फर्जी ‘मैनेजर’ बनकर ईमेल से संपर्क, एजेंसी दिलाने का झांसा; रकम ट्रांसफर होते ही मोबाइल बंद, केस दर्ज

“बिजनेस का सपना बना साइबर ट्रैप”: MRF के नाम पर ₹6.44 लाख की ठगी

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By Roopa
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कौशांबी: कारोबार शुरू करने का सपना देख रहे एक युवक को साइबर ठगों ने ऐसा झांसा दिया कि देखते ही देखते उसकी मेहनत की कमाई ₹6.44 लाख गायब हो गई। मामला जिले के पश्चिम शरीरा क्षेत्र के डेढ़ावल गांव का है, जहां राघवेंद्र प्रताप सिंह को MRF टायर एजेंसी दिलाने के नाम पर ठगी का शिकार बनाया गया। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाना में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है और मामले की जांच शुरू हो गई है।

जानकारी के अनुसार, राघवेंद्र प्रताप सिंह अपने इलाके में टायर शोरूम खोलना चाहते थे। इसी उद्देश्य से उन्होंने MRF कंपनी से संपर्क करने के लिए ईमेल भेजा। कुछ समय बाद उन्हें एक जवाब मिला, जिसने खुद को कंपनी का मैनेजर बताते हुए एजेंसी दिलाने की प्रक्रिया शुरू कराने का भरोसा दिया। बातचीत का तरीका इतना प्रोफेशनल था कि पीड़ित को कोई शक नहीं हुआ।

आरोपी ने खुद को “कृष्णा शुक्ला” के नाम से परिचित कराया और एजेंसी के लिए जरूरी औपचारिकताओं की जानकारी दी। उसने रजिस्ट्रेशन, सिक्योरिटी डिपॉजिट और अन्य प्रक्रियाओं के नाम पर एक बैंक खाता नंबर साझा किया। साथ ही यह भरोसा दिलाया कि जैसे ही भुगतान पूरा होगा, एजेंसी आवंटन की प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।

भरोसे में आकर राघवेंद्र ने अलग-अलग किश्तों में कुल ₹6,44,500 उस खाते में ट्रांसफर कर दिए। शुरुआत में आरोपी लगातार संपर्क में रहा, जिससे पीड़ित को लगा कि प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है। लेकिन जैसे ही पूरी रकम जमा हो गई, आरोपी का मोबाइल नंबर अचानक बंद हो गया।

जब पीड़ित ने कई बार संपर्क करने की कोशिश की और कोई जवाब नहीं मिला, तो उसे संदेह हुआ। इसके बाद वह बैंक पहुंचा और ट्रांजैक्शन की जानकारी ली, जहां उसे साफ हो गया कि उसके साथ साइबर ठगी हो चुकी है। इसके बाद उसने तुरंत मझंनपुर स्थित साइबर थाना पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।

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शिकायत में एक अन्य नाम “लवकुश कुमार” का भी जिक्र किया गया है, जिसे कथित तौर पर कंपनी के कॉर्पोरेट स्तर से जुड़ा बताया गया था। साथ ही एक मोबाइल नंबर भी पुलिस को दिया गया है, जिसके जरिए आरोपी लगातार संपर्क में था। पुलिस अब इन सभी डिजिटल सुरागों के आधार पर आरोपियों की तलाश में जुटी है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि ठगों ने बेहद योजनाबद्ध तरीके से इस वारदात को अंजाम दिया। उन्होंने कंपनी के नाम, ईमेल कम्युनिकेशन और प्रोफेशनल भाषा का इस्तेमाल कर भरोसा जीतने की कोशिश की। इस तरह के मामलों में अपराधी असली कंपनियों की वेबसाइट, ईमेल पैटर्न और बिजनेस प्रक्रिया की नकल करते हैं, जिससे आम व्यक्ति के लिए असली और नकली के बीच अंतर करना मुश्किल हो जाता है।

साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की ठगी में “सोशल इंजीनियरिंग” का इस्तेमाल किया जाता है, जिसमें तकनीकी हैकिंग से ज्यादा इंसानी भरोसे को निशाना बनाया जाता है। Future Crime Research Foundation के अनुसार, बिजनेस और एजेंसी से जुड़े साइबर फ्रॉड के मामलों में तेजी आई है, खासकर छोटे शहरों और कस्बों में, जहां लोग नए कारोबार के अवसर तलाश रहे होते हैं।

प्रसिद्ध साइबर क्राइम विशेषज्ञ और पूर्व आईपीएस अधिकारी Prof. Triveni Singh ने कहा, “साइबर अपराधी अब बड़ी कंपनियों के नाम और प्रोफेशनल कम्युनिकेशन का इस्तेमाल कर भरोसा जीतते हैं। किसी भी तरह का भुगतान करने से पहले कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत माध्यम से सत्यापन करना बेहद जरूरी है। एक छोटी सी लापरवाही बड़ी आर्थिक क्षति में बदल सकती है।”

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और बैंक खातों, मोबाइल नंबरों तथा अन्य डिजिटल ट्रेल की जांच की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

यह घटना एक बार फिर चेतावनी देती है कि डिजिटल दौर में किसी भी बिजनेस ऑफर या एजेंसी के नाम पर बिना जांच-पड़ताल के भरोसा करना जोखिम भरा हो सकता है। खासकर जब मामला बड़ी रकम के लेन-देन का हो, तो सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।

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