नई रणनीति के तहत मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क, डिजिटल फ्रॉड और ड्रग ट्रैफिकिंग पर सख्त निगरानी; 94% कंविक्शन रेट के साथ एजेंसी ने बढ़ाई कार्रवाई की रफ्तार

“ED का बड़ा ऐलान: आतंक फंडिंग, क्रिप्टो फ्रॉड और साइबर अपराध अब एजेंसी के टॉप फोकस में”

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By Roopa
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नई दिल्ली। देश में आर्थिक अपराधों और डिजिटल वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों के बीच प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। अब एजेंसी का मुख्य फोकस आतंक फंडिंग, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े फ्रॉड, साइबर अपराध और नशीले पदार्थों की तस्करी पर केंद्रित हो गया है। ED के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, बदलते अपराध पैटर्न को देखते हुए जांच एजेंसी ने अपनी प्राथमिकताओं को नए सिरे से तय किया है।

एजेंसी के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में बैंकिंग फ्रॉड और रियल एस्टेट घोटालों में कमी दर्ज की गई है। इसका प्रमुख कारण Insolvency and Bankruptcy Code (IBC) और Real Estate Regulation and Development Act (RERA) जैसे कानूनों का सख्ती से लागू होना माना जा रहा है। इन कानूनों ने वित्तीय अनियमितताओं को काफी हद तक नियंत्रित किया है, जिससे जांच एजेंसी का ध्यान अब नए और जटिल साइबर आधारित अपराधों की ओर गया है।

ED के डायरेक्टर के अनुसार, वित्त वर्ष 2025–26 में एजेंसी ने 812 चार्जशीट और 155 सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की हैं, जो पिछले समान अवधि की तुलना में लगभग दोगुनी हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि एजेंसी ने न केवल मामलों की जांच में तेजी लाई है, बल्कि अभियोजन प्रक्रिया को भी मजबूत किया है।

एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि उसका कंविक्शन रेट 94 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो आर्थिक अपराधों की जांच में उसकी प्रभावशीलता को दर्शाता है। ED के अनुसार, वर्तमान में लगभग 2,400 मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामले विभिन्न अदालतों में लंबित हैं और एजेंसी को उम्मीद है कि इनमें से अधिकांश मामलों में दोषसिद्धि संभव होगी।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ED अब तक वित्तीय धोखाधड़ी के पीड़ितों को बड़ी राहत भी दे चुकी है। एजेंसी ने अब तक 63,142 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियों को पीड़ितों—जैसे होमबायर्स, निवेशकों और बैंकों—को वापस लौटाया है। यह कार्रवाई मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराधों पर सख्त रुख का संकेत देती है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि क्रिप्टोकरेंसी और डिजिटल ट्रांजैक्शन के बढ़ते उपयोग ने अपराधियों के लिए नए रास्ते खोल दिए हैं। इसी कारण ED अब उन मामलों पर विशेष ध्यान दे रही है, जिनमें डिजिटल करेंसी, ऑनलाइन ट्रांजैक्शन और सीमापार वित्तीय लेन-देन शामिल हैं। आतंक फंडिंग के मामलों में भी डिजिटल प्लेटफॉर्म का उपयोग बढ़ने से जांच एजेंसियों के लिए चुनौती बढ़ी है।

सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने अपनी जांच प्रणाली को और तकनीकी रूप से मजबूत किया है, जिसमें डेटा एनालिटिक्स, डिजिटल ट्रैकिंग और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय नेटवर्क की निगरानी शामिल है। इससे संदिग्ध लेन-देन और फंड ट्रांसफर को तेजी से ट्रेस किया जा सकेगा।

ED के अनुसार, नशीले पदार्थों की तस्करी भी अब एक बड़े वित्तीय नेटवर्क के रूप में उभर रही है, जिसमें हवाला और क्रिप्टो ट्रांजैक्शन का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसी वजह से एजेंसी ने ड्रग्स और मनी लॉन्ड्रिंग को एक साथ जोड़कर जांच का दायरा बढ़ा दिया है।

आर्थिक अपराधों के विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार के साथ ऐसे मामलों में और तेजी देखने को मिल सकती है। क्रिप्टो एसेट्स की निगरानी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग ED की जांच रणनीति का अहम हिस्सा बनता जा रहा है।

इस बीच, एजेंसी ने संकेत दिए हैं कि भविष्य में जांच प्रक्रिया को और तेज और तकनीक आधारित बनाया जाएगा ताकि अपराधियों को वित्तीय सिस्टम का दुरुपयोग करने से रोका जा सके।

कुल मिलाकर, ED की यह नई रणनीति यह स्पष्ट करती है कि भारत में आर्थिक अपराधों के खिलाफ लड़ाई अब एक नए चरण में प्रवेश कर चुकी है, जहां तकनीक, डेटा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जांच का मुख्य आधार बनते जा रहे हैं।

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