मद्रास हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 के चर्चित अवैध गुटखा बिक्री मामले में बड़ा निर्देश देते हुए चेन्नई की सांसद-विधायक मामलों की विशेष अदालत को 12 सप्ताह (तीन महीने) के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करने का आदेश दिया है। यह मामला पूर्व मंत्रियों, पूर्व पुलिस महानिदेशकों (DGP) सहित कुल 27 आरोपियों के खिलाफ लंबित है।
हाईकोर्ट ने यह आदेश पूर्व डीजीपी एस. जॉर्ज द्वारा दायर याचिका को खारिज करते हुए दिया। याचिका में उन्होंने मांग की थी कि केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) जिन सभी अभियोजन गवाहों को अदालत में पेश करना चाहती है, उनके बयान की प्रतियां उन्हें उपलब्ध कराई जाएं। उन्होंने यह भी अनुरोध किया था कि जिन गवाहों के बयान उपलब्ध नहीं कराए गए हैं, उन्हें अभियोजन पक्ष की ओर से पेश करने की अनुमति न दी जाए।
इससे पहले विशेष अदालत ने 17 दिसंबर 2025 को उनकी इस मांग को अस्वीकार कर दिया था, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि जांच एजेंसी ने दंड प्रक्रिया संहिता की संबंधित व्यवस्था के तहत सभी 278 गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए थे। जिन लगभग 150 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे, उनकी प्रतियां पहले ही आरोपियों को उपलब्ध करा दी गई थीं।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि शेष लगभग 120 गवाहों के बयान इसलिए दर्ज नहीं किए गए क्योंकि उनका उद्देश्य केवल आरोपपत्र के साथ संलग्न दस्तावेजों की औपचारिक पुष्टि करना था और वे किसी अतिरिक्त तथ्य पर बयान देने वाले नहीं थे।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार तभी प्रभावित माना जा सकता है जब अभियोजन द्वारा रिकॉर्ड किए गए बयानों की प्रतियां आरोपी को उपलब्ध न कराई जाएं। यदि अभियोजन किसी गवाह का बयान दर्ज नहीं करना चाहता, तो आरोपी उसे ऐसा करने के लिए बाध्य नहीं कर सकता।
अदालत ने माना कि विशेष अदालत द्वारा याचिकाकर्ता की मांग को खारिज करने में कोई कानूनी त्रुटि नहीं थी। हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि आरोपी चाहे तो इस मुद्दे को ट्रायल के दौरान अपने बचाव के रूप में कानून के अनुरूप उठा सकता है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने विशेष अदालत को निर्देश दिया कि आदेश की प्रति प्राप्त होने की तिथि से 12 सप्ताह के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी कर निर्णय सुनाया जाए।
यह मामला वर्ष 2016 में उस समय सामने आया था जब आयकर विभाग ने कर चोरी की जांच के दौरान एक निजी उद्योग समूह पर छापेमारी की थी। कार्रवाई के दौरान मिले दस्तावेजों से तमिलनाडु में प्रतिबंधित गुटखा के कथित निर्माण, वितरण और बिक्री से जुड़े वित्तीय एवं अन्य रिकॉर्ड सामने आए थे। इसके बाद मामले की जांच आगे बढ़ी और बाद में CBI ने जांच अपने हाथ में लेकर आरोपपत्र दाखिल किया।
मामले में पूर्व मंत्रियों, पूर्व वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और अन्य आरोपियों के खिलाफ लंबे समय से न्यायिक प्रक्रिया चल रही है। हाईकोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब विशेष अदालत को निर्धारित समयसीमा के भीतर ट्रायल पूरा कर मामले का निस्तारण करना होगा।
