तेहरान हमले में शहीद अयातुल्लाह अली खामेनेई: ईरान में 40 दिन राष्ट्रीय शोक घोषित।

अमेरिकी-इजरायली हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत, 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित

Team The420
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पश्चिम एशिया में हालात अचानक विस्फोटक मोड़ पर पहुंच गए हैं। ईरान की सरकारी मीडिया ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि देश के सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हवाई हमले में मौत हो गई। घटना के बाद ईरान सरकार ने 40 दिनों के राष्ट्रीय शोक और सात दिनों के सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है। राजधानी तेहरान समेत कई शहरों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है।

सरकारी प्रसारण में बताया गया कि 28 फरवरी की सुबह तेहरान स्थित सुप्रीम लीडर के आवासीय और आधिकारिक परिसर को निशाना बनाकर सटीक बमबारी की गई। प्रारंभिक घंटों में ईरानी अधिकारियों ने हमले और मौत की खबरों का खंडन किया, लेकिन बाद में आधिकारिक एजेंसियों ने 86 वर्षीय खामेनेई के “शहीद” होने की पुष्टि कर दी। इजरायली अधिकारियों के हवाले से दावा किया गया है कि मलबे से उनका शव बरामद किया गया।

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे “निर्णायक संयुक्त अभियान” बताया। उन्होंने कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य ईरान की सैन्य क्षमताओं और शीर्ष नेतृत्व को निष्क्रिय करना था। दूसरी ओर, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी बयान जारी कर कहा कि अभियान अपने लक्ष्य में सफल रहा। दोनों नेताओं के बयानों के बाद क्षेत्रीय समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं।

हमले के बाद भी तेहरान में तनाव कम नहीं हुआ है। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, कई सैन्य ठिकानों और रणनीतिक परिसरों के आसपास गतिविधियां बढ़ी हुई हैं। ईरानी संसद के कुछ सदस्यों ने इसे “खुले युद्ध की कार्रवाई” बताया है। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में राजधानी के विभिन्न इलाकों में धुएं के गुबार और आपातकालीन वाहनों की आवाजाही देखी गई।

खामेनेई 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता थे और देश की विदेश नीति, रक्षा और रणनीतिक फैसलों पर उनका निर्णायक प्रभाव रहा। उनके नेतृत्व में ईरान ने परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय गठबंधनों और पश्चिमी देशों के साथ टकराव की नीति को आगे बढ़ाया। उनकी मौत ऐसे समय हुई है जब पहले से ही अमेरिका-ईरान संबंध तनावपूर्ण थे और गाजा संघर्ष के बाद इजरायल-ईरान टकराव तीखा हो चुका था।

हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ने अपने आधिकारिक संदेश में कहा कि “यह ईरानी जनता के लिए नया अध्याय शुरू करने का क्षण है।” उन्होंने यह भी संकेत दिया कि क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई तब तक जारी रह सकती है जब तक “स्थायी शांति” का लक्ष्य हासिल नहीं हो जाता। इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ा दी है। रूस और चीन ने संयम बरतने की अपील की है, जबकि यूरोपीय देशों ने स्थिति पर करीबी नजर रखने की बात कही है।

ईरान में राजनीतिक उत्तराधिकार को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि सत्ता संरचना में बड़ा फेरबदल संभव है। गार्ड्स कमांड और धार्मिक परिषदों की आपात बैठकें बुलाई गई हैं। बाजारों में अनिश्चितता का माहौल है और तेल की कीमतों में उछाल देखा जा रहा है।

पश्चिम एशिया की इस नाटकीय घटना ने वैश्विक कूटनीति को नए मोड़ पर ला खड़ा किया है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि यह कार्रवाई सीमित सैन्य अभियान साबित होती है या व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष की प्रस्तावना बनती है। फिलहाल ईरान शोक और आक्रोश के दौर से गुजर रहा है, जबकि दुनिया की निगाहें तेहरान, वाशिंगटन और तेल अवीव पर टिकी हैं।

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