महाराष्ट्र शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) पेपर लीक मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों को पंजाब के पठानकोट और बिहार के समस्तीपुर से पकड़ा गया। इन गिरफ्तारियों के साथ मामले में अब तक कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि कथित मास्टरमाइंड अभी भी फरार है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कपिल दहिया, मिथुनकुमार सुबलाल सिंह और सोनूकुमार कुश्वेश्वर सिंह के रूप में हुई है। अदालत ने तीनों को 9 जुलाई तक पुलिस हिरासत में भेज दिया है।
जांच के अनुसार, कपिल दहिया का नाम शुरुआती प्राथमिकी (FIR) में भी शामिल था। आरोप है कि वह पिछले सप्ताह मुंबई पहुंचे उन चार लोगों में शामिल था, जो कथित तौर पर लीक TET प्रश्नपत्र बेचने आए थे। पुलिस ने जाल बिछाकर उसके एक सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन कपिल वहां से फरार होकर पहले पुणे पहुंचा और बाद में महाराष्ट्र से बाहर चला गया। जांच में सामने आया कि उसने जांच एजेंसियों से बचने के लिए हवाई टिकट ‘Kapil Kapil’ नाम से बुक कराया था।
SIT के अनुसार, कपिल दहिया कथित मास्टरमाइंड बिजेंद्र कुमार गुप्ता के संपर्क में था। आरोप है कि बिजेंद्र ने ही कपिल की पुणे यात्रा की व्यवस्था की थी, जहां कथित तौर पर लीक प्रश्नपत्र बेचने की योजना बनाई गई थी।
जांच एजेंसियों ने बिहार के समस्तीपुर निवासी मिथुनकुमार सुबलाल सिंह को भी गिरफ्तार किया है। आरोप है कि वह पुणे पहुंचकर प्रश्नपत्र बेचने और परीक्षार्थियों को उत्तर उपलब्ध कराने में सहयोग कर रहा था।
तीसरे आरोपी सोनूकुमार कुश्वेश्वर सिंह पर समस्तीपुर में संचालित अपने फोटोशॉप सेंटर के माध्यम से कथित मास्टरमाइंड बिजेंद्र कुमार गुप्ता के लिए फर्जी पहचान दस्तावेज तैयार करने का आरोप है। जांच के अनुसार, इन्हीं दस्तावेजों की मदद से बिजेंद्र फरार होने में सफल रहा। आरोप यह भी है कि सोनूकुमार ने अपने केंद्र पर कथित रूप से लीक प्रश्नपत्रों की प्रतियां तैयार करने में भी सहायता की।
SIT अब फरार मास्टरमाइंड की तलाश तेज कर चुकी है। जांच में डिजिटल उपकरणों, संचार रिकॉर्ड, यात्रा विवरण, वित्तीय लेनदेन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है ताकि पूरे नेटवर्क और इसमें शामिल अन्य व्यक्तियों की पहचान की जा सके।
Algoritha Security के एक शोधकर्ता ने कहा कि परीक्षा संबंधी संगठित अपराधों में डिजिटल संचार, फर्जी पहचान दस्तावेज और प्रिंटिंग सुविधाओं का दुरुपयोग लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए सुरक्षित डिजिटल दस्तावेज सत्यापन, परीक्षा सामग्री की एंड-टू-एंड सुरक्षा, संवेदनशील प्रिंटिंग प्रक्रियाओं की निगरानी और संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों की समय रहते पहचान करना अत्यंत आवश्यक है।
