₹25 लाख में तय होती थी किडनी डील; नेपाल से लाए जाते थे डोनर, बिना अनुमति चल रहा था ट्रांसप्लांट रैकेट

“अस्पताल की आड़ में किडनी का काला कारोबार: फरार डॉक्टर, देशभर में फैला नेटवर्क”

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By Roopa
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मोहाली। पंजाब के मोहाली में एक निजी अस्पताल की आड़ में चल रहे अवैध किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट का बड़ा खुलासा हुआ है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जांच में सामने आया है कि एक किडनी का सौदा ₹25 लाख में तय किया जाता था और इस पूरे नेटवर्क की जड़ें देश के कई राज्यों के साथ-साथ नेपाल तक फैली हुई थीं। डोनर को नेपाल से बुलाकर मोहाली में अवैध तरीके से ट्रांसप्लांट किया जाता था।

यह पूरा मामला सुख सेवा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल से जुड़ा है, जहां बिना वैध सरकारी अनुमति के किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे थे। पुलिस की छापेमारी के दौरान अस्पताल में एक सर्जरी अंतिम चरण में थी, लेकिन कार्रवाई की भनक लगते ही मुख्य आरोपी डॉक्टर मनप्रीत कौर मौके से फरार हो गई। फिलहाल उसकी तलाश के लिए लगातार दबिश दी जा रही है।

इस मामले में पुलिस ने गुजरात निवासी महेंद्र कुमार मनसुखभाई पटेल और राजस्थान निवासी राकेश कुमार नानमा को गिरफ्तार किया है। दोनों को अस्पताल में ‘अटेंडेंट’ के रूप में रखा गया था, लेकिन जांच में उनकी भूमिका संदिग्ध पाई गई। पुलिस का कहना है कि ये दोनों आरोपी मरीजों की देखरेख के बहाने पूरे नेटवर्क के संचालन में मदद कर रहे थे। उन्हें दो दिन के रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है, जिससे और अहम जानकारी मिलने की उम्मीद है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, यह रैकेट बेहद संगठित तरीके से संचालित हो रहा था। मरीजों और डोनर के बीच सीधा संपर्क नहीं होता था। डोनर को पहले से तय कर नेपाल से बुलाया जाता था और अस्पताल में लाकर रिसीवर से मिलवाया जाता था। जांच में यह भी सामने आया है कि नेपाल निवासी डोनर आशीष थमन को ऑपरेशन से महज तीन दिन पहले भारत लाया गया था और उसकी रिसीवर वरिंदरपाल से पहली मुलाकात अस्पताल में ही कराई गई थी।

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छापेमारी के दौरान दोनों को गंभीर हालत में पीजीआई में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज जारी है। अभी तक उनके बयान दर्ज नहीं हो सके हैं, लेकिन उनकी गवाही इस पूरे नेटवर्क की सच्चाई उजागर करने में अहम साबित हो सकती है।

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि जिस अस्पताल में यह अवैध गतिविधियां चल रही थीं, उसका पहले भी रिकॉर्ड संदिग्ध रहा है। वर्ष 2023 में एसके अस्पताल का रजिस्ट्रेशन रद्द होने के बाद उसे बंद कर दिया गया था। इसके बावजूद आरोपियों ने नए नाम से सुख सेवा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल खोलकर उसी तरह की गैरकानूनी गतिविधियां फिर से शुरू कर दीं।

अधिकारियों का कहना है कि इस रैकेट में फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर कानूनी प्रक्रियाओं को दरकिनार किया जा रहा था। किडनी ट्रांसप्लांट जैसे संवेदनशील ऑपरेशन के लिए आवश्यक सरकारी अनुमतियां और मेडिकल जांच प्रक्रियाएं पूरी तरह से नजरअंदाज की गईं। इससे मरीजों और डोनर दोनों की जान जोखिम में डाली जा रही थी।

पूरे मामले की गहराई से जांच के लिए विशेष जांच टीम (एसआईटी) का गठन किया गया है। यह टीम अब नेटवर्क के हर पहलू की जांच कर रही है, जिसमें पैसों के लेन-देन, डोनर की व्यवस्था, फर्जी दस्तावेजों का उपयोग और इसमें शामिल अन्य लोगों की भूमिका शामिल है। अधिकारियों को आशंका है कि यह नेटवर्क केवल मोहाली तक सीमित नहीं, बल्कि अन्य राज्यों और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैला हो सकता है।

फिलहाल, पुलिस मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और इस पूरे नेटवर्क के विस्तार को उजागर करने पर फोकस कर रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है, जो देश में चल रहे अवैध अंग तस्करी के नेटवर्क की गंभीरता को सामने ला सकते हैं।

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