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PSC भर्ती घोटाले के आरोपों पर सियासी घमासान: उच्चस्तरीय जांच की मांग, मंत्री ने उठाए गंभीर सवाल

Team The420
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केरल में राज्य योजना बोर्ड से जुड़े कथित भर्ती घोटाले के आरोपों को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। राज्य के खेल एवं युवा मामलों के मंत्री ओ. जे. जनीश ने आरोप लगाया है कि राज्य लोक सेवा आयोग (PSC) का वर्तमान नेतृत्व कथित भर्ती अनियमितताओं की व्यापक जांच को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए पुलिस महानिदेशक (DGP) स्तर के अधिकारी के नेतृत्व में उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।

मंत्री ने मीडिया से बातचीत में कहा कि कथित भर्ती अनियमितताओं के सामने आने के बाद PSC ने प्रारंभिक स्तर पर केवल आंतरिक सतर्कता जांच कराई, जिसे उन्होंने पर्याप्त नहीं बताया। उनका आरोप है कि बाद में मामले की जांच नियंत्रक परीक्षा (Controller of Examinations) को सौंप दी गई, जिससे व्यापक और स्वतंत्र जांच की संभावना प्रभावित हुई। उन्होंने कहा कि यदि नियंत्रक परीक्षा की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं, तो ऐसे में उसी अधिकारी को जांच सौंपना जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

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मंत्री ने कहा कि यदि नियंत्रक परीक्षा से जुड़े आरोपों में कोई सच्चाई है, तो यह स्थिति ऐसी होगी मानो “चोर को ही तिजोरी की चाबी सौंप दी गई हो।” उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामले में स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच ही जनता तथा नौकरी के अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल कर सकती है।

ओ. जे. जनीश ने बताया कि उन्होंने राज्य युवा कांग्रेस अध्यक्ष के रूप में मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर इस पूरे मामले की DGP रैंक के अधिकारी से जांच कराने का अनुरोध किया है। उनका कहना है कि कथित भर्ती अनियमितताओं के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच आवश्यक है ताकि यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन हुआ है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान की जा सके।

मंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि पिछले लगभग दस वर्षों के दौरान PSC में कथित रूप से बैकडोर नियुक्तियां होती रही हैं, जिससे इस संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता प्रभावित हुई है। उनके अनुसार यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह केवल प्रशासनिक अनियमितता नहीं बल्कि गंभीर आपराधिक मामला होगा और कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई अधिकारी, कर्मचारी या अन्य व्यक्ति दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही, यदि किसी व्यक्ति ने कथित रूप से अवैध तरीके से सरकारी नौकरी प्राप्त की है और जांच में यह प्रमाणित होता है, तो ऐसे मामलों में संबंधित सेवा नियमों और कानून के अनुरूप आवश्यक कार्रवाई की जानी चाहिए।

मंत्री ने यह भी कहा कि सरकार वास्तविक और योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उनके अनुसार लाखों युवा पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया के माध्यम से सरकारी सेवाओं में चयन की उम्मीद रखते हैं और यदि किसी प्रकार की अनियमितता होती है, तो उसका सबसे अधिक नुकसान ईमानदार अभ्यर्थियों को उठाना पड़ता है।

इस बीच, PSC की ओर से इन आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मामले को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है और विभिन्न पक्ष निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं। जांच की दिशा और आगे की कार्रवाई राज्य सरकार तथा संबंधित जांच एजेंसियों के निर्णय पर निर्भर करेगी।

प्रशासनिक और कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और स्वतंत्र जांच सार्वजनिक संस्थाओं की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के आरोप सामने आते हैं, तो सभी दस्तावेजों, चयन प्रक्रिया, डिजिटल रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच आवश्यक होती है ताकि तथ्यों के आधार पर उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।

फिलहाल, मामले में लगाए गए सभी आरोप जांच और सत्यापन के अधीन हैं। किसी भी कथित अनियमितता या आपराधिक दायित्व की अंतिम पुष्टि विस्तृत जांच तथा न्यायिक एवं वैधानिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

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