लखनऊ पुलिस के एक सिपाही, जिसने पुलिस लाइन के वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगाए थे, को विभागीय जांच के बाद सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि आरोपों के समर्थन में कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिले और सिपाही ने सेवा आचरण नियमों तथा सोशल मीडिया नीति का उल्लंघन किया।
लखनऊ में तैनात सिपाही सुनील कुमार शुक्ला को पुलिस लाइन के वरिष्ठ अधिकारियों पर भ्रष्टाचार और अवैध वसूली के आरोप लगाने के बाद विभागीय कार्रवाई के तहत सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। सुनील कुमार शुक्ला ने आरोप लगाया था कि ड्यूटी लगाने के नाम पर पुलिसकर्मियों से प्रति जवान ₹2,000 की वसूली की जाती है। इन आरोपों के सामने आने के बाद पुलिस विभाग में व्यापक चर्चा शुरू हो गई थी।
छुट्टी पर जाने के बाद जारी एक वीडियो में शुक्ला ने दावा किया था कि पुलिस लाइन के गणना प्रभारी, रिजर्व इंस्पेक्टर (आरआई) और अन्य वरिष्ठ अधिकारी ड्यूटी आवंटन के नाम पर प्रत्येक सिपाही से ₹2,000 की वसूली करते हैं। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग ने मामले की जांच शुरू की।
सुनील कुमार शुक्ला मूल रूप से अमेठी जिले के गौरीगंज के निवासी हैं। उनकी पत्नी भी पुलिस विभाग में सिपाही हैं और वर्तमान में रायबरेली में तैनात हैं।
लखनऊ पुलिस के आधिकारिक बयान के अनुसार, शुक्ला ने 7 मई 2026 को वीडियो जारी किया था। आरोपों की गंभीरता को देखते हुए एडीसीपी (पश्चिम) धनंजय सिंह कुशवाहा की अध्यक्षता में एक विभागीय जांच समिति गठित की गई, जिसने पूरे मामले की जांच की।
जांच समिति ने संबंधित पुलिसकर्मियों के बयान दर्ज किए और सुनील कुमार शुक्ला को भी अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया। हालांकि, जांच रिपोर्ट के अनुसार वह अपने आरोपों के समर्थन में कोई दस्तावेजी या अन्य विश्वसनीय साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके।
विभागीय जांच में उन्हें कई प्रकार की अनुशासनहीनता और सेवा नियमों के उल्लंघन का दोषी पाया गया। इनमें बिना अनुमति सोशल मीडिया का उपयोग करना, वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध सार्वजनिक रूप से निराधार आरोप लगाना, बिना साक्ष्य विभाग की छवि धूमिल करने का प्रयास करना, पुलिस बल में अनुशासनहीनता को बढ़ावा देना तथा अधिकारियों के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग करना शामिल है।
अधिकारियों के अनुसार, उनके कृत्य उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया नीति-2023, उत्तर प्रदेश सरकारी सेवक आचरण नियमावली, 1956 के नियम 3, 6, 7 और 27 तथा उत्तर प्रदेश वर्दी विनियम के उल्लंघन की श्रेणी में पाए गए। जांच रिपोर्ट और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर विभाग ने उन्हें सेवा से बर्खास्त करने का निर्णय लिया।
बर्खास्तगी के बाद सुनील कुमार शुक्ला ने एक और वीडियो जारी किया, जिसमें उन्होंने कहा कि उन्हें पुलिस विभाग के अधिकारियों से कोई व्यक्तिगत शिकायत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें पहले से ही इस तरह की विभागीय कार्रवाई की आशंका थी।
वीडियो में उन्होंने कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि मेरा पहले निलंबन होगा, फिर बर्खास्तगी होगी। आने वाले समय में मेरे खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो सकती है। मैं इतना कहना चाहता हूं कि मैं ऐसा कोई काम नहीं करूंगा, जिससे समाज के लोगों को किसी प्रकार की परेशानी या नुकसान हो।”
उन्होंने अपने बयान में सरकार की भी आलोचना की। वहीं, विभागीय जांच पूरी होने के बाद उनकी सेवा समाप्त कर दी गई।
