व्हाट्सएप निवेश स्कीम और इंश्योरेंस मैच्यूरिटी का झांसा देकर जालसाजों ने कई चरणों में रकम ट्रांसफर कराई

शेयर ट्रेडिंग और पॉलिसी क्लेम के नाम पर 1.94 करोड़ की साइबर ठगी: रिटायर कमिश्नर और शिक्षिका बने शिकार

Team The420
4 Min Read

शेयर ट्रेडिंग में निवेश पर भारी मुनाफे और इंश्योरेंस पॉलिसी की मैच्यूरिटी दिलाने का झांसा देकर साइबर ठगों ने एक रिटायर कमिश्नर और शिक्षिका सहित दो लोगों से कुल 1.94 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी कर ली। मामले में पीड़ितों की शिकायत के बाद साइबर पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और ठगों के नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।

शिक्षिका को व्हाट्सएप निवेश स्कैम

पुलिस के अनुसार चिनहट क्षेत्र की निवासी शिक्षिका गीता को नवंबर 2025 में व्हाट्सएप पर एक संदेश प्राप्त हुआ, जिसमें निवेश योजना के माध्यम से आकर्षक मुनाफे का दावा किया गया था। जालसाजों ने खुद को एक निवेश कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए नाका सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड में धन लगाने पर निश्चित लाभ देने का भरोसा दिलाया।

पीड़िता को लगातार ऑनलाइन बातचीत के जरिए विश्वास में लिया गया और अलग-अलग तारीखों पर निवेश के नाम पर धन ट्रांसफर कराया गया। 10 नवंबर 2025 से 24 फरवरी 2026 के बीच शिक्षिका से 18 किस्तों में कुल 1,67,50,000 रुपये अलग-अलग बैंक खातों में भेजवाए गए।

FCRF Launches Flagship Certified Fraud Investigator (CFI) Program

रिटायर्ड कमिश्नर को इंश्योरेंस क्लेम जाल

इसी तरह राजाजीपुरम के सी-ब्लॉक निवासी वंदना सेंसिल ने बताया कि उनके पिता राजेंद्र कुमार केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क विभाग से कमिश्नर पद से सेवानिवृत्त हैं। उनके पिता की मैक्स लाइफ इंश्योरेंस में कई पॉलिसियां चल रही थीं। कुछ समय पहले पिता ने ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पर पॉलिसी से जुड़े क्लेम के संबंध में आवेदन भी किया था।

इसी का फायदा उठाते हुए जालसाजों ने खुद को इंश्योरेंस विभाग का अधिकारी बताकर संपर्क किया और दावा किया कि मल्टीपल पॉलिसी की मैच्यूरिटी राशि करीब 1.30 करोड़ रुपये है। क्लेम प्रक्रिया पूरी करने के नाम पर स्टांप ड्यूटी, सर्विस चार्ज और अन्य शुल्कों का हवाला देकर पीड़ित परिवार से कई चरणों में 26,43,407 रुपये ट्रांसफर करा लिए गए।

सोशल इंजीनियरिंग और पुलिस जांच

पुलिस जांच में सामने आया है कि साइबर अपराधियों ने सोशल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल करते हुए पहले पीड़ितों का विश्वास जीता और फिर धनराशि ट्रांसफर कराने की रणनीति अपनाई। जालसाजों ने ऑनलाइन निवेश और पॉलिसी क्लेम के नाम पर लगातार संपर्क बनाए रखा, जिससे पीड़ितों को वास्तविक स्थिति का अंदाजा नहीं लग सका।

साइबर पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों में अपराधी अक्सर फर्जी कंपनियों और नकली पहचान का इस्तेमाल करते हैं। ठगी की रकम को तुरंत कई खातों में ट्रांसफर कर दिया जाता है ताकि धन का पता लगाना कठिन हो जाए। पुलिस बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन के रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

सावधानियां और जागरूकता अपील

जांच एजेंसियों ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान व्यक्ति के कहने पर बैंक विवरण, ओटीपी, पिन, पासवर्ड या सीवीवी जैसी संवेदनशील जानकारी साझा न करें। ऑनलाइन निवेश या पॉलिसी क्लेम के नाम पर आने वाले ऑफर की प्रामाणिकता की पुष्टि संबंधित कंपनी या अधिकृत पोर्टल से ही करें।

साइबर पुलिस ने यह भी सलाह दी है कि संदिग्ध कॉल, व्हाट्सएप मैसेज या लिंक पर तुरंत प्रतिक्रिया देने के बजाय पहले सत्यापन किया जाए। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल ठगी के मामलों में जागरूकता ही सबसे प्रभावी सुरक्षा उपाय है। मामले की जांच जारी है।

हमसे जुड़ें

Share This Article