महाराष्ट्र के चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल ने पॉलीग्राफी (लाई डिटेक्टर) टेस्ट कराने के लिए अपनी लिखित सहमति दे दी है। पुलिस का मानना है कि इस प्रक्रिया से मामले से जुड़े कई ऐसे प्रश्नों पर नई जानकारी मिल सकती है, जिनकी अब तक स्पष्ट पुष्टि नहीं हो सकी है। हालांकि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगा।
जानकारी के अनुसार, सिया गोयल ने गुरुवार को लोनावाला ग्रामीण पुलिस को पॉलीग्राफी टेस्ट के लिए लिखित सहमति सौंप दी। उनके अधिवक्ता ने बताया कि भारतीय कानून के तहत किसी भी आरोपी का पॉलीग्राफी टेस्ट उसकी स्वैच्छिक सहमति के बिना नहीं कराया जा सकता। इसी कारण पहले आरोपी की लिखित मंजूरी प्राप्त की गई है।
पुलिस अब आवश्यक न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद पॉलीग्राफी टेस्ट कराने की तैयारी कर रही है। जांच अधिकारियों का कहना है कि टेस्ट के दौरान पूछे जाने वाले प्रश्नों और उससे प्राप्त होने वाली जानकारी के आधार पर जांच को नई दिशा मिल सकती है। हालांकि पॉलीग्राफी टेस्ट के परिणाम अपने आप में अंतिम साक्ष्य नहीं माने जाते और उनका मूल्यांकन अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के साथ किया जाता है।
अधिकारियों के अनुसार, जांच टीम अब तक मामले से जुड़े कई डिजिटल, इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक साक्ष्य एकत्र कर चुकी है। इसके अलावा मुख्य आरोपियों सहित कई अन्य व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा चुकी है। पुलिस घटनाक्रम की प्रत्येक कड़ी को जोड़कर पूरे मामले की वास्तविक परिस्थितियों का पता लगाने का प्रयास कर रही है।
जांच एजेंसियों का मानना है कि यदि पॉलीग्राफी टेस्ट विधिसम्मत तरीके से संपन्न होता है तो इससे घटनाक्रम, कथित भूमिका और अन्य महत्वपूर्ण तथ्यों के संबंध में जांच को अतिरिक्त संकेत मिल सकते हैं। हालांकि किसी भी व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण केवल उपलब्ध साक्ष्यों और न्यायालय की प्रक्रिया के आधार पर ही होगा।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में पॉलीग्राफी टेस्ट केवल संबंधित व्यक्ति की स्वतंत्र और स्वैच्छिक सहमति से ही कराया जा सकता है। इसके परिणामों का उपयोग जांच में सहायक सामग्री के रूप में किया जा सकता है, लेकिन इन्हें अकेले निर्णायक साक्ष्य नहीं माना जाता।
फिलहाल पुलिस मामले की विस्तृत जांच जारी रखे हुए है। अधिकारियों का कहना है कि पॉलीग्राफी टेस्ट, डिजिटल साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध प्रमाणों के समग्र विश्लेषण के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
