लखनऊ। राजधानी लखनऊ में निजी अस्पतालों के पंजीकरण और दस्तावेज सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला एक मामला सामने आया है। बहराइच के एक आयुर्वेदिक चिकित्सक ने आरोप लगाया है कि उनकी बीएएमएस डिग्री और पंजीकरण संबंधी दस्तावेजों का उपयोग लखनऊ के 10 अलग-अलग निजी अस्पतालों में किया गया है। चौंकाने वाली बात यह है कि संबंधित चिकित्सक को इसकी जानकारी तब मिली जब उनके दस्तावेजों की जांच जनहित पोर्टल पर की गई। मामले की शिकायत मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) कार्यालय में शपथ पत्र के साथ दर्ज कराई जा चुकी है, लेकिन शिकायत के कई दिन बाद भी कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आने से सवाल उठने लगे हैं।
जानकारी के अनुसार, बहराइच निवासी डॉ. वीरेंद्र कुमार बीएएमएस चिकित्सक हैं और उनका पंजीकरण संख्या 43181 है। एक जून को वह किसी प्रशासनिक कार्य से बहराइच स्थित सीएमओ कार्यालय पहुंचे थे। वहां नर्सिंग होम से जुड़े दस्तावेजों की ऑनलाइन जांच के दौरान जनहित पोर्टल पर ऐसा खुलासा हुआ जिसने उन्हें भी हैरान कर दिया। पोर्टल पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, लखनऊ के 10 अलग-अलग अस्पतालों में उनके शैक्षणिक दस्तावेज और पंजीकरण संबंधी विवरण दर्ज पाए गए।
डॉ. वीरेंद्र कुमार का कहना है कि उन्होंने कभी भी इन अस्पतालों में चिकित्सकीय सेवाएं नहीं दीं और न ही किसी अस्पताल को अपने दस्तावेज उपयोग करने की अनुमति दी। ऐसे में उनके नाम और डिग्री का इस्तेमाल किस प्रकार हुआ, यह अपने आप में गंभीर जांच का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके दस्तावेजों का उपयोग किसी अन्य व्यक्ति को डॉक्टर के रूप में प्रदर्शित करने या अस्पतालों के पंजीकरण संबंधी औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए किया गया हो सकता है।
मामले की जानकारी मिलते ही डॉ. वीरेंद्र कुमार ने लखनऊ के सीएमओ को शपथ पत्र के साथ लिखित शिकायत सौंपकर पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच की मांग की। उन्होंने दोषियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई किए जाने का अनुरोध भी किया है। हालांकि शिकायत दर्ज होने के लगभग एक सप्ताह बाद भी जांच की दिशा में कोई स्पष्ट प्रगति सामने नहीं आने से शिकायतकर्ता ने नाराजगी जताई है।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पिछले कुछ वर्षों में निजी अस्पतालों और क्लीनिकों के पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और डिजिटल बनाने के लिए जनहित पोर्टल जैसी व्यवस्थाएं लागू की गई थीं। इसके बावजूद यदि किसी चिकित्सक के दस्तावेज कई अस्पतालों में बिना जानकारी या अनुमति के इस्तेमाल हो रहे हैं, तो यह दस्तावेज सत्यापन प्रणाली की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े करता है।
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, लखनऊ में एक हजार से अधिक निजी अस्पताल और क्लीनिक संचालित हैं, जिनका पंजीकरण और नवीनीकरण ऑनलाइन प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। पहले अस्पतालों के पंजीकरण में आयुर्वेद और यूनानी चिकित्सा पद्धति से जुड़े चिकित्सकों की डिग्री भी मान्य मानी जाती थी। लेकिन लगभग एक वर्ष पहले नियमों में बदलाव करते हुए अस्पताल पंजीकरण के लिए एमबीबीएस चिकित्सक की योग्यता को अनिवार्य कर दिया गया।
ऐसे में बीएएमएस चिकित्सक की डिग्री से जुड़े दस्तावेज यदि अब भी किसी अस्पताल के रिकॉर्ड में उपयोग हो रहे हैं, तो यह केवल तकनीकी त्रुटि नहीं बल्कि संभावित दस्तावेजी हेराफेरी या गलत प्रस्तुतीकरण का मामला भी हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो इससे मरीजों की सुरक्षा, चिकित्सा मानकों और नियामकीय निगरानी पर भी असर पड़ सकता है।
नर्सिंग होम के नोडल अधिकारी डॉ. एपी सिंह ने कहा कि संबंधित चिकित्सक बीएएमएस विधा के हैं और वर्तमान नियमों के अनुसार अस्पताल के पंजीकरण में उनकी डिग्री मान्य नहीं होगी। उनके अनुसार, संभावना है कि अस्पतालों ने किसी अन्य चिकित्सक के स्थान पर उनका विवरण जोड़ दिया हो। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और तथ्यों की पड़ताल की जा रही है।
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग की जांच पर सभी की नजरें टिकी हैं। यदि शिकायत में लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला केवल दस्तावेजों के दुरुपयोग तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि निजी अस्पतालों के पंजीकरण और सत्यापन व्यवस्था में मौजूद संभावित खामियों को भी उजागर कर सकता है।
