मुरादाबाद: मझोला थाना क्षेत्र में GST फ्रॉड का बड़ा मामला सामने आया है, जहां एक फर्जी स्क्रैप ट्रेडिंग फर्म बनाकर करीब ₹2.55 करोड़ की कर चोरी का आरोप लगा है। राज्य कर (GST) विभाग की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के अनुसार, आरोपी रवि, निवासी मोहल्ला खुशहालपुर गुरुद्वारा नानक दरबार गली नंबर-5, बैंक कॉलोनी ने 17 सितंबर 2022 को “MS National Traders” नाम से एक फर्म रजिस्टर्ड कराई थी। कागजों में इस फर्म को इलेक्ट्रिक एल्युमिनियम स्क्रैप, पुरानी बैटरी और अन्य स्क्रैप सामग्री के कारोबार में दिखाया गया था, लेकिन जांच में मौके पर किसी भी तरह की वास्तविक व्यापारिक गतिविधि नहीं पाई गई।
जांच में यह भी सामने आया कि फर्म ने कागजों में ₹4,10,04,059 (लगभग ₹4.10 करोड़) का टर्नओवर दिखाया था, जिसने कर विभाग को सतर्क कर दिया। इसी आधार पर विभाग ने CGST, SGST और पेनल्टी मिलाकर कुल ₹2,55,97,495 की देनदारी तय की। अधिकारियों का आरोप है कि यह पूरा टर्नओवर बिना किसी वास्तविक खरीद-बिक्री के केवल फर्जी बिलिंग के जरिए दिखाया गया था।
राज्य कर विभाग के अनुसार, आरोपी और उसके सहयोगियों ने फर्जी इनवॉइस तैयार कर इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का अवैध लाभ लिया। इन क्रेडिट्स को कथित तौर पर शेल कंपनियों के नेटवर्क के जरिए आगे पास किया गया, जिससे सरकार को भारी राजस्व नुकसान हुआ।
जांच अधिकारियों ने बताया कि मौके पर न तो कोई स्टॉक मिला, न गोदाम, न ही परिवहन या सप्लाई से जुड़े कोई रिकॉर्ड। दस्तावेजों और वास्तविक स्थिति में भारी अंतर मिलने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि फर्म केवल कागजों पर ही संचालित हो रही थी।
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राज्य कर विभाग के उपायुक्त की शिकायत पर मझोला पुलिस ने रवि और उसके अज्ञात साथियों के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और संबंधित धाराओं में केस दर्ज कर लिया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इस पूरे नेटवर्क की गहन जांच की जा रही है और अन्य सहयोगियों की पहचान करने का प्रयास जारी है।
अधिकारियों को संदेह है कि यह एक संगठित फर्जी बिलिंग नेटवर्क का हिस्सा हो सकता है, जिसमें कई डमी फर्म बनाकर सर्कुलर ट्रांजैक्शन के जरिए टर्नओवर बढ़ाया जाता है और फर्जी इनवॉइस के माध्यम से टैक्स क्रेडिट लिया जाता है। ऐसे नेटवर्क अकाउंटिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर लेनदेन को जटिल बनाते हैं ताकि असली धन प्रवाह का पता न लगाया जा सके।
फिलहाल पुलिस बैंक लेनदेन, GST फाइलिंग, डिजिटल रिकॉर्ड और इनवॉइस चैन की जांच कर रही है ताकि पूरे घोटाले की परतें खोली जा सकें। शुरुआती जांच में संकेत मिले हैं कि कई इनवॉइस बिना किसी माल की वास्तविक आपूर्ति के तैयार किए गए थे।
पुलिस का कहना है कि आरोपी रवि से फर्म की स्थापना, इनवॉइस के स्रोत और लाभार्थियों के बारे में विस्तृत पूछताछ की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि इस घोटाले का दायरा ₹2.55 करोड़ से अधिक तो नहीं है।
अधिकारियों ने कहा कि ऐसे GST घोटाले न केवल सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा भी पैदा करते हैं। मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हैं।
