सोशल मीडिया लिंक के जरिए फंसाए गए लोग; फोन डेटा चोरी कर ब्लैकमेल और जबरन वसूली का बढ़ता खतरा

केरल लोन ऐप घोटाला: छात्र और गृहिणियां सबसे अधिक प्रभावित, ₹70 करोड़ की साइबर ठगी का नेटवर्क उजागर

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By Roopa
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तिरुवनंतपुरम। केरल में अवैध लोन ऐप्स से जुड़ा एक बड़ा साइबर फ्रॉड नेटवर्क सामने आया है, जिसमें सबसे ज्यादा छात्र और गृहिणियां प्रभावित हुए हैं। साइबर पुलिस और विशेषज्ञों के अनुसार ये फर्जी लोन ऐप्स बेहद कम दस्तावेजों के साथ तुरंत लोन देने का झांसा देकर लोगों को फंसाते हैं और बाद में उन्हें गंभीर आर्थिक दबाव, मानसिक प्रताड़ना और ब्लैकमेलिंग का शिकार बनाते हैं।

जांच में सामने आया है कि ये ऐप्स किसी भी बैंक या मान्यता प्राप्त वित्तीय संस्था से जुड़े नहीं होते। इन्हें आधिकारिक ऐप स्टोर के बजाय सोशल मीडिया लिंक और मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के जरिए फैलाया जाता है। एक बार मोबाइल में इंस्टॉल होने के बाद ये ऐप्स बिना अनुमति के यूजर की निजी जानकारी जैसे फोटो गैलरी, कॉन्टैक्ट लिस्ट और अन्य संवेदनशील डेटा तक पहुंच बना लेते हैं।

तुरंत लोन का झांसा, अंदर छिपा शोषण

इन फर्जी ऐप्स का सबसे बड़ा हथकंडा यह है कि ये बिना गारंटी, बिना दस्तावेज और बिना लंबी प्रक्रिया के कुछ ही घंटों में लोन देने का दावा करते हैं। लोन राशि आमतौर पर ₹50,000 तक सीमित होती है, जिससे जरूरतमंद लोग आसानी से आकर्षित हो जाते हैं।

लेकिन असल में इन शर्तों के पीछे भारी शोषण छिपा होता है। इन ऐप्स पर ब्याज दरें 40% से भी अधिक होती हैं और 10% तक की प्रोसेसिंग फीस पहले ही काट ली जाती है। इसके कारण उधारकर्ताओं को मिलने वाली वास्तविक राशि काफी कम हो जाती है। पैसा आमतौर पर Google Pay जैसे डिजिटल माध्यमों से भेजा जाता है, जिससे लेनदेन वैध प्रतीत होता है।

छात्रों पर बढ़ता खतरा

पुलिस के अनुमान के अनुसार पिछले तीन वर्षों में इन लोन ऐप घोटालों से करीब ₹70 करोड़ की ठगी सामने आई है। इनमें बड़ी संख्या में निजी क्षेत्र के कर्मचारी और गृहिणियां शामिल हैं, जबकि छात्रों का हिस्सा भी लगातार बढ़ रहा है, जो लगभग 5% तक बताया जा रहा है।

अधिकारियों ने चिंता जताई है कि कई छात्र बिना परिवार को बताए लोन ले लेते हैं। जब भुगतान में कठिनाई आती है, तो पूरा परिवार इस आर्थिक संकट की चपेट में आ जाता है।

धमकी और डिजिटल ब्लैकमेलिंग

इस घोटाले का सबसे खतरनाक पहलू तब सामने आता है जब पीड़ित समय पर लोन नहीं चुका पाते। इसके बाद ठग फोन और मैसेज के जरिए धमकियां देना शुरू करते हैं और फिर पीड़ित के मोबाइल से निकाले गए डेटा के जरिए उसके दोस्तों और रिश्तेदारों से संपर्क करते हैं।

कई मामलों में पीड़ितों की निजी तस्वीरों को एडिट कर अश्लील या आपत्तिजनक रूप दिया जाता है और उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। पैसे न देने पर इन फर्जी तस्वीरों को सार्वजनिक करने की धमकी दी जाती है।

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कर्ज का जाल और मानसिक प्रभाव

लगातार दबाव और बदनामी के डर से कई लोग पुराने कर्ज चुकाने के लिए नए लोन लेने पर मजबूर हो जाते हैं, जिससे वे एक कभी न खत्म होने वाले कर्ज के चक्र में फंस जाते हैं। यह स्थिति गंभीर मानसिक तनाव, चिंता, अवसाद और कई मामलों में आत्महत्या की प्रवृत्ति तक को जन्म देती है।

संगठित नेटवर्क की आशंका

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह सिर्फ स्थानीय धोखाधड़ी नहीं, बल्कि एक संगठित साइबर क्राइम नेटवर्क का हिस्सा है, जो देश के बाहर से भी संचालित हो सकता है।

प्रख्यात साइबर अपराध विशेषज्ञ और पूर्व IPS अधिकारी प्रो. त्रिवेणी सिंह ने ऐसे मामलों पर चेतावनी देते हुए कहा कि साइबर अपराधी अब तकनीक के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक दबाव का भी इस्तेमाल कर रहे हैं। उनके अनुसार, “ये लोन ऐप नेटवर्क डर, जल्दबाजी और डिजिटल जागरूकता की कमी का फायदा उठाते हैं। एक बार जब फोन तक पहुंच मिल जाती है, तो पूरा कॉन्टैक्ट और डेटा सिस्टम वसूली का हथियार बन जाता है।”

उन्होंने लोगों को सलाह दी कि अनजान स्रोतों से ऐप डाउनलोड न करें और किसी भी ऐप को अनावश्यक अनुमति न दें।

पुलिस की जांच और कार्रवाई

हालांकि पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है, फिर भी मामलों की संख्या बढ़ती जा रही है। जांचकर्ताओं का कहना है कि अपराधी लगातार अपनी तकनीक बदल रहे हैं और एन्क्रिप्टेड चैनलों का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे उन्हें पकड़ना मुश्किल हो रहा है।

निष्कर्ष

केरल का यह लोन ऐप घोटाला डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों की गंभीर तस्वीर पेश करता है। आसान लोन के लालच में लोगों की निजी जानकारी का दुरुपयोग कर आर्थिक और मानसिक शोषण किया जा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इसके लिए मजबूत साइबर जागरूकता, सख्त कानून प्रवर्तन और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बेहद जरूरी है, ताकि इस तरह के खतरनाक नेटवर्क पर लगाम लगाई जा सके।

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