प्रोसेसिंग फीस” और “टैक्स” के नाम पर ₹88 लाख की मांग की। बाद में उन्हें “छूट” देकर ₹44 लाख जमा करने को कहा गया। महिला ने यह रकम भी जमा कर दी, लेकिन इसके बावजूद उन्हें एक भी रुपया वापस नहीं मिला।
ठगों ने अपनी साजिश को और विश्वसनीय बनाने के लिए भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के नाम से फर्जी दस्तावेज और रसीदें भी भेजीं, जिनमें महिला के ₹1.49 करोड़ निवेश का रिकॉर्ड दिखाया गया था। इसके बाद भी जब लगातार पैसे की मांग जारी रही, तब महिला को ठगी का एहसास हुआ और उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई।
शिकायत के आधार पर साइबर पुलिस ने अज्ञात आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, फर्जी पहचान और आपराधिक साजिश की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस अब उन बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जांच कर रही है, जिनके जरिए यह ठगी की गई।
प्रख्यात साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह के अनुसार, “इस तरह के शेयर ट्रेडिंग स्कैम पूरी तरह सोशल इंजीनियरिंग पर आधारित होते हैं। पहले पीड़ित का विश्वास जीतने के लिए फर्जी मुनाफा दिखाया जाता है, फिर धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश करवाई जाती है। WhatsApp ग्रुप में नकली यूजर्स और स्क्रीनशॉट्स के जरिए एक भ्रम का माहौल बनाया जाता है, जिससे व्यक्ति को लगता है कि वह एक सफल निवेश प्लेटफॉर्म का हिस्सा है।”
उन्होंने आगे कहा कि ऐसे मामलों में लोग लालच और भरोसे के जाल में फंस जाते हैं। “कोई भी निवेश प्लेटफॉर्म अगर बिना नियामकीय सत्यापन के केवल WhatsApp या लिंक के जरिए काम कर रहा है, तो उससे तुरंत सावधान हो जाना चाहिए। किसी भी अनजान ऐप या लिंक के जरिए निवेश करना बेहद खतरनाक हो सकता है,” उन्होंने चेतावनी दी।
फिलहाल पुलिस इस पूरे नेटवर्क के पीछे मौजूद मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस गिरोह ने और कितने लोगों को इसी तरह निशाना बनाया है।
यह मामला एक बार फिर दिखाता है कि डिजिटल निवेश के नाम पर चल रहे फर्जी प्लेटफॉर्म्स किस तरह आम लोगों की मेहनत की कमाई को निशाना बना रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता और सतर्कता ही ऐसे साइबर अपराधों से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।
