कानपुर किडनी रैकेट में 12वीं पास बताए जा रहे ‘डॉ. अली’ की भूमिका, अवैध ट्रांसप्लांट और लाखों रुपये प्रति ऑपरेशन कमाने के दावों ने जांच को और गंभीर बना दिया।

सोशल मीडिया से शुरू, विदेश तक पहुंचा जासूसी नेटवर्क: 53 खातों में फंडिंग का बड़ा खेल उजागर

Team The420
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गाजियाबाद/कौशांबी। उत्तर प्रदेश के कौशांबी से उजागर हुए जासूसी नेटवर्क ने देश की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। शुरुआती जांच में 53 बैंक खातों के जरिए ₹1.27 करोड़ की विदेशी फंडिंग का खुलासा होने के बाद अब इस पूरे मामले की जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को सौंपे जाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह मामला अब एक संगठित और बहु-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय जासूसी साजिश के रूप में सामने आ रहा है, जिसके तार पाकिस्तान सहित यूके, मलेशिया और सऊदी अरब तक जुड़े पाए गए हैं।

सूत्रों के मुताबिक, केस ट्रांसफर को लेकर संबंधित स्तर पर औपचारिक पत्राचार किया जा चुका है और जल्द ही एनआईए इस जांच को अपने हाथ में ले सकती है। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों ने संकेत दिया है कि यह नेटवर्क केवल स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं था, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संचालित किया जा रहा था।

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अब तक गाजियाबाद और हापुड़ जिलों से कुल 29 संदिग्धों को पकड़ा जा चुका है, जिनमें छह नाबालिग भी शामिल हैं। इस पूरे नेटवर्क का खुलासा 14 मार्च को सुहैल मलिक और सानिया इरम की गिरफ्तारी के बाद हुआ था। इसके बाद 20 और 21 मार्च को कई अन्य संदिग्धों को हिरासत में लिया गया, जबकि 24 मार्च को दिल्ली, शामली और कौशांबी से तीन और आरोपियों की गिरफ्तारी की गई। लगातार हो रही इन कार्रवाइयों से यह स्पष्ट हो गया कि नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ था।

जांच में यह सामने आया है कि इस नेटवर्क को संचालित करने के लिए कुल 53 बैंक खातों का इस्तेमाल किया गया, जिनमें विदेशों से पैसे ट्रांसफर किए गए। ये खाते पंजाब, पश्चिम बंगाल और बिहार में स्थित बताए जा रहे हैं। सबसे अधिक रकम बिहार के भागलपुर से जुड़े एक खाते में भेजी गई, जो अब जांच एजेंसियों के लिए प्रमुख फोकस बन गया है। मनी ट्रेल के विश्लेषण से संकेत मिला है कि इन फंड्स का उपयोग संदिग्ध गतिविधियों और नेटवर्क के विस्तार में किया जा रहा था।

डिजिटल डिवाइस की जांच में कई अहम सुराग मिले हैं। आरोपियों के मोबाइल फोन से बरामद चैट, फोटो और वीडियो इस नेटवर्क की कार्यप्रणाली को उजागर करते हैं। एक महत्वपूर्ण खुलासे में यह सामने आया कि सोनीपत रेलवे स्टेशन पर लगे कैमरे के जरिए ट्रेनों के संचालन की करीब आठ घंटे की रिकॉर्डिंग तैयार कर उसे विदेश भेजा गया। सुरक्षा एजेंसियां इसे अत्यंत गंभीर मान रही हैं, क्योंकि इससे देश के संवेदनशील ढांचे की जानकारी लीक होने का खतरा पैदा होता है।

जांच एजेंसियों के अनुसार, इस नेटवर्क का संचालन डिजिटल माध्यमों के जरिए किया जा रहा था। मुख्य आरोपी समीर उर्फ ‘शूटर’ ने वर्ष 2023 में सोशल मीडिया पर हथियारों के साथ अपनी तस्वीरें और वीडियो साझा किए थे। इन्हीं पोस्ट के माध्यम से सुहैल मलिक और नौशाद अली ने उससे संपर्क किया। इसके बाद उन्हें एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया, जहां पाकिस्तान में बैठे सरफराज के निर्देश पर उन्हें अलग-अलग कार्य सौंपे जाने लगे। यह पूरा नेटवर्क तकनीक के सहारे संचालित हो रहा था, जिससे इसकी पहचान करना चुनौतीपूर्ण हो गया।

जांच में यह भी सामने आया है कि यह नेटवर्क पिछले करीब दो वर्षों से सक्रिय था और इसका उद्देश्य भारत के संवेदनशील स्थानों से जुड़ी जानकारी एकत्र करना था। एजेंसियों का मानना है कि इस जानकारी का इस्तेमाल भविष्य में किसी बड़ी साजिश को अंजाम देने के लिए किया जा सकता था।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अब एनआईए की एंट्री को बेहद अहम माना जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन और आतंकी फंडिंग से जुड़े मामलों की जांच में विशेषज्ञता रखने वाली एनआईए इस केस में गहराई से पड़ताल कर सकती है। इसके अलावा अन्य खुफिया एजेंसियां भी इस जांच में समन्वय के साथ काम कर रही हैं।

फिलहाल, जांच एजेंसियां मनी ट्रेल को खंगालने, विदेशी स्रोतों की पुष्टि करने और नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों की पहचान करने में जुटी हैं। आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे होने की संभावना है, जो देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए अहम साबित हो सकते हैं

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