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₹5 करोड़ का लोन दिलाने का झांसा: लखनऊ में कारोबारी से ₹5 लाख की ठगी, तीन आरोपी रडार पर

Team The420
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राजधानी में बड़े लोन का सपना दिखाकर ठगी का एक और मामला सामने आया है। गोमती नगर निवासी कारोबारी शैलेंद्र कुमार सिंह से ₹5 करोड़ का लोन दिलाने के नाम पर ₹5 लाख हड़प लिए गए। रकम ट्रांसफर होते ही आरोपी ने संपर्क तोड़ दिया। पीड़ित की तहरीर पर केस दर्ज कर आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है।

पीड़ित शैलेंद्र कुमार सिंह, अवध अपार्टमेंट, गोमती नगर के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया कि उनकी पहचान पहले से आलोक दीवान से थी। एक मार्च को आलोक दीवान ने उनकी कंपनी के नाम पर कम ब्याज दर पर ₹5 करोड़ का लोन दिलाने का प्रस्ताव रखा। भरोसा जीतने के लिए उसने बैंकिंग प्रक्रिया, स्वीकृति समय-सीमा और कथित फाइनेंसर के नाम का हवाला दिया।

आलोक दीवान ने लोन स्वीकृति से पहले 1% प्रोसेसिंग फीस की मांग की। उसने कहा कि यह रकम जमा होते ही लोन फाइल ‘फाइनल अप्रूवल’ के लिए आगे बढ़ा दी जाएगी। कारोबारी ने कंपनी के खाते से आरोपी द्वारा बताए गए बैंक खाते में ₹5 लाख ट्रांसफर कर दिए। लेनदेन की पुष्टि के बाद आरोपी ने व्हाट्सएप पर लोन से जुड़े कुछ दस्तावेज भी भेजे, जिनमें कथित स्वीकृति पत्र और शर्तें शामिल थीं।

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रकम मिलने के कुछ ही घंटे बाद आरोपी का व्यवहार बदल गया। कॉल का जवाब मिलना बंद हो गया और संदेशों का कोई उत्तर नहीं आया। दो मार्च को जब पीड़ित ने लगातार संपर्क की कोशिश की तो नंबर स्विच ऑफ मिला। संदेह गहराने पर बैंकिंग विवरण की जांच की गई, तब ठगी का एहसास हुआ।

पीड़ित का आरोप है कि इस साजिश में आलोक दीवान के साथ केपी सिंह और कुणाल भी शामिल थे। तीनों ने मिलकर प्रोसेसिंग फीस के नाम पर रकम ऐंठी और फर्जी दस्तावेज भेजकर भरोसा दिलाया। मामले में दर्ज रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों के बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और डिजिटल ट्रेल की जांच शुरू कर दी गई है।

प्राथमिक जांच में सामने आया है कि जिस खाते में ₹5 लाख ट्रांसफर हुए, वह हाल में खोला गया था और उसमें सीमित लेनदेन के बाद रकम आगे ट्रांसफर कर दी गई। तकनीकी विश्लेषण के जरिए धनराशि की आवाजाही और संभावित लाभार्थियों की पहचान की जा रही है। सर्विलांस के माध्यम से आलोक दीवान की लोकेशन ट्रेस करने का प्रयास जारी है।

विशेषज्ञों का कहना है कि बड़े लोन की पेशकश, कम ब्याज दर और ‘तुरंत स्वीकृति’ जैसे दावे अक्सर जालसाजी के संकेत होते हैं। ठग प्रोसेसिंग फीस, फाइल चार्ज या स्टांप ड्यूटी के नाम पर अग्रिम रकम मांगते हैं और भुगतान मिलते ही गायब हो जाते हैं। कारोबारी और स्टार्टअप संचालकों को ऐसे प्रस्तावों की स्वतंत्र पुष्टि करने, आधिकारिक ईमेल डोमेन की जांच करने और बैंकिंग विवरण की सत्यता परखने की सलाह दी जाती है।

शहर में हाल के महीनों में लोन दिलाने के नाम पर ठगी के कई मामले सामने आए हैं। डिजिटल प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप के जरिए संपर्क कर ठग पहले परिचय और भरोसा बनाते हैं, फिर सीमित दस्तावेज दिखाकर अग्रिम राशि की मांग करते हैं।

मामले में नामजद आरोपी आलोक दीवान, केपी सिंह और कुणाल की तलाश में दबिश दी जा रही है। पीड़ित से बैंक स्टेटमेंट और ट्रांजैक्शन आईडी सहित अन्य दस्तावेज मांगे गए हैं ताकि धनराशि की रिकवरी की दिशा में कार्रवाई की जा सके।

राजधानी में कारोबारी समुदाय के बीच इस घटना ने चिंता बढ़ा दी है। जानकारों का कहना है कि किसी भी वित्तीय प्रस्ताव पर आगे बढ़ने से पहले संबंधित बैंक या एनबीएफसी से सीधे संपर्क कर सत्यापन करना जरूरी है। फिलहाल, जांच की दिशा डिजिटल साक्ष्यों और बैंकिंग ट्रेल पर केंद्रित है, और आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

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