“स्कूल ड्रेस सप्लाई के 1.33 करोड़ रुपये बकाया मामले में गैरहाजिरी पर कार्रवाई; 19 मई को अगली सुनवाई तय”

“मानवाधिकार आयोग की सख्ती: लखनऊ बीएसए पर 50 हजार का जमानती वारंट, सरकारी भुगतान विवाद से बढ़ी मुश्किलें”

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By Roopa
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने लखनऊ के बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए 50 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया है। यह कार्रवाई एक लंबे समय से लंबित स्कूल ड्रेस सप्लाई भुगतान विवाद में सुनवाई के दौरान अनुपस्थिति के चलते की गई है। आयोग ने पुलिस कमिश्नर लखनऊ के माध्यम से वारंट जारी करने के निर्देश दिए हैं।

मामला लखनऊ और बहराइच जिलों में स्कूलों को ड्रेस आपूर्ति से जुड़ा है, जिसमें एक संस्था को पिछले कई वर्षों से भुगतान नहीं मिला है। शिकायतकर्ता संस्था का कहना है कि वर्ष 2019-20 और 2020-21 के दौरान मोहनलालगंज, चिनहट और बहराइच के रिसिया ब्लॉक में स्कूल ड्रेस की आपूर्ति की गई थी, लेकिन इसके एवज में लगभग 1.33 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक लंबित है।

संस्था के अध्यक्ष विजय पांडेय ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि लगातार पत्राचार और अनुरोध के बावजूद भुगतान नहीं किया गया, जिससे संस्था गंभीर आर्थिक संकट में आ गई है। आयोग ने मामले का संज्ञान लेते हुए दोनों जिलों के बेसिक शिक्षा अधिकारियों को सुनवाई में उपस्थित होने का निर्देश दिया था।

आयोग के अनुसार, 15 मार्च को जारी आदेश में स्पष्ट किया गया था कि 16 अप्रैल को सुनवाई में दोनों बीएसए को उपस्थित होना अनिवार्य है। लेकिन सुनवाई के दौरान लखनऊ के बीएसए उपस्थित नहीं हुए, जबकि उन्हें पहले से सूचना दी गई थी। दूसरी ओर बहराइच के बीएसए अवकाश पर होने की जानकारी दी गई, हालांकि उनके प्रतिनिधि सुनवाई में मौजूद रहे।

सुनवाई के दौरान आयोग के समक्ष शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से उपस्थित प्रतिनिधियों ने बताया कि भुगतान में देरी के कारण संस्था की वित्तीय स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। उनका कहना है कि सप्लाई पूरी होने और दस्तावेजों के सत्यापन के बावजूद भुगतान रोकना अनुचित है। इस पर आयोग ने सख्त टिप्पणी करते हुए संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए आयोग ने लखनऊ बीएसए की अनुपस्थिति को अनुशासनहीनता मानते हुए 50 हजार रुपये का जमानती वारंट जारी करने का आदेश दिया। साथ ही निर्देश दिया गया कि पुलिस कमिश्नर लखनऊ यह सुनिश्चित करें कि वारंट की तामील समय पर हो।

आयोग ने आगे यह भी निर्देश दिया है कि बहराइच और लखनऊ दोनों जिलों के बीएसए अगली सुनवाई में अनिवार्य रूप से उपस्थित हों। साथ ही आवेदक संस्था को निर्देश दिया गया है कि वह दोनों जिलों के स्कूलों की सूची और बकाया राशि का पूरा विवरण सात दिनों के भीतर प्रस्तुत करे, ताकि वसूली की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके।

इस पूरे मामले में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। लंबे समय से लंबित भुगतान और अधिकारियों की अनुपस्थिति को लेकर प्रशासनिक लापरवाही की चर्चा तेज हो गई है। वहीं, शिकायतकर्ता संस्था ने उम्मीद जताई है कि आयोग के हस्तक्षेप के बाद अब मामले का जल्द समाधान होगा।

उधर, विभागीय स्तर पर भी मामले की समीक्षा शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि भुगतान प्रक्रिया और रिकॉर्ड की जांच की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट किया जा सके कि देरी किन कारणों से हुई।

मामले की अगली सुनवाई 19 मई 2026 को निर्धारित की गई है, जिसमें दोनों जिलों के बीएसए की उपस्थिति अनिवार्य होगी। आयोग ने साफ संकेत दिया है कि भविष्य में अनुपस्थिति या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और आवश्यकतानुसार और भी सख्त कदम उठाए जा सकते हैं।

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