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“₹50 लाख का फर्जीवाड़ा: लघु सिंचाई विभाग में जमानत राशि घोटाले से हड़कंप”

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By Roopa
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मेरठ। लघु सिंचाई विभाग की भूजल संवर्धन योजना के तहत तालाबों के जीर्णोद्धार कार्यों में बड़ा वित्तीय घोटाला सामने आने से प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है। प्रारंभिक जांच रिपोर्ट के आधार पर आरोपी ठेका फर्म और उसके प्रोपराइटर समेत अन्य के खिलाफ देहली गेट थाना क्षेत्र में एफआईआर दर्ज कराई गई है। आरोप है कि फर्जी एफडीआर (फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद) के जरिए करीब ₹50 लाख की जमानत राशि में हेराफेरी की गई।

विभागीय जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में विभिन्न ग्रामों में तालाबों के जीर्णोद्धार के लिए ई-टेंडर प्रक्रिया अपनाई गई थी। इसमें बागपत के चमरावल क्षेत्र स्थित टिया कंस्ट्रक्शन्स के प्रोपराइटर सुधीर त्यागी को न्यूनतम दर पर कार्य आवंटित किया गया था। टेंडर शर्तों के अनुसार फर्म को जमानत राशि एफडीआर के रूप में जमा करनी थी। प्रारंभिक स्तर पर इंडियन बैंक से इन दस्तावेजों की पुष्टि भी प्राप्त हुई थी, जिसके बाद इन्हें वैध माना गया।

हालांकि, जब एफडीआर को भुनाने की प्रक्रिया शुरू की गई तो पूरे मामले में गंभीर अनियमितताएं सामने आने लगीं। जांच में पाया गया कि कुल 24 एफडीआर में से 23 केवल फोटोकॉपी के रूप में कार्यालय में जमा थीं, जबकि केवल एक ही एफडीआर मूल दस्तावेज के रूप में उपलब्ध थी। इस खुलासे के बाद विभागीय स्तर पर अफरा-तफरी मच गई।

जांच समिति की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि तीन एफडीआर ऐसे थे जो संबंधित एक्सईएन के नाम से जारी ही नहीं हुए थे। बैंक की ओर से ई-मेल के जरिए सत्यापन का दावा किया गया था, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में ऐसे किसी ई-मेल का कोई प्रमाण नहीं मिला। इससे बैंकिंग सत्यापन प्रक्रिया और दस्तावेजों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

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मामले में एक और बड़ी लापरवाही 13 जनवरी 2026 को सामने आई, जब आरोपी की ओर से कथित तौर पर 10 एफडीआर कार्यालय में लाकर लेखा अनुभाग में छोड़ दी गईं। लेकिन इन दस्तावेजों को न तो विधिवत डायरी में दर्ज किया गया और न ही डिस्पैच रजिस्टर में उनका कोई रिकॉर्ड बनाया गया। इस गंभीर चूक ने पूरे प्रकरण को और संदिग्ध बना दिया है।

जांच में यह भी आशंका जताई जा रही है कि इस पूरे मामले में विभागीय स्तर पर कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, इसकी विस्तृत जांच अभी जारी है और सभी दस्तावेजों की फॉरेंसिक एवं बैंकिंग स्तर पर सत्यापन प्रक्रिया चल रही है।

लघु सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता (एक्सईएन) हरिओम के अनुसार प्रारंभिक जांच में अनियमितताएं गंभीर पाई गईं, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज कराई गई है। उन्होंने बताया कि विभागीय स्तर पर सभी टेंडर और जमानत दस्तावेजों की पुनः जांच कराई जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क की सच्चाई सामने आ सके।

मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप की स्थिति बनी हुई है और उच्च स्तर पर भी इसकी रिपोर्ट भेज दी गई है। प्रशासनिक गलियारों में चर्चा तेज है कि यदि यह घोटाला समय रहते उजागर नहीं होता, तो सरकारी धन की बड़ी राशि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर निकाली जा सकती थी।

फिलहाल जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि फर्जी एफडीआर तैयार करने का पूरा नेटवर्क कैसे संचालित हो रहा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका शामिल रही है। विभागीय कार्रवाई आगे बढ़ने के साथ ही इस घोटाले में और बड़े खुलासों की संभावना जताई जा रही है।

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