Meta से जुड़े अमेरिकी मामलों ने AI-based advertising systems, Section 230 immunity और securities fraud liability पर नई कानूनी बहस छेड़ दी है।

AI विज्ञापन पर कानूनी शिकंजा: मेटा केस से बिग टेक कंपनियों पर सिक्योरिटीज फ्रॉड का खतरा बढ़ा

Team The420
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अमेरिका में हाल ही में आए कई अदालत फैसलों ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर AI आधारित विज्ञापन सिस्टम के इस्तेमाल को लेकर कानूनी जांच को और तेज कर दिया है। इन मामलों के बाद यह सवाल गंभीर रूप से उठ रहा है कि क्या Meta Platforms Inc. जैसी कंपनियां अपने नेटवर्क के जरिए प्रसारित फर्जी निवेश कंटेंट के लिए सिक्योरिटीज फ्रॉड के तहत जिम्मेदार ठहराई जा सकती हैं।

यह पूरा मामला Northern District of California की अदालतों में चल रहे मुकदमों से जुड़ा है, जहां यह जांच की जा रही है कि डिजिटल विज्ञापन में इस्तेमाल होने वाले AI टूल केवल थर्ड-पार्टी कंटेंट को वितरित करते हैं या फिर वे खुद कंटेंट के निर्माण और संरचना में सक्रिय भूमिका निभाते हैं। यही अंतर अब यह तय करने में महत्वपूर्ण माना जा रहा है कि कंपनियां Section 230 के तहत कानूनी सुरक्षा का लाभ ले सकती हैं या नहीं।

पंप-एंड-डंप स्कीम के गंभीर आरोप

मामला तब और गंभीर हो गया जब मेटा से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों में “पंप-एंड-डंप” स्कीम के जरिए पेननी स्टॉक्स में निवेश धोखाधड़ी के आरोप सामने आए। आरोप है कि फर्जी विज्ञापनों के माध्यम से निवेशकों को गुमराह किया गया और उन्हें निजी मैसेजिंग ग्रुप्स में ले जाकर आगे ठगी की गई। कई मामलों में दावा किया गया कि कुछ स्टॉक्स की कीमत कुछ ही मिनटों में लगभग 90% तक गिर गई, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ।

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Suddeth v. Meta Platforms Inc. मामला

Suddeth v. Meta Platforms Inc. में आरोप लगाया गया कि मेटा के विज्ञापन एल्गोरिद्म और मशीन-लर्निंग सिस्टम ने फर्जी निवेश कंटेंट को अधिक लोगों तक पहुंचाने में भूमिका निभाई। हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि केवल एल्गोरिदमिक टार्गेटिंग को कंटेंट निर्माण नहीं माना जा सकता। इसे “content neutral” यानी निष्पक्ष तकनीकी प्रक्रिया माना गया, जो केवल वितरण और सुविधा प्रदान करती है, न कि कंटेंट तैयार करती है।

Bouck v. Meta Platforms Inc. में नया मोड़

इसके विपरीत Bouck v. Meta Platforms Inc. मामले में अदालत ने यह संभावना स्वीकार की कि यदि जनरेटिव AI टूल्स खुद विज्ञापन की सामग्री तैयार करते हैं या उसे महत्वपूर्ण रूप से संरचित करते हैं, तो यह Section 230 की सुरक्षा के दायरे से बाहर हो सकता है। यह एक महत्वपूर्ण कानूनी मोड़ माना जा रहा है क्योंकि इससे यह तय हो सकता है कि प्लेटफॉर्म केवल माध्यम हैं या फिर कंटेंट के सह-निर्माता भी।

Forrest v. Meta Platforms Inc. और “Material Contribution” सिद्धांत

एक अन्य मामले Forrest v. Meta Platforms Inc. में अदालत ने संकेत दिया कि ऐसे AI सिस्टम जो टेक्स्ट, इमेज और मल्टीमीडिया को मिलाकर विज्ञापन को स्वतः ऑप्टिमाइज़ करते हैं, वे केवल वितरणकर्ता नहीं बल्कि कंटेंट निर्माण में सक्रिय भागीदार भी हो सकते हैं। अब अदालतें इस बात पर ध्यान दे रही हैं कि क्या प्लेटफॉर्म “material contribution” यानी अवैध कंटेंट के निर्माण में वास्तविक योगदान दे रहे हैं या नहीं।

कानूनी दायरे का संभावित विस्तार

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह बदलाव केवल इंटरनेट प्लेटफॉर्म कानून तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह अमेरिकी सिक्योरिटीज कानून को भी प्रभावित कर सकता है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के Janus Capital Group Inc. v. First Derivative Traders फैसले का हवाला देते हुए कहा जा रहा है कि किसी बयान का “maker” वही माना जाता है जिसके पास उसकी सामग्री और संचार पर अंतिम नियंत्रण होता है।

अगर अदालतें यह मान लेती हैं कि सोशल मीडिया कंपनियों के AI सिस्टम निवेश विज्ञापनों की भाषा, संरचना और प्रस्तुति को नियंत्रित कर रहे हैं, तो उन्हें Rule 10b-5 के तहत सीधे सिक्योरिटीज फ्रॉड के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इस स्थिति में Section 230 की सुरक्षा लागू नहीं होगी।

बिग टेक कंपनियों पर बढ़ता जोखिम

यह जोखिम केवल Meta तक सीमित नहीं है। Alphabet Inc., Snap Inc., TikTok Inc. और X Corp. जैसी बड़ी टेक कंपनियां भी AI आधारित विज्ञापन तकनीकों का व्यापक उपयोग करती हैं। ऐसे में यदि अदालतें यही कानूनी दृष्टिकोण अपनाती हैं, तो इन सभी कंपनियों पर भी समान जोखिम उत्पन्न हो सकता है।

SEC की संभावित भूमिका

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी Securities and Exchange Commission (SEC) अब तक मुख्य रूप से व्यक्तिगत धोखेबाजों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स पर कार्रवाई करता रहा है। लेकिन यदि अदालतें यह मानती हैं कि प्लेटफॉर्म स्वयं धोखाधड़ी में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, तो इन कंपनियों को अनरजिस्टर्ड ब्रोकर-डीलर के रूप में भी जांच का सामना करना पड़ सकता है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर यह मामला एक बड़े सवाल को सामने लाता है—क्या सोशल मीडिया कंपनियां केवल कंटेंट होस्ट कर रही हैं या फिर AI के जरिए उसे खुद भी बना और नियंत्रित कर रही हैं। आने वाले समय में इन मामलों के फैसले डिजिटल विज्ञापन, AI टेक्नोलॉजी और निवेश कानूनों की दिशा तय कर सकते हैं और टेक कंपनियों की कानूनी जिम्मेदारी को पूरी तरह बदल सकते हैं

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