लुधियाना: उत्तर प्रदेश और पंजाब से जुड़े एक बड़े GST फर्जी बिलिंग नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें एक ही आधार नंबर पर अलग-अलग फोटो का इस्तेमाल कर कथित तौर पर फर्जी कंपनियां बनाई गईं और करीब ₹90.25 करोड़ की नकली बिलिंग कर सरकार को करोड़ों रुपये का नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया गया। जांच में सामने आया है कि लगभग दस वर्ष पहले विदेश भेजने का झांसा देकर एक युवक का आधार कार्ड लिया गया था, जिसके आधार पर बाद में उसकी पहचान का दुरुपयोग कर यह पूरा नेटवर्क खड़ा किया गया। मामले की जांच उत्तर प्रदेश राज्य कर विभाग और पुलिस कर रही है।
जांच के अनुसार, वाराणसी के चेतगंज थाने में राज्य कर विभाग के अधिकारी की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया। जांच के दौरान एम/एस सोहन एंटरप्राइजेज नामक कंपनी संदिग्ध पाई गई, जिसे कागजों में वैध दिखाया गया था। कंपनी का GST पंजीकरण वाराणसी के लहुराबीर स्थित एक पते पर कराया गया था और दस्तावेजों में बिजनौर निवासी सोहन कुमार को उसका मालिक दर्शाया गया था।
जब कर विभाग की टीम अप्रैल 2025 में दिए गए पते पर जांच के लिए पहुंची तो वहां कोई कार्यालय या व्यावसायिक गतिविधि नहीं मिली। जांच में पता चला कि किरायानामा कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों के आधार पर तैयार किया गया था। न वहां कोई माल मिला और न ही कर्मचारी। अधिकारियों के अनुसार, कंपनी केवल कागजों पर संचालित की जा रही थी और वास्तविक खरीद-बिक्री का कोई रिकॉर्ड नहीं था।
आरोप है कि इसी कंपनी के माध्यम से बिना किसी वास्तविक वस्तु या सेवा की आपूर्ति के लगभग ₹90.25 करोड़ के फर्जी GST बिल जारी किए गए। इन बिलों के आधार पर करीब ₹2.70 करोड़ के इनपुट टैक्स क्रेडिट और टैक्स रिफंड का दावा किया गया। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि अधिकांश फर्जी बिल पंजाब के लुधियाना, खन्ना और मंडी गोबिंदगढ़ क्षेत्र की कंपनियों के नाम पर बनाए गए। अब यह जांच की जा रही है कि संबंधित कंपनियां वास्तविक हैं या केवल कागजी अस्तित्व रखती हैं।
डिजिटल जांच के दौरान पुलिस ने फर्जी बिलिंग में इस्तेमाल किए गए IP एड्रेस को ट्रेस किया, जो लुधियाना के चेत सिंह नगर स्थित एक किराए के मकान तक पहुंचे। जांच में पता चला कि मकान पहले एक व्यक्ति ने किराए पर लिया था और बाद में नियमों का उल्लंघन करते हुए उसे किसी अन्य व्यक्ति को दे दिया गया। इसी पते से कथित रूप से फर्जी बिलिंग नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
Registration Begins for FutureCrime Summit 2026, India’s Largest Cybercrime Conference
जांच का सबसे चौंकाने वाला पहलू आधार कार्ड से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, किरायानामा जिस आधार कार्ड के आधार पर तैयार किया गया, उस पर नाम और आधार संख्या वास्तविक व्यक्ति की थी, लेकिन फोटो किसी अन्य व्यक्ति की लगी हुई थी। जगराओं निवासी वास्तविक आधार धारक ने पुलिस को बताया कि लगभग दस वर्ष पहले कुछ लोगों ने विदेश भेजने का झांसा देकर उसके सहित करीब 50 युवकों के आधार कार्ड लिए थे और बदले में ₹10,000 दिए थे। अगले दिन आधार कार्ड वापस कर दिए गए थे। उसे संदेह है कि उसी समय उसके आधार कार्ड का दुरुपयोग करने के लिए उसकी डिजिटल कॉपी तैयार कर ली गई थी।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जुटाने के लिए अदालत से तलाशी वारंट प्राप्त किया था। हालांकि, तलाशी से पहले सत्र न्यायालय से वारंट पर स्थगन आदेश मिल गया। अदालत ने मामले की पूरी फाइल तलब करते हुए पुलिस को अगली सुनवाई के लिए नोटिस जारी किया है। इसी बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि वास्तविक आधार धारक का इस पूरे मामले से कोई संबंध नहीं है, तो अदालत में याचिका दाखिल करने वाला व्यक्ति कौन था।
प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ एवं पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह का कहना है कि पहचान संबंधी दस्तावेजों का दुरुपयोग आज संगठित आर्थिक अपराधों का बड़ा माध्यम बन चुका है। उनके अनुसार, आधार, पैन और अन्य दस्तावेजों की डिजिटल प्रतियों का इस्तेमाल कर फर्जी कंपनियां बनाना, GST पंजीकरण लेना और नकली बिलिंग करना बेहद गंभीर आर्थिक अपराध है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपने पहचान पत्रों की प्रतियां बिना सत्यापन के किसी को नहीं देनी चाहिए तथा यदि दस्तावेजों के दुरुपयोग की आशंका हो तो तत्काल संबंधित विभागों और पुलिस को सूचित करना चाहिए।
फिलहाल जांच एजेंसियां फर्जी कंपनियों के वास्तविक संचालकों, डिजिटल साक्ष्यों, बैंक खातों, वित्तीय लेनदेन और पूरे नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई से देशभर में फैले एक बड़े फर्जी GST बिलिंग सिंडिकेट का और बड़ा खुलासा हो सकता है।
