लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने बैंक में नौकरी दिलाने का झांसा देकर ठगी करने वाले एक फर्जी कॉल सेंटर का पर्दाफाश करते हुए तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने उनके कब्जे से फर्जी नियुक्ति पत्र, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, डेबिट कार्ड और ठगी में इस्तेमाल होने वाला अन्य सामान बरामद किया है।
रोजगार के नाम पर हो रही साइबर ठगी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए लखनऊ पुलिस की क्राइम ब्रांच और साइबर सेल ने एक ऐसे फर्जी कॉल सेंटर का भंडाफोड़ किया है, जो बैंक में नौकरी दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से ठगी करता था।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान हरदोई के पिहानी निवासी बलराम तिवारी, अमेठी के गौरीगंज निवासी शैलेश कुमार और देवरिया के तरकुलवा निवासी नीतेश शर्मा के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार बलराम तिवारी इस फर्जी कॉल सेंटर का मैनेजर था, जबकि शैलेश कुमार और नीतेश शर्मा कॉलर के रूप में काम करते थे।
जांच में सामने आया कि आरोपी लखनऊ के विभूतिखंड क्षेत्र में साईं टावर के पास स्थित एक परिसर से इस फर्जी कॉल सेंटर का संचालन कर रहे थे।
पुलिस ने कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से 12 मोबाइल फोन, 213 फर्जी जॉब एग्रीमेंट, फर्जी जॉइनिंग और कन्फर्मेशन लेटर, अभ्यर्थियों की डेटा शीट, रजिस्ट्रेशन दस्तावेज, एक कार, 14 सिम कार्ड, 10 डेबिट कार्ड, दो पासबुक, एक चेकबुक और दो हस्ताक्षरित चेकबुक बरामद की हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इन सभी का इस्तेमाल कथित ठगी में किया जा रहा था।
प्रारंभिक जांच के अनुसार बलराम तिवारी पिछले करीब आठ महीने से इस कॉल सेंटर का संचालन कर रहा था। संभावित शिकार तलाशने के लिए आरोपी ऑनलाइन रोजगार प्लेटफॉर्म से नौकरी तलाश रहे लोगों का डेटा खरीदते थे। पुलिस के अनुसार यह डेटा लगभग ₹1.65 प्रति रिकॉर्ड की दर से खरीदा जाता था।
डेटा हासिल करने के बाद कॉल सेंटर के कर्मचारी बेरोजगार युवाओं से संपर्क कर उन्हें विभिन्न बैंकों में नौकरी दिलाने का झांसा देते थे। इच्छुक अभ्यर्थियों को कॉल सेंटर बुलाकर उनका औपचारिक इंटरव्यू लिया जाता था, जिससे पूरी प्रक्रिया वास्तविक भर्ती जैसी प्रतीत हो।
इसके बाद उम्मीदवारों को चयनित होने की जानकारी देकर संबंधित बैंक के नाम से फर्जी जॉइनिंग लेटर और कन्फर्मेशन लेटर सौंपे जाते थे। इन दस्तावेजों के बदले उनसे प्रोसेसिंग या डॉक्यूमेंटेशन शुल्क के नाम पर ₹4,000 वसूले जाते थे।
पुलिस के अनुसार आरोपियों ने रकम जानबूझकर कम रखी थी ताकि यदि किसी अभ्यर्थी को संदेह हो जाए तो उसकी राशि वापस कर मामले को वहीं समाप्त किया जा सके और बड़े स्तर पर शिकायत दर्ज होने से बचा जा सके।
इस गिरोह का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित ने आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। शिकायत की जांच के दौरान साइबर सेल ने फर्जी कॉल सेंटर तक पहुंच बनाई और छापेमारी कर तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
एल्गोरिथा सिक्योरिटी के एक रिसर्चर ने कहा कि रोजगार से जुड़ी साइबर ठगी में अपराधी अब ऑनलाइन जॉब पोर्टल से प्राप्त या खरीदे गए डेटा का इस्तेमाल कर बेरोजगार युवाओं को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने सलाह दी कि नौकरी का कोई भी प्रस्ताव स्वीकार करने से पहले उम्मीदवार संबंधित संस्था की आधिकारिक वेबसाइट से उसकी पुष्टि करें और नियुक्ति या भर्ती के नाम पर किसी भी प्रकार का शुल्क जमा करने से बचें।
