कानपुर में फर्जी पुलिस और क्राइम ब्रांच अधिकारी बनकर ठगी करने वाले साइबर गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ किया है।

नौकरी के नाम पर ₹2.90 लाख की कथित साइबर ठगी: फर्जी भर्ती एजेंट बनकर इंजीनियर को बनाया शिकार

Team The420
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कर्नाटक के मंगलुरु में एक 28 वर्षीय मैकेनिकल इंजीनियरिंग स्नातक कथित नौकरी दिलाने के नाम पर ₹2.90 लाख की साइबर ठगी का शिकार हो गया। आरोप है कि ठगों ने खुद को एक बहुराष्ट्रीय विनिर्माण कंपनी के भर्ती एजेंट के रूप में पेश किया और विभिन्न शुल्कों के नाम पर उससे लगातार पैसे वसूलते रहे।

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, पीड़ित 27 मई को अपने घर पर था, तभी उसे एक फोन आया। कॉल करने वाले ने अपना नाम प्रवीण बताते हुए दावा किया कि वह एक जॉब एजेंसी से जुड़ा है और बेंगलुरु के होसकोटे स्थित कंपनी यूनिट में मैकेनिकल प्रोडक्शन इंजीनियर के पद के लिए भर्ती की जा रही है।

शिकायत के अनुसार, नौकरी के प्रस्ताव पर विश्वास करते हुए पीड़ित ने इंटरव्यू फीस के रूप में ₹2,000 आरोपी द्वारा बताए गए बैंक खाते में जमा कर दिए। 29 मई को उसे ईमेल के जरिए वीडियो इंटरव्यू का लिंक भेजा गया और इंटरव्यू के बाद 1 जून को उसे चयनित होने की सूचना दी गई।

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इसके बाद आरोपियों ने प्रोसेसिंग शुल्क के नाम पर ₹20,000 जमा कराने को कहा, जिसे पीड़ित ने ट्रांसफर कर दिया। 6 जून को गेट पास शुल्क के नाम पर ₹27,600 और 13 जून को मेडिकल परीक्षण के लिए ₹40,000 की मांग की गई। शिकायत के अनुसार, पीड़ित ने ये दोनों रकम भी अलग-अलग बैंक खातों में जमा कर दी।

15 जून से 25 जून के बीच आरोपी विभिन्न बहानों से लगातार और पैसे मांगते रहे। पीड़ित ने निर्देशानुसार कई बार भुगतान किया। 26 जून को जब उसने भर्ती प्रक्रिया की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी, तो उससे फिर अतिरिक्त भुगतान करने के लिए कहा गया।

इसके बाद पीड़ित ने भर्ती प्रक्रिया रद्द करने की इच्छा जताई। शिकायत के अनुसार, अगले दिन आरोपियों ने रद्दीकरण शुल्क के नाम पर भी ₹15,579 जमा करा लिए और भरोसा दिलाया कि पूरी राशि वापस कर दी जाएगी। हालांकि, न तो नौकरी दी गई और न ही जमा की गई रकम लौटाई गई।

अपने साथ धोखाधड़ी का एहसास होने पर पीड़ित ने पहले राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई और बाद में मंगलुरु के कंकनाडी टाउन पुलिस थाने में औपचारिक शिकायत दी।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जांच में बैंक खातों, कॉल रिकॉर्ड, ईमेल संचार और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की पड़ताल की जा रही है ताकि आरोपियों की पहचान कर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। मामले में लगाए गए आरोपों पर अंतिम निर्णय न्यायालय में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।

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