“कपिल देव से अमिताभ बच्चन तक कई बड़े चेहरे कटघरे में; अदालत बोली—जनस्वास्थ्य से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं”

“गुटखा विज्ञापनों पर हाईकोर्ट की सख्ती: ‘सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट’ पर उठे बड़े सवाल, प्राधिकरण पर ₹5500 का जुर्माना”

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By Roopa
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लखनऊ। गुटखा और पान मसाला कंपनियों के विज्ञापनों में नामचीन हस्तियों की भागीदारी को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण की ओर से समय पर जवाब दाखिल न किए जाने पर ₹5500 का हर्जाना लगाया है और इसे याचिकाकर्ता को देने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि सार्वजनिक हित से जुड़े मामलों में लापरवाही किसी भी सूरत में स्वीकार नहीं की जाएगी।

न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ल की खंडपीठ के समक्ष सुनवाई के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया कि गुटखा जैसे उत्पादों के प्रचार में शामिल बड़े चेहरे समाज में क्या संदेश दे रहे हैं। याचिका में कहा गया है कि इन विज्ञापनों का असर खासकर युवाओं पर पड़ता है, जिससे वे तंबाकू उत्पादों की ओर आकर्षित होते हैं। अदालत ने इस पहलू को गंभीर मानते हुए प्राधिकरण से जवाब तलब किया था, लेकिन निर्धारित समयसीमा के बावजूद ठोस जवाब दाखिल नहीं किया गया।

याचिका में जिन हस्तियों को पक्षकार बनाया गया है, उनमें क्रिकेट जगत के दिग्गज Kapil Dev, Sunil Gavaskar, Virender Sehwag और Chris Gayle शामिल हैं। वहीं फिल्म जगत से Amitabh Bachchan, Shah Rukh Khan, Akshay Kumar, Ajay Devgn, Salman Khan, Hrithik Roshan, Tiger Shroff, Saif Ali Khan और Ranveer Singh जैसे बड़े नाम शामिल हैं।

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याचिका में यह तर्क दिया गया है कि इन हस्तियों में से कई राष्ट्रीय सम्मान जैसे पद्म पुरस्कार से सम्मानित हैं, जिससे उनकी विश्वसनीयता और प्रभाव काफी अधिक है। ऐसे में जब वे गुटखा और पान मसाला जैसे उत्पादों का प्रचार करते हैं, तो यह आम लोगों को गुमराह करता है और स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही को बढ़ावा देता है। याचिकाकर्ता ने इसे उपभोक्ता संरक्षण कानूनों का उल्लंघन बताते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है।

अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि उपभोक्ता संरक्षण कानून केवल व्यापारिक गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए नहीं, बल्कि समाज के व्यापक हितों की रक्षा के लिए बनाए गए हैं। यदि विज्ञापनों के माध्यम से भ्रामक या हानिकारक संदेश प्रसारित किए जा रहे हैं, तो संबंधित सभी पक्षों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है। अदालत ने इस संदर्भ में प्राधिकरण की निष्क्रियता पर नाराजगी जताई और आर्थिक दंड लगाया।

सुनवाई के दौरान प्राधिकरण की ओर से यह दलील दी गई कि जवाबी हलफनामा तैयार किया जा रहा है और जल्द दाखिल किया जाएगा, लेकिन अदालत इस स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं हुई। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब मामला जनस्वास्थ्य और सामाजिक प्रभाव से जुड़ा हो, तो देरी और टालमटोल को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

इस पूरे मामले ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि क्या सेलिब्रिटी एंडोर्समेंट पर सख्त नियमों की जरूरत है, खासकर तब जब बात तंबाकू जैसे हानिकारक उत्पादों की हो। हाईकोर्ट की सख्ती ने यह संकेत दे दिया है कि आने वाले समय में न केवल कंपनियां, बल्कि उनके प्रचार से जुड़े चेहरे भी कानूनी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

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